ISI के साथ आतंकवादियों के साथ मजबूत संबंध, डोनाल्ड ट्रंप के NSA की किताब में पाकिस्तान पर बड़े खुलासे
US-Pakistan: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एच.आर. मैकमास्टर ने पाकिस्तान को फटकार लगाते हुए पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) पर आतंकवादी समूहों का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है।
अपनी पुस्तक, "एट वॉर विद आउरसेल्फ्स: माई टूर ऑफ ड्यूटी इन द ट्रम्प व्हाइट हाउस" में, मैकमास्टर ने खुलासा किया है, कि व्हाइट हाउस को इस्लामाबाद को सुरक्षा सहायता रोकने पर स्टेट डिपार्टमेंट और पेंटागन से विरोध का सामना करना पड़ा था।

किताब में खुलासा किया गया है, कि तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेशों के बावजूद, कि पाकिस्तान को आतंकवादियों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करना बंद करने तक सभी सहायता बंद कर दी जाए, रक्षा सचिव जिम मैटिस ने इस्लामाबाद के लिए 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की सैन्य सहायता पैकेज की योजना बनाई थी। इस पैकेज में बख्तरबंद वाहन शामिल थे, लेकिन मैकमास्टर के हस्तक्षेप के बाद इसे रोक दिया गया।
मैकमास्टर लिखते हैं, कि "कुछ गतिविधियों को रोकने के लिए स्टेट और डिफेंस को ट्रंप के निर्देशों का पालन करने के लिए मनाना मुश्किल था। दक्षिण एशिया रणनीति के विपरीत, जिसमें कुछ अपवादों के साथ पाकिस्तान को सभी सहायता सस्पेंड करने का आह्वान किया गया था, पेंटागन एक सैन्य सहायता पैकेज देने जा रहा था।"
इसका पता चलने पर, मैकमास्टर ने मैटिस, सीआईए के उप निदेशक जीना हैस्पेल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक बुलाई थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि ट्रंप ने कई मौकों पर स्पष्ट रूप से कहा था, कि पाकिस्तान को तब तक सहायता निलंबित कर दी जानी चाहिए, जब तक वे अफगानिस्तान में अफगानों, अमेरिकियों और गठबंधन के सदस्यों को निशाना बनाने वाले आतंकवादी संगठनों का समर्थन करना बंद नहीं कर देते।
मैटिस ने पाकिस्तानी जवाबी कार्रवाई की संभावना को स्वीकार किया, लेकिन अंततः सहायता के शिपमेंट को रोक दिया गया। हालांकि, कुछ अन्य सहायता देना जारी रखा गया।
आपको बता दें, कि एक बार डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया था, कि "संयुक्त राज्य अमेरिका ने पिछले 15 वर्षों में पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता मूर्खतापूर्ण ढंग से दी है और उन्होंने हमें झूठ और धोखे के अलावा कुछ नहीं दिया है, हमारे नेताओं को वो मूर्ख समझते हैं। वे उन आतंकवादियों को सुरक्षित आश्रय देते हैं, जिनका हम अफगानिस्तान में शिकार करते हैं। इसीसिए बहुत कम मदद के साथ अब और मदद नहीं!"
मैकमास्टर ने कहा, कि पाकिस्तान ने अपनी हरकतें नहीं बदली और मैटिस के दौरे की पूर्व संध्या पर 2008 के मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को भी रिहा कर दिया। इसके अलावा, पाकिस्तान में हाल ही में बंधक स्थिति ने आईएसआई की आतंकवादियों के साथ मिलीभगत को उजागर किया।
उस समय की कई समाचार रिपोर्टों ने ट्रंप के ट्वीट के ट्वीट की आलोचना की गई थी।
हालांकि, मैकमास्टर का तर्क है, कि सहायता को रोकना दक्षिण एशिया रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिसे ट्रंप ने अगस्त में कैंप डेविड में स्वीकृत किया था।
मैकमास्टर ने अपनी किताब में 14-17 अप्रैल 2017 तक अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत की अपनी यात्रा का विस्तृत विवरण दिया है, जिसके दौरान उन्होंने नई दिल्ली में तत्कालीन विदेश सचिव एस जयशंकर, डोभाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।
उन्होंने लिखा है, कि डोभाल और जयशंकर के बीच बातचीत आसान थी, "और मुझे विश्वास था कि हमारे पास अपने आपसी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए साथ मिलकर काम करने का एक शानदार अवसर है।"
उन्होंने लिखा है, कि "हमने अफगानिस्तान में युद्ध और परमाणु-सशस्त्र पाकिस्तान से भारत को खतरे के बारे में बात की, लेकिन जयशंकर और डोभाल ने मुख्य रूप से चीन की बढ़ती आक्रामकता के बारे में बात की। दोनों नेता, शी जिनपिंग की आक्रामकता के कारण अभूतपूर्व सहयोग के लिए तैयार थे। दुनिया के सबसे बड़े और दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्रों के बीच गहरी होती साझेदारी तार्किक लगती थी, लेकिन भारत को प्रतिस्पर्धा में फंसने का "डर" है, जिससे वह बचना पसंद करेगा और अमेरिका के दक्षिण एशिया पर अस्पष्टता के आधार पर त्याग देगा।"












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