VIDEO: टूटे सारे रिकॉर्ड, समुद्र के अंदर 8 किलोमीटर की गहराई पर किया गया छेद

नई दिल्ली, 24 मई: आसमान की ऊंचाइयों को छूने के साथ ही इंसान समुद्र की गहराइयों में भी रोजाना नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। अब एक बड़ी कामयाबी जापान के शोधकर्ताओं को मिली है, जिन्होंने समुद्र की गहराई में 5 मील यानी 8000 मीटर पर ड्रिल किया है। इसे समुद्र में दुनिया का सबसे गहरा होल कहा जा रहा है। साथ ही उम्मीद जताई जा रही कि भविष्य में भी ये रिकॉर्ड तोड़ना काफी मुश्किल होगा। (वीडियो-नीचे)

पौने तीन घंटे का लगा वक्त

पौने तीन घंटे का लगा वक्त

LiveScience की रिपोर्ट के मुताबिक 14 मई को जापान के शोधकर्ता प्रशांत महासागर में 8000 मीटर की गहराई में एक छेद को ड्रिल करने में कामयाब रहे। ये किसी भी महासागर में अब तक का सबसे गहरा छेद है। एक शोधकर्ता ने बताया कि उनकी रिसर्च टीम कैमी वेसल पर सवार थी। इसके बाद उन्होंने गेंट पिस्टन कोरर नाम की लंबी ड्रील मशीन को प्रशांत महासागर में भेजना शुरू किया। सुमद्र तल पर पहुंचने के बाद ड्रिल मशीन ने 37 मीटर गहरा छेद किया। ये अपने आप में एक जटिल प्रक्रिया थी, जिसमें 2 घंटे 40 मिनट का वक्त लगा है।

मिलेंगी भूकंप से जुड़ी जानकारियां

मिलेंगी भूकंप से जुड़ी जानकारियां

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि जापान ट्रेंच के निचले हिस्से में टकराने के बाद टीम ने गड्ढे से 120 फुट लंबा तलछट कोर निकाला। इस निचले हिस्से में जो कुछ मिला है, उससे भूकंप के इतिहास से जुड़ी कई अहम जानकारियां मिल सकती हैं। इस ड्रिल साइट से कुछ दूरी पर 2011 में तोहोकू भूकंप का केंद्र स्थित है। उस भूकंप के दौरान काफी बड़ी सुनामी आई थी, जिससे फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट को बड़ा नुकसान हुआ था।

1978 में हुआ था बड़ा ड्रिल

1978 में हुआ था बड़ा ड्रिल

इससे पहले 1978 में ग्लोमर चैलेंजर नाम के वेसेल ने काफी गहराई में छेद किया था। ऐसे में इस ऑपरेशन ने 50 साल पहले के ड्रिलिंग रिकॉर्ड को तोड़ दिया। वहीं जमीन और समुद्र दोनों जगहों पर सबसे बड़े ड्रिल की बात करें, तो ये रूस में कोला सुपरदीप बोरहोल के पास है। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 1970 में हुई थी, जो 1989 में जाकर पूरा हुआ। उस दौरान रूसी शोधकर्ताओं ने जमीन से 12000 मीटर गहरा छेद दिया था। ये रिकॉर्ड अभी भी वैसा का वैसा बरकरार है।

समुद्र में क्यों मुश्किल है ऑपरेशन?

समुद्र में क्यों मुश्किल है ऑपरेशन?

दरअसल धरती पर छेद करना आसान है, क्योंकि आप ड्रिल मशीन लगाकर छोड़ दीजिए। शुरूआत में वो तेजी से छेद करेगी। जैसे-जैसे धरती की मोटी परत आएगी, ड्रिल मशीन का काम थोड़ा बढ़ जाएगा, लेकिन छेद होता रहेगा। वहीं समुद्र में हालात एकदम विपरीत है। जैसे-जैसे आप पानी के अंदर जाएंगे, वैसे-वैसे दबाव बढ़ता जाता है। ऐसे में 8000 मीटर नीचे तक किसी मशीन को भेजने के लिए उसे इतना मजबूत बनाना पड़ेगा कि वो पानी का दबाव झेल सके।

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