कोल्ड वॉर के बाद पहली बार हाई अलर्ट पर अमेरिका के 'न्यूक्लियर बॉम्बर्स', 24 घंटे में तबाह कर देंगे रूस-नॉर्थ कोरिया
वॉशिंगटन। अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के बीच तनाव किस स्तर पर पहुंच गया है, इसका अंदाजा यूएस की इस नई रणनीति से लगाया जा सकता है। कोल्ड वॉर के बाद दुनिया में इतना तनाव पैदा कभी नहीं हुआ, जितना कि इस बार कोरियाई प्रायद्वीप में हो रहा है। इस बीच यूएस स्टाफ चीफ ने कहा है उनके एयर फोर्स ने 24 घंटे के अलर्ट पर B-52 'न्यूक्लियर बॉम्बर्स' को तैनात करने का ऐलान किया है। कोल्ड वॉर के बाद ऐसा पहली बार है, जब अमेरिका को न्यूक्लियर क्षमता वाले बॉम्बर्स तैनात करने पड़ रहे हैं।

कोल्ड वॉर के बाद पहली बार US ने निकाले न्यूक्लियर बॉम्बर्स
नॉर्थ कोरिया और अमेरिका की जुबानी जंग के बीच फिर से रूसी हस्तक्षेप ने कोरियाई प्रायद्वीप के हालातों को युद्ध की तरफ धकेल दिया है। अमेरिकी एयर फोर्स चीफ डैविड ली गोल्डफेइन ने कहा है कि 26 साल बाद एक बार न्यूक्लियर क्षमता वाले बॉन्बर्स को तैनाती की तैयारी जा रही है। अमेरिकी के इस कदम ने नॉर्थ कोरिया को भड़काने का किया है।

लुसियाना हुआ वॉर एरिया तब्दील
अमेरिका के नॉर्थवेस्ट लुसियाना में एयरफोर्स आर्मी बेस को पूरी तरह से वॉर एरिया तब्दील कर दिया है। ग्लोबल टेंशन को देखते हुए लुसियाना के बर्क्सडाले एयर फोर्स बेस पर कई खतरान हथियार के साथ B-52 न्यूक्लियर बॉम्बर्स तैनात करने के आदेश दिए गए है। इस क्षेत्र में न्यूक्लियर वेपंस 1991 में कोल्ड वॉर के खत्म होने के बाद फिर कभी तैनात नहीं किया गया था।

ट्रंप की मीटिंग के बाद उठाया यह कदम
कोरिया प्रायद्वीप में जारी जुबानी जंग के बीच अमेरिकी आर्मी के इस नये दांव ने सभी को हैरान कर दिया है। अमेरिकी एयर फोर्स ने 6 अक्टूबर को डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने के बाद यह कदम उठाया है। हालांकि, अमेरिकी एयर फोर्स चीफ गोल्डफेइन ने कहा है कि अभी तक B-52 को तैनात नहीं किये गया है, लेकिन वैश्विक हालातों को देखते हुए इस प्रकार की योजना बनानी पड़ रही है।












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