39 साल पहले खालिस्तानियों ने उड़ाया था एयर इंडिया का विमान, 329 मरे, अब US ने इस पर क्या कहा?
अमेरिका के विदश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने खालिस्तानी समर्थकों की हिंसक करतूतों को भी आतंकवाद का हिस्सा बताया और कहा कि अमेरिका आतंकवाद के सभी स्वरूपों की कड़ी निंदा करता है।

Image: Oneindia
अमेरिका ने खालिस्तान को लेकर एक बार फिर से कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। खालिस्तान के बारे में पूछे जाने पर विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि अमेरिका ने आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की है। उन्होंने कहा कि अपने मकसद को पाने के लिए हिंसा का सहारा लेने वाले राजनीतिक हों या कोई और, हम उनको जगह नहीं दे सकते। नेड प्राइस ने कहा कि किसी भी हाल में हिंसा का सहारा लेने का कभी कोई औचित्य नहीं है। नेड प्राइस ने ये बातें तब कही जब उनसे उन खालिस्तानी एक्टिविस्टों के बारे में अपने विचार साझा करने के लिए कहा गया, जो उत्तरी अमेरिका में सक्रिय हैं और जो 1985 में एयर इंडिया पर बमबारी के लिए जिम्मेदार थे।
कनिष्क विमान हादसे से दहली दुनिया
अमेरिका में हुए एयर इंडिया या कनिष्क विमान हादसा इतिहास के बड़े विमान हादसों में एक माना जाता है। यह विमान 23 जून, 1985 को बम ब्लास्ट का शिकार हुआ था। इसमें प्लेन में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी। एअर इंडिया की फ्लाइट 182 ने 22 जून को कनाडा के मॉन्ट्रियल एयरपोर्ट से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। टोरंटो से इन लोगों को लेकर विमान यूरोप की सीमा में दाखिल होने के बाद आयरलैंड की ओर पहुंचा ही था कि उसमें धमाका हो गया जिससे हजारों फीट की ऊंचाई पर विमान में आग लग गई और जलता हुआ विमान अटलांटिक सागर में गिर गया।
डूबने से मरे कई लोग
विमान में सवार 22 क्रू मेंबर समेत सभी 307 यात्री मारे गए। इसमें 268 कनाडा, 27 इंग्लैंड, 10 अमेरिका और 2 भारत के नागरिक थे। कुछ पैसेंजरों के शव की जांच और मेडिकल चेकअप में पता चला था कि उनकी मौत ब्लास्ट के कारण नहीं, बल्कि समुद्र में डूबने से हुई। वे प्लेन में ऐसे हिस्से में बैठे थे, जहां वे ब्लास्ट से बच गए। एयर इंडिया के इस विमान का नाम प्राचीन भारत के महान सम्राट कनिष्क के नाम पर रखा गया था। इस हादसे को कनिष्क विमान हादसा के नाम से भी जाना जाता है। कनाडा और भारत की ओर से जांच में इस हादसे के लिए सिख आतंकी संगठन बब्बर खालसा को जिम्मेदार ठहराया गया।
ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला
ऐसा कहा जाता है कि कनाडा सरकार, इंटेलिजेंस और सिक्युरिटी एजेंसियां अगर अलर्ट को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करतीं, तो ये हादसा रोका जा सकता था। भारत ने कनाडा से कहा था कि ऑपरेशन ब्लूस्टार का बदला लेने के लिए सिख उग्रवादी एअर इंडिया की फ्लाइट को निशाना बना सकते हैं। जांच के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था में खामी के कारण आतंकी प्लेन में बम रखने में कामयाब रहे। जांच में पता चला कि जहाज में एम सिंह के नाम के एक यात्री को विमान में चढ़ना था, लेकिन वो नहीं चढ़ा। बस उसका सूटकेस जहाज तक पहुंचा दिया गया। उस संदिग्ध 'एम सिंह' का न आज तक कोई पता चला और न ही उसे पकड़ा जा सका।












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