यमन में अमेरिका की लगातार बमबारी, पन्नून पर उपदेश देने वाला बाइडेन प्रशासन कर रहा संविधान का उल्लंघन?
US Strikes on Yemen: संयुक्त राज्य अमेरिका ने लगातार दूसरी रात यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ यमन में हवाई हमले किए हैं और दावा किया है, कि हूतियों के सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है।
अमेरिकी वायु सेना ने एक बयान में कहा है, कि उसने "16 ईरानी समर्थित हूती उग्रवादी ठिकानों पर 60 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं, जिनमें कमांड और कंट्रोल नोड्स, युद्ध सामग्री डिपो, लॉन्चिंग सिस्टम, उत्पादन सुविधाएं और एयर डिफेंस रडार सिस्टम शामिल थे।"

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा, कि यूनाइटेड किंगडम के साथ संयुक्त हमले यह प्रदर्शित करने के लिए थे, कि अमेरिका और उसके सहयोगी लाल सागर में नौवहन पर हूतियों के हमलों को "बर्दाश्त नहीं करेंगे"। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन और नीदरलैंड ने अमेरिका और ब्रिटेन के इस हमले का समर्थन किया है।
हूती विद्रोहियों के खिलाफ अमेरिका ने उस वक्त हमले शुरू किए हैं, जब पिछले एक महीने में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में 21 से ज्यादा हमले जहाजों पर किए हैं, जिसकी वजह से मेर्स्क जैसी प्रमुख कंपनियों को लाल सागर में नौवहन निलंबित करना पड़ा है।
लेकिन, सवाल ये हैं, कि जो बाइडेन प्रशासन खालिस्तानी आतंकवादी पन्नून की हत्या की साजिश में भारतीय अधिकारी के होने का आरोप लगाकर, अमेरिका की संप्रभुता पर हमला बता रहा है, क्या वो अमेरिका, यमन में हमला कर, यमन की संप्रभुता पर हमला नहीं कर रहा है?
आइये जानते हैं, कि आखिर क्यों डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टी के सांसद, जो बाइडेन पर अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद 1 का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए इस कदम की कड़ी आलोचना की है।
तो आखिर अमेरिकी संविधान का अनुच्छेद 1 क्या कहता है और क्या इसे तोड़ा गया है? आइये समझते हैं...

अमेरिकी संविधान का अनुच्छेद 1 क्या है?
अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद 1 के मुताबिक, युद्ध शुरू करने से पहले किसी भी राष्ट्रपति को अमेरिकी संसद से इजाजत लेने की जरूरत होती है। यमन पर इस सप्ताह के हमलों की अगुवाई में, बाइडेन प्रशासन ने कांग्रेस को हमलों के बारे में सूचित किया था, लेकिन प्राधिकरण की मांग नहीं की। इस अनुच्छेद को लंबे समय से राष्ट्रपति की युद्ध छेड़ने की शक्ति की जांच और विनियमन के लिए एक तंत्र के रूप में समझा जाता है।
अमेरिकी संविधान के आर्टिकिल-1 का सेक्शन 8 अमेरिकी कांग्रेस को किसी देश के खिलाफ युद्ध की घोषणा करने का अधिकार देता है। इसमें कहा गया है, कि "कांग्रेस के पास ... युद्ध की घोषणा करने की शक्ति होगी।"
इस आर्टिकिल के सेक्शन-10 में साफ शब्दों में कहा गया है, कि किसी देश में सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी लेना जरूरी है।
अमेरिकी सांसदों का क्या कहना है?
डेमोक्रेटिक पार्टी की कांग्रेस सदस्य प्रमिला जयपाल ने शुक्रवार को एक एक्स पोस्ट में अमेरिकी स्ट्राइक्स को "संविधान का अस्वीकार्य उल्लंघन" कहा है।
जयपाल के बयान को डेमोक्रेट कांग्रेस सदस्य कोरी बुश ने दोहराया, जिन्होंने लिखा: "लोग नहीं चाहते कि हमारे करदाताओं का अधिक पैसा अंतहीन युद्ध और नागरिकों की हत्या में जाए। बमबारी बंद करो और हमसे इजाजत लेकर आगे का किया जाए।"
इनके अलावा, अन्य अमेरिकी सांसदों रशीदा तलीब, मार्क पोकन और रो खन्ना ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सैन्य कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे अनुच्छेद 1 का उल्लंघन बताया है।
हालांकि, सिर्फ डेमोक्रेटिक ही नहीं, बल्कि रिपब्लिकन सांसदों ने भी यमन पर अमेरिकी हमलों की निंदा की है। रिपब्लिकन सांसद माइक ली ने रो खन्ना के बयान से सहमति जताते हुए एक्स पर उनके पोस्ट को शेयर किया है। और लिखा है, कि "पार्टी की परवाह किए बिना संविधान मायने रखता है।"
वहीं, टेक्सास से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद चिप रॉय ने लिखा है, कि "महत्वपूर्ण शिपिंग चैनल की रक्षा और आक्रामकता की प्रतिक्रिया के लिए यमन पर हमला करने से मुझे संभावित रूप से कोई दिक्कत नहीं है" लेकिन उन्होंने कांग्रेस की मंजूरी की कमी पर सवाल उठाते हुए पूछा, कि "यह किस अधिकार के तहत किया गया है?"
यमन युद्ध का समर्थन करने वालों का क्या कहना है?
ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, कनाडा, डेनमार्क, जर्मनी, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, कोरिया गणराज्य, ब्रिटेन और अमेरिका की सरकारों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में हमलों को उचित ठहराया गया है, जिसमें कहा गया है, कि ये "अंतर्निहित अधिकार के अनुसार" किए गए थे और व्यक्तिगत और सामूहिक आत्मरक्षा, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप हैं।"
युद्ध शक्ति अधिनियम क्या है?
युद्ध शक्ति प्रस्ताव, जिसे आमतौर पर युद्ध शक्ति अधिनियम के रूप में जाना जाता है, वो नवंबर 1973 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित किया गया था।
अधिनियम के तहत राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई के 48 घंटों के भीतर कांग्रेस को सूचित करने की आवश्यकता होती है और यदि कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर युद्ध की घोषणा नहीं की है, या सैन्य कार्रवाई को अधिकृत नहीं किया है, तो इसके शुरू होने के 60 दिनों के भीतर सैन्य कार्रवाई को समाप्त करने की आवश्यकता है।












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