जंग हुई तो यूक्रेन के साथ खड़ा रहेगा अमेरिका, यूएस सीनेट ने पास किया प्रस्ताव, विश्व युद्ध का खतरा?
रूसी समाचार एजेंसी स्पुतनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सीनेट के इस प्रस्ताव में रूसी संघ के खिलाफ युद्ध छेड़ने या फिर सैन्य ताकत इस्तेमाल करने की बात नहीं की गई है।
वॉशिंगटन/मॉस्को, फरवरी 18: यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध जैसे बने हालात के बीच अमेरिका मे रूस के खिलाफ यूक्रेन का पूरा साथ देने का प्रस्ताव पास किया है। अमेरिकी सीनेट ने गुरुवार रात सर्वसम्मति से रूस के संभावित आक्रमण के खिलाफ स्वतंत्र और लोकतांत्रिक यूक्रेन के समर्थन में एक द्विदलीय प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव के पास होने का मतलब ये हुआ, कि अगर रूस यूक्रेन पर हमला करता है, तो फिर यूक्रेन की मदद के लिए अमेरिका खड़ा होगा। यानि, यूक्रेन संकट काफी खतरनाक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है।

अमेरिका में पास हुआ प्रस्ताव
रूसी समाचार एजेंसी स्पुतनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सीनेट में यूक्रेन की मदद के लिए प्रस्ताव वास किया गया है और प्रस्ताव में कहा गया है कि, ''यूक्रेन की मदद के लिए, उसकी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए, यूक्रेन को घातक हथियार मुहैया कराने के साथ साथ उसकी राजनीतिक, राजनयिक और सैन्य सहायता की जाएगी''। प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि, ''क्षेत्रीय अखंडता बहाल करने के लिए यूक्रेन की सरकार के निरंतर प्रयासों का समर्थन करने के लिए संयुक्त राज्य अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है"। प्रस्ताव में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से यूरोप में शांति बहाल करने के लिए यूक्रेन पर आक्रमण के मामले में रूस पर महत्वपूर्ण प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया गया है।

क्या अमेरिका भेजेगा अपनी सेना?
रूसी समाचार एजेंसी स्पुतनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सीनेट के इस प्रस्ताव में रूसी संघ के खिलाफ युद्ध छेड़ने या फिर सैन्य ताकत इस्तेमाल करने की बात नहीं की गई है। इसके साथ ही अमेरिकी सीनेट के इस प्रस्ताव में इस बात का भी जिक्र नहीं किया गया है, कि युद्ध होने पर क्या अमेरिका अपनी सेना को यूक्रेन की मदद के लिए यूक्रेन में भेजेगा? प्रस्ताव के मुताबिक, अमेरीकी सीनेट ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि, शांति बहाल करने के लिए इस तरह के कदम उठाए जाने की जरूरत है। वहीं, यूएस सीनेट के इस प्रस्ताव को लेकर रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेनकोव ने कहा कि, रूस शुरू से ही यूक्रेन पर हमला करने की बात से इनकार करता रहा है, लेकिन रूस की सीमा पर नाटो सेना की मौजूजगी रूस के लिए खतरे की बात है। दूसरी तरफ अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा है कि, अगले हफ्ते अमेरिका और रूस की अहम बैठक होने वाली है।

रूस-यूक्रेन संघर्ष की मूल वजह क्या है?
यूक्रेन रूस का एक पड़ोसी देश है, जिसका क्षेत्रफल 603,628 वर्ग किलोमीटर है, जो रूस और यूरोप के बीच स्थित है। यह 1991 तक सोवियत संघ का ही हिस्सा था, लेकिन सोवियत संघ के पतन के बाद यूक्रेन एक अलग देश बन गया, जिसका अर्थव्यवस्था तुललात्मक तौर पर सुस्त रही है और यूक्रेन की विदेश नीति कहने के लिए पूरी तरह से लोकतांत्रिक और संप्रभु रहा है, लेकिन अमेरिका और नाटो देश का प्रभाव दिखाई देता रहा है और यूक्रेन के साथ रूस के विवाद की सबसे बड़ी वजह यही रही है कि, आखिर यूरोपीय देश यूक्रेन के इतने करीबी क्यों हैं? नवंबर 2013 में यूक्रेन की राजधानी कीव में यूरोपीय संघ के साथ अधिक से अधिक आर्थिक एकीकरण की योजना को रद्द करने के यूक्रेनी राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे।

नाटो को लेकर पुतिन की नाराजगी क्यों?
सोवियत संघ का मुकाबला करने के लिए ही साल 1949 में नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन यानि नाटो की स्थापना की गई थी और उसके बाद नाटो गठबंधन में लिथुआनिया, एस्टोनिया और लातविया सहित 30 राष्ट्र शामिल हो गए हैं, जो सभी कभी सोवियत गणराज्य थे। संधि के अनुसार, अगर नाटो के सदस्यों में से किसी एक पर तीसरे पक्ष द्वारा हमला किया जाता है, तो पूरा गठबंधन उसकी रक्षा के लिए जुट जाएगा। क्रेमलिन चाहता है कि नाटो यह सुनिश्चित करे, कि यूक्रेन और जॉर्जिया (एक और पूर्व सोवियत गणराज्य) जिस पर रूस ने 2008 में आक्रमण किया था, नाटो गठबंधन में शामिल नहीं होंगे। बाडेन प्रशासन और नाटो भागीदारों का कहना है कि, यूक्रेन को नाटो में शामिल होने के फैसले को पुतिन रोक नहीं सकते हैं, लेकिन उनका ये भी कहना है कि, फिलहाल यूक्रेन को नाटो में शामिल करने का कोई इरादा नहीं है।
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