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बाइडेन अपने कार्यकाल के आखिरी हफ्ते में भारत के लिए कुछ घोषणा करेंगे? दिल्ली भेजा स्पेशल दूत

US NSA India Visit: अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन का कार्यकाल आखिरी हफ्तों में है और उससे ठीक पहले उन्होंने अपने नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर जेक सुलिवन को दिल्ली दौरे पर भेजा है और सरकारी सूत्रों से पता चला है, कि अमेरिका के NSA कुछ बड़ा और पॉजिटिव घोषणा कर सकते हैं।

शीर्ष सरकारी सूत्रों के हवाले से सीएनएन-न्यूज18 ने अपनी रिपोर्ट में बताया है, कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन की भारत यात्रा को "सकारात्मक दिशा" में देखा जाना चाहिए, और अमेरिका से कई घोषणाएं होने की उम्मीद है।

jake sullivan india visit

दिल्ली में अमेरिका के NSA क्या घोषणा करेंगे? (US NSA India Visit Reasons)

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी NSA दिल्ली में भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल से मुलाकात करने वाले हैं और सूत्रों ने कहा है, कि वे रक्षा, सुरक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग सहित भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा कर सकते हैं।

दिलचस्प बात ये है, कि जेक सुलिवन की भारत यात्रा उस वक्त हो रही है, जब भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले महीने के आखिर में अमेरिका की 6 दिवसीय यात्रा की थी। अमेरिकी NSA के दौरे के दौरान फोकस के प्रमुख क्षेत्रों में से सबसे अहम यूएस-इंडिया इनिशिएटिव फॉर क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज (iCET) होगा। इसका मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है।

मई 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति बाइडेन ने iCET की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच अधिक सहयोग स्थापित करना है।

जेक सुलिवन और अजीत डोभाल, संयुक्त रूप से इस पहल का नेतृत्व कर रहे हैं और इसका उद्देश्य नए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के शासन के दौरान भी इसे जारी रखना है।

डोनाल्ड ट्रंप का अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथग्रहण 20 जनवरी को होगा। सुलिवन ने पिछली बार जून 2024 में भारत का दौरा किया था। सुलिवन की यात्रा में तिब्बत पर चीनी बांधों के प्रभाव पर भी चर्चा होगी। चर्चा चीनी बांधों, विशेष रूप से तिब्बत में यारलुंग जांगबो नदी पर बनाए जा रहे जलविद्युत बांध के प्रभावों पर केंद्रित होगी, जो भारत में बहती है।

भारत ने इस बांध के संभावित जल आपूर्ति प्रभाव के बारे में चीन से चिंता व्यक्त की है। वाशिंगटन और उसके पश्चिमी सहयोगी लंबे समय से भारत को एशिया और उससे आगे चीन के बढ़ते प्रभाव के प्रतिकार के रूप में देखते रहे हैं। सुलिवन की यात्रा से पहले एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा था, "हमने निश्चित रूप से इंडो-पैसिफिक में कई जगहों पर देखा है, कि मेकांग क्षेत्र सहित चीन द्वारा बनाए गए अपस्ट्रीम बांधों का डाउनस्ट्रीम देशों पर न केवल पर्यावरण बल्कि जलवायु पर भी संभावित रूप से हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है।"

सूत्रों ने बताया है, कि सैन्य लाइसेंसिंग और चीनी आर्थिक क्षमता पर चर्चा के अलावा असैन्य परमाणु सहयोग भी एजेंडे में है। वाशिंगटन और नई दिल्ली ने हाल के वर्षों में घनिष्ठ संबंध बनाए हैं, हालांकि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार, यूक्रेन पर मास्को के आक्रमण के बीच रूस के साथ नई दिल्ली के संबंध और अमेरिका और कनाडा की धरती पर सिख अलगाववादियों के खिलाफ कथित हत्या की साजिश जैसे मुद्दों पर कभी-कभी मतभेद भी होते रहे हैं।

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