भारत पर जुआ खेलने वाले अमेरिका को मिलेगी हार... मोदी-बाइडेन के ऐतिहासिक समझौतों पर ग्लोबल टाइम्स का तंज
China on India-US Tie: भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऐतिहासिक अमेरिका यात्रा ने चीन में हलचल पैदा कर दी है और चीन की तरफ से बार बार कहा जा रहा है, कि भारत और अमेरिका के बीच हुई इस दोस्ती में दम नहीं है। चीन अलग अलग तरीकों से हवाला देने की कोशिश कर रहा है, कि भारत, एशिया में चीन की जगह नहीं ले सकता है।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में एक बार फिर से कहा है, कि चीन के पड़ोसी देशों पर जुआ खेलने वाले अमेरिका को हार ही हासिल होगी। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि भारत और अमेरिका के अधिकारियों ने इस यात्रा को उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया, ताकि इस यात्रा को लेकर एक बेहतरीन माहौल तैयार किया जा सके और एक माहौल बना भी।

क्या चीन को लग रहा है डर?
ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, कि अमेरिकी अधिकारियों ने कहा, कि "भारत-अमेरिका संबंधों में आकाश ही सीमा है" जबकि मोदी ने कहा, कि "यहां तक कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी के लिए आकाश भी सीमा नहीं है"। दोनों पक्षों द्वारा जारी किया गया संयुक्त बयान, जिसमें कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच असहमति गायब नहीं हुई है या हल नहीं हुई है, बल्कि असहमतियों को कवर किया गया है।"
ग्लोबल टाइम्स ने भारत और अमेरिका के बीच जो समझौते हुए हुए हैं, उसे पाखंडी और चीन के खिलाफ बेचैनी करार दिया है।
ग्लोबल टाइम्स की इस बेचैनी को समझा जा सकता है, क्योंकि चीन की अर्थव्यवस्था मैन्यूफैक्चर पर टिकी है और चीन में मौजूद अरबों डॉलर की कंपनियां अमेरिकी हैं। अमेरिका से कॉन्ट्रैक्ट लेकर चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को विशाल बनाया है और अब जब अमेरिकी कंपनियों ने चीन से बाहर आना शुरू किया है, तो चीन का डरना स्वाभाविक है। यहां याद ये रखना है, कि चीन का सर्विस सेक्टर और कृषि सेक्टर काफी कमजोर है, जबकि भारत की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर का बड़ा योगदान रहा है और अब जाकर भारत ने मैन्युफैक्चरिंग में विकास की तरफ कदम बढ़ाया है और भारत ने अभी भी सर्विस सेक्टर को छोड़ा नहीं है।
भारत जानता है, कि सर्विस सेक्टर उसका सबसे मजबूत स्तंभ है, लिहाजा सर्विस सेक्टर को भारत ने मजबूती से पकड़ रखा है और चीन यहीं मार खाता है। लिहाजा अगर चीन में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर टूटता है, तो यकीन मानिए उसकी अर्थव्यवस्था को टूटने से कोई नहीं बचा सकता है।
ग्लोबल टाइम्स के आर्टिकल का आधार क्या है?
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि 'अमेरिका ने भारत पर जुआ खेला है और उसे हार मिलेगी।' और इसके लिए ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका की जनता का हवाला दिया है।
ग्लोबल टाइम्स के आर्टिकल में कहा गया है, कि अमेरिका भारत को वो टेक्नोलॉजी देगा, जो वो अपने गैर- सहयोगी पार्टनर्स के साथ साझा नहीं करता है, और अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनियां भारत में निवेश करेंगी। लेकिन, ग्लोबल टाइम्स ने उन कुछ अमेरिकी अखबारों का हवाला दिया है, जिन्होंने लिखा है, कि 'अमेरिका ने भारत पर दांव' लगाया है।
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि "अमेरिका के दिल में इस बात को लेकर कोई विश्वास नहीं है, कि भारत से दोस्ती कर लाभ प्राप्त किया जा सकता है या नहीं..।" आगे लिखा गया है, कि "वॉशिंगटन ने भारत को लेकर काफी उत्साह और आशावाद दिखाया है, लेकिन अमेरिरा की जनता को ही संदेह है, कि अमेरिका-भारत संबंध इतने चमकदार नहीं हैं।"
हालांकि, अमेरिका की जनता को भारत को लेकर संदेह है, ये कहां लिखा है, ग्लोबल टाइम्स ने ये नहीं बताया है। यानि, ये चीन की बौखलाहट को ही दर्शाता है, क्योंकि अगर भारत को लेकर अमेरिका की जनता के मन में संदेह है, तो फिर चीन को लेकर तो किसी तरह का कोई संदेह भी नहीं है और पूरी दुनिया जानती है, कि चीन के इरादे क्या हैं।
'चीन की वजह से भारत-यूएस में दोस्ती'
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ने लिखा है, कि "भले ही मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान चीन का कोई जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन तमाम विश्लेषक और ऑब्जर्वर इस बात को जानते और मानते हैं, कि अमेरिका और भारत के बीच गहरे होते संबंध की वजह चीन है।
चीनी मीडिया ऑउटलेट का कहना है, कि तमाम ऑब्जर्वर इस बात को माननते हैं, कि चीन से निपटने के लिए अमेरिका अपनी जियो-पॉलिटिकल फायदा हासिल करने के लिए भारत के सामने इस तहर के प्रस्ताव रख रहा है, और अमेरिका और भारत दोनों ही इसके बारे में मौन रूप से अवगत हैं। लेकिन "घनिष्ठ संबंधों" की यह उपयोगितावादी प्रकृति अस्थायी, अस्थिर और अविश्वसनीय है।












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