July Weather Forecast 2026: जुलाई में मेहरबान नहीं होगा मानसून! IMD ने बताए 5 बड़े कारण

July Weather Forecast 2026: गर्मी से झुलस रहे लोगों को ये खबर परेशान कर सकती है क्योंकि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल जुलाई महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में औसत से कम बारिश होने की आशंका है जो कि किसानों के लिए मुसीबत पैदा कर सकता है। मौसम विभाग ने कहा है कि जुलाई में औसत से कम बारिश होने के आसार हैं लेकिन उत्तर-पश्चिम, पूर्वोत्तर, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक या सामान्य वर्षा हो सकती है।

जुलाई 2026 में पूरे भारत में दीर्घकालिक औसत (Long Period Average - LPA) का 94% बारिश होने का अनुमान है। जुलाई महीने के लिए LPA 280.4 मिमी निर्धारित है। विभाग का कहना है कि उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में जुलाई के दौरान सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। लेकिन देश के शेष बड़े भूभाग में बादलों के बरसने की उम्मीदें काफी कम दिखाई दे रही हैं।

July Weather Forecast 2026

क्या है Long Period Average (LPA)?

LPA यानी Long Period Average किसी क्षेत्र में 30 से 50 वर्षों के दौरान किसी महीने या पूरे मौसम में हुई औसत वर्षा का मानक होता है। भारत में मानसून का आकलन इसी आधार पर किया जाता है।

जून में क्यों रही इतनी कम बारिश?

IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि जून में पूरे भारत में लगभग 40% वर्षा की कमी दर्ज की गई। सबसे अधिक असर मध्य भारत पर पड़ा, जहां 50.4% की कमी रही। जून 2026 में देशभर में केवल 99.5 मिमी बारिश हुई, जो 1901 के बाद जून महीने की पांचवीं सबसे कम बरसात रही है।

डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने कम बारिश के पीछे ये 5 बड़े कारण बताए

  • मैडन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) की प्रतिकूल स्थिति: MJO की अनुकूल स्थिति में बादल और नमी बढ़ती है, जिससे मानसून मजबूत होता है। जून में इसकी प्रतिकूल अवस्था रही।
  • लो-प्रेशर सिस्टम (LPS) का नहीं बनना: पूरे जून महीने में एक भी प्रभावी निम्न दबाव क्षेत्र विकसित नहीं हुआ, जिससे मानसूनी बारिश कमजोर रही।
  • टाइफून का उत्तर-उत्तर पश्चिम की ओर मुड़ना: जून में बने अधिकांश टाइफून भारतीय महासागर क्षेत्र की बजाय उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा में चले गए, जिससे भारत के लिए अनुकूल मौसम प्रणाली विकसित नहीं हो सकी।
  • एल नीनो (El Niño) का असर: जून में एल नीनो जैसी परिस्थितियां उभरने लगीं, जिसका सीधा असर मानसून पर पड़ा। एल नीनो के दौरान भारत में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) का न्यूट्रल रहना: फिलहाल IOD न्यूट्रल स्थिति में है। यदि यह पॉजिटिव होता तो एल नीनो के असर को कुछ हद तक कम कर सकता था।

Monsoon आगे कहां पहुंचेगा?

IMD के अनुसार अगले 2-3 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। इस दौरान मानसून उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के शेष हिस्सों, गुजरात, मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश के
दमन और दीव, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के अधिकांश हिस्सों, पंजाब और राजस्थान के कुछ इलाकों में पहुंचेगा।

जुलाई में तापमान कैसा रहेगा?

मौसम विभाग का अनुमान है कि जुलाई में अधिकतम तापमान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक रहेगा।केवल पश्चिम-मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है।न्यूनतम तापमान भी अधिकांश राज्यों में सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है, जबकि मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कुछ इलाकों में यह सामान्य रह सकता है।

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