'भारत का अभिन्न हिस्सा है अरूणाचल प्रदेश', अमेरिकी सीनेट में पेश किया गया दुर्लभ प्रस्ताव, जानें क्या है?
भारत और चीन के बीच पिछले कुछ सालों में तनाव काफी बढ़ चुका है और अमेरिकी सीनेट में पेश किया गया ये प्रस्ताव दुर्लभ इसलिए है, क्योंकि पहली बार अमेरिका ने सीधे तौर पर भारत का स्टैंड लिया है।

US Senate Arunachal Pradesh: एलएसी पर भारत और चीन के बीच चल रहे तनाव के बीच अमेरिकी सीनेट में चीन की निंदा करते हुए भारत के समर्थन में बेहद दुर्लभ प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसमें ना सिर्फ अरूणाचल प्रदेश से सटे सरहदी क्षेत्र में चीन की आक्रामकता की निंदा की गई है, बल्कि प्रस्ताव में अरूणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया गया है। अमेरिकी सीनेट में पेश किया गया ये प्रस्ताव काफी अहम है और अमेरिका-भारत के बीच के बढ़ते रणनीतिक संबंध को दर्शाता है।

सीनेट में अरूणाचल पर अहम प्रस्ताव
चीन को लेकर ऐसा पहली बार है, जब अमेरिका से भारत को इस तरह का सीधा समर्थन मिला है, नहीं तो इससे पहले अमेरिका की तरफ से भारत और चीन तनाव पर गोलमोल बयान जारी किया जाता था और इसमें अमेरिका की बचकर निकलने की कोशिश होती थी। लेकिन, इस बार अमेरिकी सीनेट में दोनों पार्टियों के तीन सीनेटर्स ने इस प्रस्ताव को पेश किया है, लिहाजा ये प्रस्ताव द्विदलीय प्रस्ताव बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, तीन शक्तिशाली सीनेटरों ने संयुक्त राज्य अमेरिका सीनेट में गुरुवार को एक प्रस्ताव पेश किया है, जो पुष्टि करता है, कि अरुणाचल प्रदेश राज्य "भारत का अभिन्न अंग" के रूप में, भारत की "संप्रभुता और क्षेत्रीयता" और अखंडता का समर्थन करता है"। इस प्रस्ताव में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) और चीन के अन्य उकसावों और यथास्थिति को बदलने के लिए "सैन्य बल के उपयोग" की निंदा की गई है। सीनेट में पेश किए गये प्रस्ताव में भारत के चीन के खिलाफ "खुद का बचाव" करने के लिए उठाए गए कदमों के लिए भारत सरकार की सराहना की गई है।

सीनेट में पेश प्रस्ताव क्या कहता है?
अमेरिकी सीनेट में ये प्रस्ताल सीनेटर जेफ मार्कले, बिल हैगर्टी और जॉन कॉर्निन ने संयुक्त तौर पर पेश किया है, जिसमें भारत के रक्षा आधुनिकीकरण और विविधीकरण का समर्थन किया गया है और ये प्रस्ताव अरुणाचल में भारत के विकास प्रयासों की सराहना करता है, जिसमें सीमा के बुनियादी ढांचे में सुधार शामिल है। ये प्रस्ताव कहता है, कि अरूणाचल क्षेत्र में अमेरिक सहायता को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और ये प्रस्ताव समान विचारधारा वाले भागीदारों को प्रोत्साहित करता है, जिसमें अरूणाचल के लिए सहायता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही सीनेट में पेश प्रस्ताव में क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (आईसीईटी) पर हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुए समझौते पर समर्थन जताया गया है।
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प्रस्ताव का राजनीतिक महत्व क्या है?
इस प्रस्ताव को तीन सीनेटर्स ने संयुक्त तौर पर सीनेट में पेश किया है, लिहाजा ये काफी शक्तिशाली प्रस्ताव हो जाता है, जिसका काफी महत्व होगा। इस प्रस्ताव को बनाने वाले एक सीनेटर मार्कले ओरेगॉन एक प्रगतिशील डेमोक्रेटिक सीनेटर हैं, जो चीन पर कांग्रेस के कार्यकारी आयोग के सह-अध्यक्ष के रूप में भी काम करते हैं। वहीं, दूसरे सीनेटर बिल हैगर्टी, जापान में अमेरिका के पूर्व राजदूत हैं। ये दोनों, अमेरिकी सीनेट फॉरेन रिलेशन कमेटी (एसएफआरसी) के सदस्य हैं, और कोर्निन सीनेट इंडिया कॉकस के सह-संस्थापक और सह-अध्यक्ष हैं, जो पूर्व सीनेट बहुमत सचेतक हैं, और इंटेलिजेंस पर सीनेट चयन समिति के वर्तमान सदस्य हैं। लिहाजा, ये दोनों सीनेटर, अमेरिकी सीनेट में काफी प्रभाव रखते हैं।

