रूस पर भारत को धमकाने वाले अमेरिका ने अब बदले सुर, देने लगा है ये ऑफर
वाशिंगटन, 7 अप्रैल: अमेरिका ने रूस को लेकर भारत की नीति पर अपने सुर अब बदल लिए हैं। अमेरिका ने कहा है कि वह भारत को ऊर्जा आयात में दूसरा विकल्प देने को तैयार है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी जेन साकी ने डेली न्यूज कॉन्फ्रेंस में कहा है कि 'हम नहीं सोचते हैं कि भारत को रूसी ऊर्जा का आयात बढ़ाना चाहिए।' रूस से भारत के संबंधों के बदले उसने ऊर्जा आयात का दूसरा विकल्प उपलब्ध करवाने की पेशकश की है। रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर हाल के अमेरिकी रवैए में यह बहुत बड़ा बदलाव है। हाल ही में व्हाइट हाउस के नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के निदेशक ब्रायन डीज ने भारत को चेताते हुए धमकी दी थी कि रूस के साथ गठबंधन की बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

भारत के प्रति अमेरिका ने बदले सुर, दिया ये ऑफर
अमेरिका के व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी जेन साकी ने कहा है, 'हम नहीं सोचते कि भारत को रूस से ऊर्जा और बाकी चीजों का आयात को बढ़ाना चाहए, निश्चित रूप से चाहे ऐसे फैसले सभी देश अपने स्तर पर लेते हैं।' उन्होंने यहां तक कहा कि 'और (अमेरिका) यह भी स्पष्ट कर रहा है कि हम भारत को उसके आयात में विकल्प उपलब्ध कराने के लिए और एक भरोसेमंद सप्लायर के तौर पर किसी भी प्रयास में समर्थन देने के लिए तैयार हैं, भले ही वे रूस से अपने तेल का करीब एक से दो फीसद ही आयात कर रहे हों।' दरअसल, उनसे यह सवाल किया गया था कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति का ज्यादातर हिस्सा मध्य-पूर्व से मंगवाता है और 7.5 से 8 प्रतिशत अमेरिका से। जबकि, रूस से तो उसका आयात पहले 1 फीसदी से भी कम था।

दिल्ली में राजदूत की नियुक्ति अमेरिका की प्राथमिकता
अमेरिका के डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर दलीप सिंह के हालिया दिल्ली दौरे का हवाला देते हुए साकी ने कहा कि 'हमारे पास संवाद और उसमें शामिल करने के लिए कई तरीके हैं। और निश्चित रूप से अपने डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर को भेजना इसका एक उदाहरण है। लेकिन, साफ है कि हमारी प्राथमिकता एक निश्चित राजदूत की होगी। 'उन्होंने कहा कि लॉस एंजेलिस के मेयर एरिक गारसेट्टी की भारत में अमेरिकी राजदूत के तौर पर नियुक्ति अमेरिकी सीनेट में लटका हुआ है, क्योंकि कंफर्मेशन के लिए उनके पास जरूरी वोट नहीं हैं।

भारत के बयान के बाद अमेरिका की प्रतिक्रिया
इससे पहले बुधवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में रूस-यूक्रेन विवाद को लेकर कहा था कि भारत ने शांति और हिंसा की तत्काल समाप्ति की तरफ रहना तय किया है। उन्होंने कहा था कि भारत इस लड़ाई के सख्त खिलाफ है और खून बहाने से किसी भी समाधान तक नहीं पहुंचा जा सकता। उन्होंने ये भी कहा कि यूक्रेन की स्थिति पर भारत के ऐक्शन को राजनीतिक रंग देना बेवजह और अनुचित है। विदेश ममंत्री ने यह भी कहा था कि सरकार रूस के साथ आर्थिक लेन-देन को स्थिर करने पर काम कर रही है। उनके मुताबिक 'भारत का नजरिया इसके राष्ट्रीय मान्यताओं और मूल्यों, राष्ट्रीय हित और इसकी राष्ट्रीय रणनीति पर आधारित होना चाहिए।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सभी देशों की मजबूरी
असल में दुनिया के बाकी देशों की तरह ही भारत भी रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की बहुत बड़ी मार झेल रहा है। देश के कई राज्यों में तो पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं। तेल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार ने रूस से इसके आयात बढ़ाने पर ध्यान दिया है, जो किफायती कीमतों पर उपलब्ध है। लेकिन, अमेरिका जैसे मुल्क को यह बात रास नहीं आ रही है। जबकि, तथ्य यह है कि उसके सहयोगी यूरोपीय देश भी रूस पर अपनी निर्भरता कम करने को तैयार नहीं हैं। यहां तक कि अमेरिका के प्रमुख सहयोग हंगरी ने तो व्लादिमीर पुतिन की रूबल में गैस खरीदने की शर्त भी मान ली है। (आखिरी तस्वीर- प्रतीकात्मक)












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