इराक को जबरदस्ती युद्ध में झोंकने के लिए बुश पर चलेगा केस!
लंदन। आज दुनिया आईएसआईएस नाम के जिस राक्षस की दहशत में रहने को मजबूर है, उसके लिए कई विशेषज्ञों ने अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। विशेषज्ञ आज तक यह बात कहने से नहीं हिचकते हैं कि अमेरिका ने इराक में जिस युद्ध की शुरुआत की थी,आईएसआईएस को उसी युद्ध ने शह दी थी। अब सर जॉन चिलकॉट की 6,000 पेजों वाली रिपोर्ट ने भी कुछ हद तक इस बात पर मुहर लगा दी है।

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चल सकता है बुश पर केस
बुधवार को आई चिलकॉट रिपोर्ट ने उस समय के ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और उनके प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस रिपोर्ट के बाद अब ब्लेयर और उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति रहे जॉर्ज बुश पर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) में मुकदमा चलाने का आधार पैदा हो गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 'युद्ध कोई आखिरी विकल्प नहीं था।'
ब्लेयर ने लिया विवादित फैसला
इस रिपोर्ट में टोनी ब्लेयर के उस फैसले जिसमें उन्होंने अमेरिका के साथ जाने का निर्णय किया था, उसे सबसे विवादित फैसला बताया गया है। आपको बता दें कि ब्लेयर को दो बार जांच के लिए चिलकॉट आयोग के सामने पेश होना पड़ा था।
रिपोर्ट में युद्ध को लेकर बुश और ब्लेयर के बीच जो भी संवाद हुआ उसका जिक्र भी किया गया है। वर्ष 2001 से वर्ष 2007 के बीच बुश और ब्लेयर ने युद्ध को लेकर जो भी बातें कीं, उन्हें इस 6,000 पेज की रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है।
9/11 के एक माह बाद लिखी चिट्ठी
बुश ने अमेरिका पर 11 सितंबर को हुए आतंकी हमले के ठीक एक माह बाद यानी 11 अक्टूबर 2001 को ब्लेयर को चिट्ठी लिखी थी जिसमें उन्होंने ब्लेयर से कहा था कि अमेरिका और ब्रिटेन के सद्दाम हुसैन ने निपटना होगा।
बुश ने लिखा था कि इराक पर हमला करने के बाद अरब के देशों के साथ ही साथ रूस और यूरोपियन यूनियन का एक बड़ा हिसा उनसे अलग हो जाएगा। लेकिन युद्ध की वजह से पाकिस्तान पर होने वाले असर से वह काफी परेशान थे।












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