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अमेरिकी सीनेट में भारत के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने को कहा, चीन बना US के लिए मजबूरी?

यूएस हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने पिछले हफ्ते एनडीएए में संशोधन कर दिया था, जिसमें एक प्वाइंट ये भी था, कि रूस से एस -400 मिसाइल प्रणाली की खरीद के लिए भारत के लिए प्रतिबंधों में छूट दी जाएगी।

वॉशिंगटन, जुलाई 21: पिछले हफ्ते अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने भारत पर प्रतिबंध नहीं लगाने वाले प्रस्ताव को भारी बहुमत से पास कर दिया था और अब अमेरिकी सीनेट की आर्म्ड सर्विस कमिटी ने भारत को लेकर काफी अहम निर्देश जारी किए हैं। अमेरिकी सीनेट की अहम कमेटी ने पेंटागन को निर्देश दिए हैं, कि वो भारत के साथ रणनीतिक और रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने और मजदूत करने पर ध्यान दे। अमेरिकी सीनेटा का ये निर्देश यूएस कैपिटल हिल की भारत को लेकर राजनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सीनेट की कमेटी ने क्या निर्देश दिए

सीनेट की कमेटी ने क्या निर्देश दिए

यूएस सीनेट की आर्म्ड सर्विस कमिटी ने पेंटागन को ये निर्देश उस वक्त दिए हैं, जब पिछले हफ्ते ही अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम (एनडीएए) के तौर पर एक विधायी संशोधन को पूर्ण बहुमत के साथ पास किया था, जिसके तहत भारत को CAATSA के तहत प्रतिबंधों से छूट देने की बात कही गई है। इससे पहले रूस से एस-400 मिसाइल खरीदने के लिए भारत अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में था, लेकिन अमेरिका ने अपने ही नियम में संशोधन कर दिया है। वहीं, अब इस कानून के पारित होने के 90 दिनों के भीतर "इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, रेडिनेस और लॉजिस्टिक्स" के मुद्दों पर भारत के साथ इसकी भागीदारी होगी।

भारत के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर

भारत के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर

अन्य मुद्दों के अलावा, एनडीएए के सीनेट की स्पेशल कमेटी ने भारत के साथ सहयोग के क्षेत्रों के रूप में खुफिया संग्रह क्षमताओं, मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी), 5जी टेक्नोलॉजी, चौथी और पांचवीं पीढ़ी के विमान, और संयुक्त अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) की पहचान की है। इसने रक्षा सचिव को 180 दिनों के भीतर सीनेट और प्रतिनिधि सभा में उपयुक्त समितियों को इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए भी कहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की सीनेट सशस्त्र सेवा समिति (एसएएससी), जिसने कानून का संचालन किया है, उसने साल 2023 में राष्ट्रीय रक्षा के लिए 847 अरब डॉलर का बजट प्रस्तावित किया है।

चीन की वजह से भारत 'खास'

चीन की वजह से भारत 'खास'

समिति के अध्यक्ष, डेमोक्रेट जैक रीड ने चीन के अमेरिका के सबसे "परिणामी रणनीतिक प्रतियोगी" के रूप में उभरने पर प्रकाश डाला और चीन को अमेरिका के सामने आने वाली सबसे बड़ी चुनौती माना। जबकि समिति के रैंकिंग सदस्य रिपब्लिकन जिम इनहोफे ने कहा कि,चीनी कम्युनिस्ट पार्टी "अपनी सेना के पहले से ही ऐतिहासिक आधुनिकीकरण में तेजी ला रही है"।

क्या होती है इसकी प्रक्रिया?

क्या होती है इसकी प्रक्रिया?

यूएस हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने पिछले हफ्ते एनडीएए में संशोधन कर दिया था, जिसमें एक प्वाइंट ये भी था, कि रूस से एस -400 मिसाइल प्रणाली की खरीद के लिए भारत के लिए प्रतिबंधों में छूट दी जाएगी। भारत और रूस के बीच ये एक ऐसा सौदा है, जो अमेरिका के प्रतिबंध अधिनियम के माध्यम से 'काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज' के तहत प्रतिबंधों के दायरे में आता है। वहीं, अमेरिकी संसद के पास इससे छूट देने का अधिकार है, और भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स के सामने संशोधन प्रस्ताव पेश किया था, जिसे 330-90 के बहुमत से पास कर दिया गया था और इस फैसले को बाइडेन प्रशासन के लिए एक राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

भारत को दी जाएगी मदद?

भारत को दी जाएगी मदद?

यूएस हाउस का ये संशोधन स्पष्ट रूप से ये बात करता है, कि भारत कई खतरों का सामना कर रहा है, जिसमें चीन का खतरा भी शामिल है, लिहाजा इस संशोधन में रूस से हथियार खरीदने को भारत की जरूरत बताया गया है। वहीं, ये संशोधन भारत के हथियार भंडार में विविधीकरण में आवश्यक मदद मुहैया कराने की बात करता है। लिहाजा, सीनेट का एनडीएए प्रस्ताव उन मुख्य नीतियों पर आधारित है, जो भविष्य में भारत और अमेरिका के बीच के सहयोग को और भी ज्यादा गहरा करता है और भारत को हथियार और इंटेलीजेंस मदद देने की बात करता है। वहीं, यह संशोधन, कार्यपालिका को पालन करने के लिए दिशा-निर्देश भी देता है।

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