जानिए 2002 से लेकर अब तक पाकिस्तान में कितना पैसा बहा चुका है अमेरिका
वॉशिंगटन। आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए अमेरिका पिछले 15 सालों से पाकिस्तान की सैन्य मदद कर रहा है। हालांकि, अमेरिकी ने इस बार कड़ा रुख अख्तियार करते हुए पाकिस्तान को इस साल दी जाने वाले 255 मिलियन डॉलर की सैन्य मदद पर रोक लगा दी है। 9/11 हमले के बाद ऐसा पहली बार होगा, जब अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए पाकिस्तान को आर्थिक मदद नहीं देगा। ट्रंप ने सोमवार को ना सिर्फ पाकिस्तान की सैन्य मदद रोकने की बात कही है, बल्कि पाक हुक्मरानों को लताड़ भी लगाई है। ट्रंप ने कहा कि हम पागलों की तरह पाकिस्तान की मदद करते रहे और बदले में वे हमें सिर्फ धोखा औ झूठ देते रहे। आपको बताते हैं कि पिछले 15 सालों में अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए कितने डॉलर की आर्थिक मदद पाकिस्तान को दे चुका है।

1951 से लेकर 2011 तक 67 बिलियन डॉलर खर्च
अमेरिका के एक रिसर्च थिंक टैंक सेंटर फॉर ग्लोबल डवलवमेंट (CGD) के रिपोर्ट की मानें तो 1951 से लेकर 2011 तक अलग-अलग मदों में अमेरिका ने पाकिस्तान को 67 बिलियन यूएस डॉलर की मदद दी है। बराक ओबामा के शासनकाल में 2009 में पाकिस्तान की मदद के लिए कैरी लुगर विधेयक (एनहेन्स्ड पार्टनरशिप विद पाकिस्तान एक्ट ऑफ 2009) पास किया गया।

ओबामा ने सैन्य आर्थिक मदद में की थी वृद्धि
वर्ल्ड ट्रेड टॉवर पर हुए आतंकी हमले बाद अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ जंग लड़नी शुरू की। अफगानिस्तान में अपने सेना को भेजा और पाकिस्तान की मदद से इस नासूर से निजात पाने के लिए अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को तेज की। 2002 से ही अमेरिका ने पाकिस्तान सेना को बिलियन डॉलर आर्थिक मदद देनी शुरू कर दी थी। 2008 में बराक ओबामा के सत्ता में आने के बाद उनके शुरुआती कार्यकाल में अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली राशि को और बढ़ा दिया, हालांकि 2010 के बाद सैन्य आर्थिक मदद मे लगातार कमी देखने को मिली है। अमेरिका ने 2008 में 2.1 बिलियन डॉलर, 2009 में 3.1, 2019 में 3.1, 2010 में 4.5, 2011 में 3.6, 2012 में 2.6, 2013 में 2.3 और साल 2014 में 1.2 बिलियन डॉलर की आर्थिक मदद दी गई।

आतंकवाद के खिलाफ फाइनल लड़ाई में यूएस ने पाक पर डाला दबाव
हालांकि, ट्रंप के आने के बाद हालात बदल रहे हैं और अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य आर्थिक मदद पर रोक लगा दी है। अफगानिस्तान में तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ अमेरिका पिछले 15 सालों से जंग लड़ रहा हैं, उन्होंने अपने खरबों डॉलर खर्च किया है और सैकड़ों जवानों को भी खोया है। अमेरिका इस बार आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को फाइनल मान रहा है और लगातार पाकिस्तान पर दबाव डाल रहा है कि वे अपने देश में पल रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। इससे पहले अमेरिका यह भी स्पष्ट कर चुका है कि अगर पाक आतंक के खिलाफ लड़ने में नाकामयाब हुआ तो वे अकेले ही लड़ लेंगे।












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