एरिक गार्सेटी होंगे भारत में अमेरिका के राजदूत! सीनेट कमेटी ने लगाई मुहर, 2 साल से खाली पड़ा है पद
एरिक गार्सेटी को जुलाई 2021 में आधिकारिक रूप से बाइडेन प्रशासन ने भारत में राजदूत बनाने के लिए नामांकित किया गया था, लेकिन सीनेट में उनके नाम पर सहमति नहीं बन पाई।

Eric Garcetti India Envoy: लॉस एंजिल्स के पूर्व मेयर एरिक गार्सेटी भारत में अमेरिका के नये राजदूत हो सकते हैं और सीनेट कमेटी ने उनके नाम पर आखिरकार मुहर लगा दी है। जिसके बाद अब पूरी संभावना है, कि 2 सालों से भारत में खाली राजदूत का पद आखिरकार अब खाली नहीं रहेगा। ये काफी आश्चर्यजनक था, कि जब भारत और अमेरिका काफी तेजी से द्विपक्षीय संबंधों में बंधते जा रहे हैं, उस वक्त भारत में पिछले दो सालों से अमेरिका का कोई राजदूत ही नहीं था।

एरिक गार्सेटी होंगे नये राजदूत
भारत में दो सालों से अमेरिकी राजदूत का नहीं होना, एक रिकॉर्ड है। जो बाइडेन ने जब से अमेरिका के राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभाली थी, उसके बाद से ही भारत में अमेरिका में राजदूत का पद खाली था। ऐसा नहीं है, बाइडेन ने भारत में राजदूत को भेजने की कोशिश नहीं की, उन्होंने एरिक गार्सेटी के नाम को पहले भी बढ़ाया था, लेकिन सीनेट ने उनके नाम को अस्वीकार कर दिया था। लेकिन, बाइडेन एरिक गार्सेटी के नाम पर अड़े रहे और भारत में अमेरिकी राजदूत को भेजे जाने का मामला टलता रहा। गार्सेटी को 2021 में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने सबसे पहले नामित किया था, और उस वक्त वो अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े शहर लॉस एंजिल्स के मेयर थे। उस वक्त एरिक गार्सेटी पर आरोप लगे थे, कि उन्होंने अपने एक ऐसे सहयोगी की मदद की थी, जिसके ऊपर यौन शोषण के आरोप थे। लिहाजा, सीनेट ने एरिक गार्सेटी के नामांकन को खारिज कर दिया था।

क्या सीनेट का बाधा कर पाएंगे पार?
सीनेट की विदेश संबंध समिति ने बुधवार को भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में एरिक गार्सेटी के नामांकन को आगे बढ़ाने के लिए 13-8 वोट किया है। सीनेट कमेटी से नाम पर मुहर लगने के बाद अब उनका नामांकन पूर्ण वोट के लिए सीनेट फ्लोर पर जाएगा। कुछ सांसदों की चिंताओं के बावजूद, माना जा रहा है, कि एरिक गार्सेटी के नाम पर सीनेट सहमत हो सकता है, क्योंकि रिपब्लिकन पार्टी के दो सीनेटर टॉड यंग और बिल हेगर्टी, जो सीनेट कमेटी में भी थे, उन्होंने एरिक गार्सेटी के पक्ष में वोट डाला था और उम्मीद है, कि सीनेट में भी वो एरिक गार्सेटी का साथ देंगे और एरिक सीनेट के बाधा को पार कर जाएंगे। वहीं, व्हाइट हाउस ने गार्सेटी में पूर्ण विश्वास जताया है और उम्मीद जताई है, कि सीनेट में गार्सेटी के पक्ष में वोट डाले जाएंगे।

दो सालों से भारत में राजदूत नहीं
एरिक गार्सेटी को लेकर बाइडेन प्रशासन की जिद कैसी है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, कि उनके 4 साल के कार्यकाल में से 2 साल खत्म हो चुके हैं, लेकिन अभी तक वो भारत में राजदूत नियुक्त नहीं कर पाए हैं। पूर्व भारतीय विदेश सचिव कंवल सिब्बल का कहना है, कि "नामांकन में जिस तरह की देरी पहले ही हो चुकी है, उससे यही लगता है कि, इस मामले ने अपनी प्राथमिकता की डिग्री खो दी है। इसमें जितना ज्यादा देरी होगा, नियुक्तिकर्ता के पास दिल्ली में उतना ही कम समय होगा"। सिब्बल ने पिछले दिनों दिप्रिंट को बताया था, कि "नियुक्तियों को अपने पैर जमाने में छह महीने का समय लगता है और तब तक नये राष्ट्रपति के चुनाव का वक्त आ जाएगा, लिहाजा जो नया एंबेसडर आएगा, क्या वो अपने पद के साथ इंसाफ कर पाएगा?"
Recommended Video


भारत-अमेरिका संबंधों में तेजी
अमेरिका और भारत के बीच के संबंध काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और दोनों देशों के बीच लगातार रणनीतिक और रक्षा समझौते हो रहे हैं। इस साल अमेरिका ने प्रधानमंत्री मोदी को देश का विशेष अतिथि भी बनाया है और मई या जून के महीने में पीएम मोदी स्टेट गेस्ट बनकर अमेरिका का दौरा करने वाले हैं। वहीं, राष्ट्रपति बाइडेन ने अपनी हिंद-प्रशांत रणनीति में क्वाड को प्राथमिकता दी है। इसने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ जापान और ऑस्ट्रेलिया के समकक्षों के साथ बहुपक्षीय जुड़ाव के साथ कई आभासी और व्यक्तिगत बैठकें की हैं। अपनी पुष्टि की सुनवाई के दौरान, गार्सेटी ने अपनी सीमाओं, संप्रभुता की रक्षा करने और आक्रामकता को रोकने के लिए भारत की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने का वादा किया। इसे भारत के लिए एक सकारात्मक विकास के रूप में देखा जा रहा है।












Click it and Unblock the Notifications