हिंदू मंदिर पर दर्जनों हमले, अमेरिका करता है सिर्फ निंदा.. FBI की पहुंच से आरोपी दूर, बाइडेन का डबल गेम?

Vandalism Of Hindu Temple In America: पिछले कुछ महीनों से अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में हिंदू मंदिरों पर हमलों की दर्जन भर से ज्यादा घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन हैरानी की बात है, कि अमेरिकन FBI आज तक एक भी आरोपी तक पहुंचने में नाकाम रही है।

ये वही एफबीआई है, जिसने दावा किया है, कि खालिस्तानी अलगाववादी नेता गुरपतपंत सिंह पन्नून की हत्या की साजिश में एक भारतीय नागरिक शामिल है, जिसे एक दिल्ली में बैठे एक भारतीय अधिकारी से निर्देश मिल रहा था।

Vandalism Of Hindu Temple In America

ये वही अमेरिका है, जिसने भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता की गिरफ्तारी को लेकर एक लंबी चौड़ी कहानी तैयार की है और कनेक्शन स्थापित किया है, कि कैसे भारतीय अधिकारी के निर्देश पर चेक गणराज्य से एक भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क में रहने वाले खालिस्तानी नेता की हत्या के लिए सुपारी दी थी।

अमेरिका ने इतने खुलासे कर दिए, लेकिन अमेरिका की खुफिया एजेंसियां आज तक इस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई हैं, कि अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हुए किए गये दर्जनों हमलों के लिए कौन जिम्मेदार है। हिंदू मंदिरों को कौन निशाना बना रहा है और भारत विरोधी नारे कौन लिख रहा है?

निंदा से आगे नहीं बढ़ पाया अमेरिका

ये अमेरिका का डबल गेम नहीं तो और क्या है, कि पिछले एक साल में मंदिरों के साथ साथ भारतीय वाणिज्य दूतावास पर भी हमले किए जा चुके हैं, लेकिन एक भी आरोपी गिरफ्तार नहीं किया गया है। क्या ये बाइडेन प्रशासन का निकम्मापन नहीं है?

क्या ये बाइडेन प्रशासन का डबल गेम नहीं है, जो भारत पर खालिस्तानी आतंकी की हत्या की कथित साजिश को लेकर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है, लेकिन हिंदू मंदिरों और भारतीय दूतावास पर हो रहे हमलों को लेकर सिर्फ कड़ी निंदा कर चुप बैठ जाता है।

क्या इसे ये नहीं माना जाए, कि अमेरिका जान-बूझकर भारत विरोधी तत्वों को शह देने में लगा हुआ है। क्या इस ये नहीं माना जाए, कि अमेरिका, जान-बूझकर ऐसे तत्वों को सींच रहा है, जो आगे जाकर भारत में अशांति फैलाने की कोशिश करे।

भारत के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकर भी अमेरिका की मंशा पर शक जता रहे हैं।

अमेरिका ने शनिवार को कैलिफोर्निया में एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की निंदा की और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना सुनिश्चित करने के लिए पुलिस के प्रयासों का स्वागत किया।

कैलिफोर्निया के नेवार्क में श्री स्वामीनारायण मंदिर हिंदू मंदिर में भारत विरोधी भित्तिचित्रों के साथ तोड़फोड़ की गई और पुलिस संभावित घृणा अपराध के रूप में मामले की जांच कर रही है।

अमेरिकी विदेश विभाग के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के ब्यूरो ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "हम कैलिफोर्निया में श्री स्वामीनारायण मंदिर हिंदू मंदिर में हुई तोड़फोड़ की निंदा करते हैं। हम नेवार्क पुलिस विभाग के प्रयासों का स्वागत करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए।"

अमेरिका की निंदा आ गई, लेकिन हंसी इस बात पर आती है, कि 2 दिन बीत जाने के बाद भी एक भी गिरफ्तारी नहीं की गई है।

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों की तरफ से भी हिंदू मंदिर पर किए गये हमले की निंदा की गई है।

भारतीय मूल के सांसद श्री थानेदार और रो खन्ना समेत कई और सांसदों ने हिंदू मंदिर पर हुए हमले की निंदा की है और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

भारत की कड़ी प्रतिक्रिया

वहीं, भारत ने कैलिफोर्निया के एक प्रमुख हिंदू मंदिर में खालिस्तान समर्थक नारों और भारत विरोधी भित्तिचित्रों के साथ तोड़फोड़ की जांच की मांग की है।

तस्वीरों में न्यूआर्क के स्वामीनारायण मंदिर वासना संस्था की दीवारों पर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नफरत भरे नारे लिखे हुए दिखाई दे रहे हैं।

घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ऐसे 'चरमपंथियों' को जगह नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया, कि सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने पहले ही इस मामले को अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष उठाया है और जांच चल रही है।

सैन फ्रांसिस्को में भारतीय दूतावास ने इस घटना की कड़ी निंदा की और कहा कि इससे भारतीय समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।

उन्होंने एक्स पर लिखा, "इस घटना ने भारतीय समुदाय की भावनाओं को आहत किया है। हमने इस मामले में अमेरिकी अधिकारियों द्वारा तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ त्वरित जांच और त्वरित कार्रवाई के लिए दबाव डाला है।"

मंदिर प्रशासन के मुताबिक घटना गुरुवार रात की है।

यानि, मंदिर पर हमला हुए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अमेरिका की खुफिया एजेंसियां एक भी सुराग नहीं जुटा पाई हैं, जो साफ जताता है, कि ऐसे तत्वों को अमेरिका शह दे रहा है।

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