भारत में मिले कोविड-19 के B.1.617 के खिलाफ दो वैक्सीन बेहद कारगर, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की स्टडी में खुलासा

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी ने अपनी स्टडी में पाया है कि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली कोरोना वायरस वैक्सीन भारत में मिले कोरोना वायरस के बी.1.617 वेरिएंट के खिलाफ काफी कारगर है।

वॉशिंगटन, मई 19: फाइजर और मॉडर्ना द्वारा बनाई गई कोरोना वायरस वैक्सीन भारत में मिले स्ट्रेन के खिलाफ काफी ज्यादा कारगर साबित हुए हैं। भारत में कोरोना वायरस का वेरिएंट मिला है, उसका नाम बी.1.617 है और भारत में कोरोना वायरस से मची तबाही के पीछे कोरोना वायरस का यही वेरिएंट काफी ज्यादा जिम्मेदार है। न्यूयॉर्क स्टडी की ताजा स्टडी में कहा गया है कि भारत में मिले कोरोना वायरस का ये वेरिएंट बी.1.617 काफी तेजी से लोगों को संक्रमित करता है और ये वेरिएंट काफी खतरनाक भी है।

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी ने अपनी स्टडी में पाया है कि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली कोरोना वायरस वैक्सीन भारत में मिले कोरोना वायरस के बी.1.617 वेरिएंट के खिलाफ काफी कारगर है। स्टडी के मुताबिक मॉडर्ना और फाइजर वैक्सीन भारत में मिले बी.1.617 वेरिएंट के स्पाइक प्रोटीन को तोड़ देता है। स्पाइक प्रोटीन ही वायरस का हिस्सा है, जिसकी मदद से वायरस हमारे शरीर में दाखिल हो पाता है लेकिन जैसे ही वैक्सीन इस स्पाइक प्रोटीन को तोड़ता है, वैसे ही ये वायरस किसी काम का नहीं रहता है। एक तरह से ये वायरस उस सांप की तरह हो जाता है, जिसके पास ना विषवाले दांत हैं और ना ही विष की थैली। यानि, वो सांप काट भी ले तो कोई नुकसान नहीं।

वैक्सीन है सबसे ज्यादा जरूरी

वैक्सीन है सबसे ज्यादा जरूरी

अमेरिका को कोरोना वायरस से मुक्ति दिलाने वाले मशहूर महामारी विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फाउची ने व्हाइट हाउस में प्रेस ब्रिफिंग के दौरान कहा कि इस स्टडी में साफ तौर पर ये पता चला है कि कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के लिए वैक्सीन कितनी ज्यादा जरूरी है। डॉ. एंथनी फाउची ने कहा कि 'भारत में जो वेरिएंटर मिला है, वो काफी ज्यादा संक्रामक है और ऐसा खतरनाक वेरिएंट कहीं और भी बन रहा होगा, लिहाजा वैक्सीनेशन के जरिए ही इसके कहर से बचा जा सकता है।' रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में सबसे पहले बी.1.617 वेरिएंट केस अप्रैल महीने में नॉर्थ कैलिफोर्निया में मिला था और उसके बाद कई और अमेरिकी शहरों में भी भारत में मिला वेरिएंट मिल चुका है। और उसकी वजग से ही अमेरिका ने भारतीय यात्रियों पर ट्रैवल बैन लगाया।

अमेरिका में भी फैल रहा है भारत में मिला स्ट्रेन

अमेरिका में भी फैल रहा है भारत में मिला स्ट्रेन

अमेरिका की सीडीसी की रिपोर्ट के मुताबिक 24 तक अमेरिका में 0.7 प्रतिशत भारत में मिला बी.1.617 वेरिएंट के मामले मिले थे और अब आंकड़ा बढ़कर 1.1 प्रतिशत हो चुका है। यानि, अमेरिका में भी बी.1.617 वेरिएंट काफी तेजी से फैल रहा है। वहीं, डब्ल्यूएचओ भी बी.1.617 वेरिएंट को चिंता बढ़ाने वाला वेरिएंट कह चुका है। बी.1.617 वेरिएंट को लेकर डब्ल्यूएचओ ने कहा कि ये वेरिएंट काफी तेजी से एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है और ज्यादा प्रभाव डालता है। लेकिन, अच्छी बात ये है कि फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन इस वेरिएंट के खिलाफ काफी कारगर साबित हो रहे हैं।

फाइजर और मॉडर्ना बेहद कारगर

फाइजर और मॉडर्ना बेहद कारगर

डॉ. एंथनी फाउची ने व्हाइट हाउस में प्रेस ब्रिफिंग के दौरान कहा कि 'बी.1.617 वेरिएंट के खिलाफ हम लगातार स्टडी कर रहे हैं और हमें अब तक पता चला है कि फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन की वजह से जो इम्यून सिस्टम हमारे शरीर में बनता है वो इस वेरिएंट को खत्म करने में काफी कारगर है।' डॉ. एंथनी फाउची ने कहा कि 'बी.1.617 वेरिएंट एक म्यूटेंट वायरस है और 16 मई को हमारी स्टडी में पता चला कि फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन इस स्ट्रेन को निष्क्रीय करने में कामयाब हो रही हैं।' डॉ. एंथनी फाउची ने कहा कि 'न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की स्टडी ने एक और बेहद मजबूत वजह हमें दी है कि आखिर हमें क्यों वैक्सीन लेना चाहिए। अगर कोरोना वायरस से बचना है तो आपको वैक्सीन लेना ही होगा।'। आपको बता दें कि अमेरिका में अब तक 60 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन की सिंगल डोज दी जा चुकी है तो 48 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन की दोनों खुराक दी जा चुकी है। अमेरिका में सरकार ने 4 जुलाई तक 70 प्रतिशत आबादी को वैक्सीनेट करने का लक्ष्य रखा है और उसी की वजह से अमेरिका में कोरोना वायरस के मामले आने काफी कम हो चुके है।

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