US Iran Talks : ईरान-अमेरिका जंग पर ब्रेक ? पहला राउंड फेल होने के बाद 16 अप्रैल को होगी आर-पार की बात
US Iran Talks : दुनिया को महायुद्ध के मुहाने पर खड़ा करने के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीति की एक नई किरण दिखाई दे रही है। इस्लामाबाद में हुई मैराथन बातचीत में कोई बड़ा नतीजा न निकलने के बावजूद, दोनों देश एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौटने को तैयार हैं।
व्हाइट हाउस अधिकारियों के अनुसार, बातचीत का नया दौर 16 अप्रैल से शुरू हो सकता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब सोमवार, 12 अप्रैल सुबह से ही अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी (Blockade) शुरू कर दी है, जिससे तनाव चरम पर है।

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हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच मैराथन बातचीत हुई थी, लेकिन यह किसी बड़े समझौते में तब्दील नहीं हो सकी। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच मैराथन बातचीत हुई थी, लेकिन यह किसी बड़े समझौते में तब्दील नहीं हो सकी। व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्यक्तिगत रूप से बातचीत फिर से शुरू करने के पक्ष में हैं।
21 अप्रैल को दोनों देशों के बीच सीजफायर खत्म हो रही है। उससे पहले ट्रंप प्रशासन एक दूसरी व्यक्तिगत बैठक आयोजित करने की संभावनाओं पर आंतरिक चर्चा कर रहा है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, एक सूत्र ने बताया कि अगर बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ती है, तो अमेरिका बहुत जल्द किसी भी स्थान पर बैठक के लिए तैयार खड़ा है। हालांकि, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि तेहरान ट्रंप की शर्तों को मानेगा या नहीं।
सीजफायर की डेडलाइन बनी बड़ी चुनौती, कहां फंसा हैं पेंच?
दोनों देशों के बीच फिलहाल एक अस्थायी सीजफायर लागू है, जो 21 अप्रैल तक है। ऐसे में अगर उससे पहले कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो हालात फिर से बिगड़ सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि जरूरत पड़ने पर सीजफायर की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है, ताकि बातचीत के लिए और समय मिल सके।
बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन (uranium enrichment) को रोक दे, जबकि ईरान इस पर पूरी तरह सहमत नहीं है। दोनों देश इस बात पर सहमत तो हैं कि कुछ समय के लिए इसे रोका जा सकता है, लेकिन इसकी अवधि को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है।
राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का मानना है कि हफ्तों तक चले युद्ध ने ईरान को काफी कमजोर कर दिया है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि बंदरगाहों की घेराबंदी ईरान पर दबाव बढ़ाने का एक तरीका है। वे चाहते हैं कि ईरान बातचीत के लिए तैयार हो और उनकी सभी शर्तों को स्वीकार करे। 12 अप्रैल को ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान ने प्रशासन को फोन किया था और वे 'बहुत बुरी तरह से एक डील करना चाहते हैं।' हालांकि, ट्रंप ने यह नहीं बताया कि फोन किसने किया था।
Strait of Hormuz पर घेराबंदी से बढ़ी अनिश्चितता: क्या होगा अगला कदम?
सोमवार सुबह से शुरू हुई अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है। यह अभी भी साफ नहीं है कि इस घेराबंदी को लागू करने के लिए अमेरिका किस हद तक सैन्य ताकत का इस्तेमाल करेगा। ईरान ने कहा कि दुनिया इस बात को लेकर आशंकित है कि तेहरान इस घेराबंदी का जवाब मिसाइल हमलों से देगा या कूटनीति से।
तमाम तनाव के बावजूद, प्रशासन के अधिकारियों को उम्मीद है कि एक 'डिप्लोमैटिक ऑफ-रैंप' (कूटनीतिक समाधान) संभव है। यदि अगले कुछ दिनों में बातचीत की रफ्तार बढ़ती है, तो 21 अप्रैल की समय सीमा को आगे भी बढ़ाया जा सकता है ताकि समझौते के लिए अधिक समय मिल सके।
क्या समझौते के करीब हैं दोनों देश?
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि बातचीत अभी जारी है और किसी समझौते की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। ट्रंप ने भी दावा किया है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है और समझौता करना चाहता है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि दोनों देशों के बीच कई बड़े मुद्दों पर मतभेद अब भी कायम हैं।












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