अरूणाचल भारत का ही हिस्सा है... अमेरिकी संसद में चीन के खिलाफ बड़ा प्रस्ताव पास, पीएम मोदी के दौरे का असर
US Congress Arunachal Pradesh: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पिछले महीने का अमेरिका का राजकीय दौरा रंग ला रहा है और अमेरिकी संसद में अरूणाचल प्रदेश को लेकर काफी अहम प्रस्ताव पास किया गया है।
संयुक्त राज्य कांग्रेस की सीनेटरियल कमेटी ने गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश को भारत के अभिन्न अंग के रूप में मान्यता देने वाला एक प्रस्ताव पारित किया है। यह प्रस्ताव ओरेगॉन के सीनेटर जेफ मर्कले, टेनेसी के सीनेटर बिल हैगर्टी और टेक्सास के सीनेटर जॉन कॉर्निन द्वारा पारित किया गया था और इस प्रस्ताव को सीनेटर टिम काइन (डी-वीए) और क्रिस वान होलेन (डी-एमडी) ने प्रायोजित किया था।

अमेरिकी कांग्रेस में अरूणाचल पर बड़ा प्रस्ताव
अमेरिकी कांग्रेस में पारित ये कानून इस बात की पुष्टि करता है, कि अमेरिका मैकमोहन रेखा को चीन और भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता देता है।
एक मीडिया बयान में कहा गया है, कि अमेरिका ने चीन के दावों को खारिज कर दिया है, कि अरुणाचल प्रदेश का बड़ा हिस्सा चीन का क्षेत्र है, जो पीआरसी की बढ़ती आक्रामक और विस्तारवादी नीतियों का एक हिस्सा है।
चीन पर कांग्रेस-कार्यकारी आयोग के सह-अध्यक्ष के रूप में काम करने वाले सीनेटर मर्कले ने कहा, कि "स्वतंत्रता और नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करने वाले अमेरिका के मूल्य, दुनिया भर में हमारे सभी कार्यों और संबंधों के केंद्र में होने चाहिए, खासकर जब पीआरसी सरकार एक वैकल्पिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रही है।"
उन्होंने कहा, कि "इस प्रस्ताव के पारित होने से समिति पुष्टि करती है, कि संयुक्त राज्य अमेरिका भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश को भारत गणराज्य के हिस्से के रूप में देखता है, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के तौर पर नहीं। और अमेरिका समान विचारधारा वाले लोगों के साथ इस क्षेत्र में समर्थन और सहायता को गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
इस बीच, सीनेटर हेगर्टी ने कहा, कि ऐसे समय में जब चीन स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए गंभीर खतरे पैदा कर रहा है, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए यह महत्वपूर्ण है, कि वह क्षेत्र में अपने रणनीतिक साझेदारों-विशेषकर भारत और के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहे।
आपको बता दें, कि पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका का राजकीय दौरा किया था, जिसमें भारत और अमेरिका ने सैन्य और रणनीतिक साझेदारी को काफी विकसित किया है और चीन की आक्रामकता के खिलाफ सामूहिक कदम उठाने का फैसला किया है। माना जा रहा है, कि पीएम मोदी के अमेरिकी दौरे का ही असर है, कि चीन के खिलाफ अमेरिकी संसद में इस बड़े प्रस्ताव को पास किया गया है।












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