पुतिन की 'रूसी दुनिया' वाली नई विदेश नीति, भारत-चीन रिश्तों का जिक्र, क्या इससे अमेरिका को फर्क पड़ेगा?
पुतिन की नई नीति के अनुसार, रूस को स्लाविक देशों, भारत और चीन के साथ सहयोग बढ़ाना चाहिए। साथ ही मध्य पूर्व, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के साथ अपने संबंधों को और अधिक मजबूत करना चाहिए।
मास्को/लंदन, 7 सितंबर : यूक्रेन संकट और अमेरिका और यूरोपीय देशों से बिगड़ते रिश्तों के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने एक नई विदेश नीति (new foreign policy) सिद्धांत को मंजूरी दी है। यह विदेश नीति 'रूसी दुनिया'के ईर्द गिर्द वाली अवधारणा पर आधारित है। जानकार बताते हैं कि, रूसी दुनिया पर आधारित यह एक ऐसी अवधारणा है जिसके तहत रूढिवादी विचारक विदेशों में रूसी-भाषियों के समर्थन में हस्तक्षेप को सही ठहराते हैं।

यूक्रेन संकट के बाद से परिस्थितियां बदलीं
बता दें कि, 24 फरवरी को जब यूक्रेन के खिलाफ रूसी जंग के आगाज के बाद से मास्को के खिलाफ अमेरिका समेत कई यूरोपीय देश एकजुट होकर उसके खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगा दिए। हालांकि, चीन और भारत कभी भी रूस के खिलाफ खुलकर बातें नहीं कीं। जंग के वक्त भारत ने रूस के साथ व्यापार को आगे बढ़ाया, जबकि अमेरिका ने कई बार भारत से रूस को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं करने के लिए भारत पर दबाव बनाता गया। वहीं, चीन ने ताइवान को लेकर अमेरिका से बढ़ते तनावों के बीच रूस के साथ अच्छे संबंध स्थापित कर लिए। इन सब बातों को देखते हुए पुतिन भारत और चीन के साथ और भी अच्छे संबंध बनाने के हिमायती बन गए हैं।

पुतिन की नई नीति में भारत, चीन का जिक्र
पुतिन की नई नीति के अनुसार, रूस को स्लाविक देशों, भारत और चीन के साथ सहयोग बढ़ाना चाहिए। साथ ही मध्य पूर्व, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के साथ अपने संबंधों को और अधिक मजबूत करना चाहिए। इस नीति में कहा गया है कि, रूस को अबकाजिया और ओसेशिया के साथ अपने रिश्तों को और गहरा करना चाहिए। बता दें कि, अबकाजिया और ओसेशिया जॉर्जियाई के दो ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्हें 2008 में जॉर्जिया के खिलाफ युद्ध के बाद मास्को ने स्वतंत्र मान्यता दी थी। कुछ ऐसे ही विचार पूर्वी यूक्रेन के डोनेटस्क पीपुल्स रिपब्लिक और लुहान्सक पीपुल्स रिपब्लिक के लिए भी जाहिर किए गए हैं।

दुनियाभर के रूसियों को संगठित करना चाहते हैं पुतिन!
पुतिन की नई नीति एक तरह की सॉफ्ट पावर रणनीति के रूप में प्रस्तुत करते हुए, यह रूसी राजनीति और धर्म के आसपास के नीतिगत विचारों में निहित है। इन नीतियों के तहत कुछ कट्टरपंथियों ने यूक्रेन के कुछ हिस्सों पर मास्को के कब्जे को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल किया है। इसने कहा कि विदेशों में अपने हमवतन के साथ रूस के संबंधों ने उसे "एक बहुध्रुवीय दुनिया के निर्माण के लिए प्रयास कर रहे एक लोकतांत्रिक देश के रूप में अपनी छवि को मजबूत करने" की अनुमति दी।

रूसियों के प्रति पुतिन का प्रेम
बता दें कि, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 1991 में सोवियत संघ (USSR) के पतन के बाद नए स्वतंत्र राज्यों में निवास करने वाले लाखों रूसियों के साथ प्रेम-भाव और संवेदना जताते आए हैं। सोवियत संघ के पतन को जातीय रूसियों के लिए दुखद भाग्य बताते हैं। रूस मध्य एशिया से लेकर बाल्टिक तक, पूर्व सोवियत को अपने प्रभाव वाला वैद्य क्षेत्र मानता आया है और जिसका विरोध उन देशों के साथ-साथ कई पश्चिमी देशों ने भी किया है। इस नई नीति के तहत रूसी संघ विदेशों में रहने वाले रूसियों को उनके अधिकारों की पूर्ति करने, उनके हितों की सुरक्षा पहचान सुनिश्चित करने के लिए उन्हें सहायता देता है।












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