चीन का फैसला करने दिल्ली आएगी US की सबसे शक्तिशाली कमेटी, अमेरिका-भारत के बड़े प्लान को समझिए
चक शूमर के साथ डेमोक्रेटिक पार्टी के आठ शीर्ष सीनेटर इस कमेटी में शामिल होंगे, जो भारतीय लोकतंत्र को चीन की तानाशाही कम्युनिस्ट व्यवस्था के खिलाफ सबसे बड़ा मददगार मानते हैं।

US Senate delegation in India: चीन का हिसाब-किताब करने के लिए बाइडेन प्रशासन और मोदी सरकार ने कमर कस ली है और अगले हफ्ते दिल्ली में बहुत बड़ी बैठक होने जा रही है। इस बैठक की सबसे बड़ी बात ये है, कि यूएस का जो प्रतिनिधिमंडल भारत का दौरा करेगा, वो अमेरिका में फैसले लेने वाली सबसे पॉवरफुल कमेटी है, जिसका नेतृत्व सीनेट के बहुमत वाले नेता चक शूमर करेंगे।

भारत आएगा अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की सबसे पॉवरफुल सीनेट कमेटी अगले हफ्ते भारत का दौरा करेगी, जिसका नेतृत्व सीनेट के बहुमत वाले नेता चक शूमर करेंगे, जिसमें चीन के खिलाफ सख्त फैसले किए जाने की पूरी उम्मीद है। भारत आने से पहले ही चक शूमर कह चुके हैं, कि चीन पर नकेल कसना है, तो भारत का साथ हर हाल में चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दौरे के दौरान अमेरिकी सीनेट का प्रतिनिधिमंडल चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के उदय के सामने "लोकतांत्रिक अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था" को कैसे खड़ा किया जाए, इसपर बड़ा फैसला होगा।

कैसा होगा प्रतिनिधिमंडल का चेहरा?
रिपोर्ट के मुताबिक, चक शूमर के साथ डेमोक्रेटिक पार्टी के आठ शीर्ष सीनेटर इस कमेटी में शामिल होंगे, जिनमें से कई सीनेटर, अलग अलग समितियों के अध्यक्ष के रूप में काम करते हैं और अमेरिका के विधायी एजेंडे और विदेश नीति की प्राथमिकताओं को तय करने के सा साथ उसकी फंडिंग को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अमेरिका का ये प्रतिनिधिमंडल जर्मनी से भारत की यात्रा करेगा, जहां वे वर्तमान में म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। शुक्रवार को द वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित एक नोट में, म्यूनिख में दी जाने वाली चक शूमर टिप्पणी प्रकाशित की गई है, जिसमें उन्होंने कहा है, कि "यूएस-यूरोप ट्रान्साटलांटिक साझेदारी को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना (CCP) का सामना करना चाहिए, जो "पृथ्वी पर सबसे शक्तिशाली निरंकुश बल" है। उन्होंने कहा कि, "सीसीपी के उदय का सामना करने के लिए "लोकतांत्रिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था" को मजबूती से खड़ा होना चाहिए"।

'भारत का चाहिए साथ'
चक शूमर ने कहा है, कि "चीन को रोकने का यह काम अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप का नहीं है, बल्कि हमें भारत जैसे देशों की जरूरत है, जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है"। उन्होंने कहा, कि "चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के उदय को रोकने के लिए हमें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के साथ साथ एशिया के अन्य लोकतांत्रिक देशों के साथ की भी जरूरत है। इस हफ्ते, मैं आठ अन्य सीनेटरों के साथ भारत की यात्रा करूंगा और अपने दोस्तों को भी यही संदेश दूंगा, क्योंकि हम इस उभरते खतरे का सामना करना चाहते हैं"।

दिल्ली में डेलिगेशन का कार्यक्रम क्या होगा?
कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के भारत के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व से मिलने की उम्मीद है। वहीं, भारत के साथ होने वाली बैठक के दौरान, चीन की चुनौती से अलग हटकर, यूक्रेन पर रूसी आक्रमण को लेकर भी बातचीत होने की उम्मीद है। जबकि अमेरिकी प्रशासन, रूस पर भारतीय स्थिति को समझता रहा है, लेकिन दिल्ली के रुख को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में चिंता भी रही है। लिहाजा, इस बैठक के दौरान उम्मीद इस बात को लेकर है, कि रूस को लेकर भारत और अमेरिका के बीच जो गलतफहमियां हैं, उसे दूर किया जाएगा, क्योंकि आशंका इस बात की जताई गई है, कि रूस नये सिरे से यूक्रेन के ऊपर भीषण आक्रमण की प्लानिंग कर रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधिमडल भारत के साथ रक्षा और आर्थिक और प्रौद्योगिकी साझेदारी को लेकर भारत-अमेरिका द्विपक्षीय साझेदारी पर भी ध्यान केंद्रित करेगा। इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच अलग अलग मुद्दों पर तालमेल बढ़ाने, और सप्लाई-चेन में लचीलापन बढ़ाने और विविधीकरण के मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है।
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बैठक में फोकस में रहेगा चीन
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बात की भी संभावना है कि अमेरिका भारतीय लोकतंत्र के अंदर आने वाली कुछ चुनौतियों का भारत सरकार के सामने उठा सकता है, जिसकी चर्चा पिछले कुछ समय से अमेरिका की शक्तिशाली सिविल सोसाइटी करता रहा है। हालांकि, डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर सहित डेमोक्रेटिक पार्टी के अन्य नेता , भारत को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में पहचानते हैं, और चीन की निरंकुशता के साथ प्रतिस्पर्धा करने में भारतीय लोकतंत्र को काफी अहम मानते हैं, लिहाजा यह संभव है, कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वर्तमान समय में भारत को लेकर अपनी राजनीति के विकास को समझने की कोशिश कर सकता है।

अमेरिकी राजदूत पर भी फैसला
इसके अलावा भारत में अमेरिकी राजदूत के नॉमिनेशन की पुष्टि करने में भी सीनेट नेतृत्व की अहम भूमिका हो सकती है और माना जा रहा है, कि भारत में अमेरिका के नये राजदूत को लेकर भी सीनेट जल्द फैसला ले सकता है। बाइडेन प्रशासन के आने के बाद से अभी तक अमेरिका का राजदूत भारत में नहीं है, क्योंकि बाइडेन लॉस एंजिल्स के पूर्व मेयर एरिक गार्सेटी को भारत में राजदूत बनाकर भेजना चाहते हैं, लेकिन अमेरिकी सीनेट में उनके नाम पर सहमति नहीं बन रही है। लिहाजा, इस रस्साकसी में पिछले दो साल से अधिक समय से भारत में कोई अमेरिकी राजदूत नहीं है, और ये एक रिकॉर्ड है।












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