प्रस्ताव का संकल्प क्या है?
सीनेट में जिस प्रस्ताव को पेश किया गया है, उसमें संकल्प की शुरूआत, "अरुणाचल प्रदेश राज्य को भारतीय क्षेत्र के रूप में पुन: पुष्टि करना और दक्षिण एशिया में चीन के उकसावे की निंदा करना" है। इसे एसएफआरसी को भेजा गया है और अगर कमेटी के अध्यक्ष बॉब मेनेंडेज इस कमेटी में शामिल कर लेते हैं, तो फिर ये प्रस्ताव एक कानून के शक्ल में फ्लोर पर जा सकता है। लेकिन संकल्प की प्रस्तावना, अपने आप में कई कारणों से एक शक्तिशाली प्रतीकात्मक संदेश है। सबसे बड़ी बात ये है, कि अमेरिकी सरकार आधिकारिक तौर पर अरुणाचल को भारत के एक हिस्से के रूप में मान्यता देती है, जिससे चीन के प्रोपेगेंडा को झटका लगता है। वहीं, ये प्रस्ताव, अमेरिकी कांग्रेस में 2020 में गालवान के बाद चीन की घुसपैठ और आक्रामकता की निंदा करने वाला भी प्रस्ताव है और यह पहली बार है, कि अमेरिका में इस प्रकृति का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया है। और सबसे महत्वपूर्ण बात ये है, कि यह प्रस्ताव, प्रकृति में द्विदलीय है, और इसे डेमोक्रेटिक स्पेक्ट्रम के प्रगतिशील और रिपब्लिकन स्पेक्ट्रम के रूढ़िवादी सीनेटर, दोनों का समर्थन प्राप्त है।

'अरूणाचल को विवादित नहीं मानता है अमेरिका'
अमेरिकी सीनेट में पेश किए गये इस प्रस्ताव की शुरूआत में ही कहा गया है, कि 1962 के चीन-भारत युद्ध के बाद से, अमेरिका ने मैकमोहन रेखा को चीन और "भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश" के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता दी है और अमेरिका, अरुणाचल को "विवादित नहीं" बल्कि भारत का अंग मानता है। प्रस्ताव में साफ शब्दों में लिखा गया है, कि अरूणाचल प्रदेश को अमेरिका "भारतीय गणराज्य के अभिन्न अंग" के रूप में मानने के अलावा किसी भी अन्य मान्यता के तौर पर स्वीकार नहीं करता है।

चीन के आक्रामक रवैये का जिक्र
प्रस्ताव में कहा गया है, कि चीन अरुणाचल को अपने क्षेत्र के रूप में दावा करता है, इसे "दक्षिण तिब्बत" कहता है और इन दावों को "अपनी तेजी से आक्रामक और विस्तारवादी नीतियों" के हिस्से के रूप में लागू करने की कोशिश करता है। इसके अलावा चीन ने दिसंबर 2021 में पेश किए गये नये नक्शे में अरूणाचल को तिब्बत का हिस्सा दिखाया, जिसमें अरूणाचल प्रदेश के 15 भौगोलिक क्षेत्रों को मंदिरिन भाषा में नामकरण किए हैं, जिसमें आठ आवासीय बस्तियां, चार पर्वत चोटियां, दो नदियां और एक पहाड़ी दर्रा शामिल हैं। वहीं, पूर्वी क्षेत्र में हाल की झड़पों का उल्लेख करते हुए, प्रस्ताव का संकल्प बताता है, कि कैसे दिसंबर 2022 में, चीनी और भारतीय सैनिकों की अरूणाचल प्रदेश से सटे एलएसी क्षेत्र में झड़प की गई थी।
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