VIDEO:सौर तूफान की चपेट में आए एलन मस्क के 40 Starlink सैटेलाइट कैसे जले, देखिए
नई दिल्ली, 11 फरवरी: सूरज पर हुए महाविस्फोट की वजह से पैदा हुए सौर तूफान ने एलन मस्क की अगुवाई वाली कंपनी के 40 सैटेलाइट कैसे तबाव किए हैं, उसका वीडियो भी आ गया है। इस प्राकृतिक कहर का वैज्ञानिक उपग्रहों पर ऐसा असर हुआ है कि वह पुच्छल तारे की तरह आसमान में जलते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। वन इंडिया इस घटना से जुड़ी हर जानकारी और ताजा अपडेट पिछले कुछ दिनों से लगातार आप तक पहुंचा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना से स्पेसएक्स कंपनी को लगभर 2 करोड़ अमेरिकी डॉलर का चूना लगा है।

स्टारलिंक सैटेलाइट जलने का वीडियो आया
ब्रह्मांड का पूर्ण रहस्य अभी तक कोई नहीं समझ पाया है। एलन मस्क से जुड़ी स्पेसएक्स कंपनी की 40 स्टारलिंक सैटेलाइट के साथ लॉन्च के अगले ही दिन जो कुछ भी हुआ, वह बहुत ही बुरा है। रिपोर्ट के मुताबिक सूर्य से निकली असीम ऊर्जा की चपेट में आकर एक दिन पहले ही लॉन्च हुए 49 में 40 स्टारलिंग सैटेलाइट नष्ट गए। फॉर्चून की रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना की वजह से कंपनी को 2 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है। अब एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दिख रहा है कि स्पेसएक्स के सैटेलाइट पृथ्वी के वायुमंडल में घुसते ही जल कर नष्ट हो रहे हैं।

आकाश में धूमकेतु की तरह दिख रहे हैं जलते हुए सैटेलाइट
वन इंडिया आपको अपनी रिपोर्ट में पहले ही बता चुका है कि कैसे सूरज की सतह पर पहले एक विस्फोट हुआ था और फिर उससे निकले कोरल मास इजेक्शन की वजह से भू-चुंबकीय तूफान पैदा हुआ, जो लॉन्चिंग के अगले ही दिन एलन मस्क से जुड़ी स्पेसएक्स कंपनी के स्टारलिंक सैटेलाइट से टकराया गया। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक इस 'नाटकीय वीडियो में दिख रहा है कि अंतरिक्ष का मलबा रात में आकाश में प्यूर्टो रिको के ऊपर धूमकेतु की तरह दिखाई पड़ रहा है।'

3 फरवरी को लॉन्च किए गए थे 49 स्टारलिंक सैटेलाइट
बता दें कि फाल्कन 9 रॉकेट इसी महीने की 3 फरवरी को 49 नए स्टारलिंक सैटेलाइट के साथ लॉन्च किया किया गया था, जिसे ग्रुप जी4-7 का नाम दिया गया। जबकि, जनवरी महीने में ही सूरज के पृथ्वी से भी बड़ी एक सतह पर महाविस्फोट हुआ था और वहां से बहुत ही तेज रफ्तार में सौर विस्फोट अंतरिक्ष में फैलने लगा। ये सारे सैटेलाइट एक दिन बाद ही यानी 4 फरवरी को उस सौर विस्फोट की चपेट में आ गए। यह वीडियो सिर्फ एक स्टारलिंग सैटेलाइट पर टूटे सूरज के कहर का बताया जा रहा है, जिसे 7 फरवरी को प्यूर्टो रिको के एक नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन के कैमरे में कैद किया गया है। माना जा रहा है कि यह स्टारलिंक सैटेलाइट घटना के दौरान प्यूर्टो रिको के ऊपर था।

तूफान के चलते वायुमंडल का तापमान और घनत्व बढ़ गया था
स्पेसएक्स ने पहले ही अपने बयान में कहा है कि 49 में से 40 प्रभावित सैटेलाइट या तो धरती के वायुमंडल में दोबारा घुस चुके होंगे या घुसने वाले होंगे; और इस दौरान वह नष्ट जाएंगे। लिहाजा कोई भी मलबा नहीं पैदा होगा और ना ही उसका कोई हिस्सा जमीन पर गिरेगा। कंपनी की ओर से यह भी कहा गया है कि सौर तूफान की वजह से वायुमंडल का तापमान और घनत्व बढ़ गया था और यह इतना तीव्र था कि पहले के सैटेलाइट के मुकाबले घसीटते हुए इन्हें 50 फीसदी ज्यादा ऊंचाई तक पहुंचा दिया। कोशिश की गई कि ये कागज की शीट की तरह उड़ते रहे हैं, लेकिन यह पूरी तरह सफल नहीं हुआ।

सौर तूफान की वजह से काफी नुकसान होने का रहता है खतरा
नासा के स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर के मुताबिक भू-चुंबकीय तूफान की वजह से धरती के चुंबकमंडल में बहुत ही ज्यादा बाधाएं पैदा होती हैं। सौर तूफान की वजह से सैटेलाइट को तो नुकसान होता ही है, ज्यादा गंभीर स्थिति में जीपीएस सिस्टम भी प्रभावित हो सकते हैं और यहां तक कि पॉवर ग्रिड भी बंद हो जा सकते हैं।
प्यूर्टो रिको की एक संस्था ने कैद किया है वीडियो
वीडियो में साफ दिख रहा है कि 40 स्टारलिंक सैटेलाइट के साथ उस दौरान क्या हुआ था ? हो सकता है कि आने वाले वक्त में यह वीडियो ऐसी प्राकृतिक घटनाओं से बचाव के लिए कुछ नई तकनीक विकसित करने में मदद करे। (सूरज वाली तस्वीरें-प्रतीकात्मक)












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