अमेरिका ने भारत की भी जासूसी की? अजीत डोभाल और रूसी NSA के बीच की बातचीत लीक, जानें क्या है?
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के 100 से ज्यादा टॉप सीक्रेट दस्तावेज लीक किए गये हैं, जिससे पता चला है, अमेरिका ने भारत, पाकिस्तान, फ्रांस, ब्रिटेन और ब्राजील की भी जासूसी की है।

US Secret Leak on India: इसी महीने अमेरिका एक जवान ने देश की सीक्रेट जानकारियां लीक कर दी थीं, जिससे पता चला था, कि अमेरिका सिर्फ दुश्मन देशों की ही नहीं, बल्कि अपने दोस्त और सहयोगी देशों की भी जासूसी करता है।
अमेरिकी खुफिया दस्तावेज लीक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उनके सहयोगी के साथ हुई बातचीत के बारे में विवरण दिया गया है, वहीं पाकिस्तान की विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी खार का सीक्रेट मेमो भी लीक किया गया है।
वहीं, साउथ एशिया इंडेक्स ने दावा किया है, कि अमेरिका ने भारत की भी जासूसी की है और भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल ने रूस के नेशनल सिक्योरिटी एटवाइजर से यूक्रेन युद्ध को लेकर क्या बात की थी, वो भी अमेरिका के लीक हुए खुफिया दस्तावेजों में दर्ज है।
अमेरिका ने की भारत की जासूसी?
साउथ एशिया इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन में चल रहे युद्ध को लेकर भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत कुमार डोभाल और उनके रूसी समकक्ष निकोले पेत्रुशेव के बीच बातचीत हुई थी।
लीक दस्तावेज़ के अनुसार, भारतीय अधिकारी अजीत डोभाल अमेरिका और रूस के बीच किसी एक का पक्ष लेने को लेकर अनिच्छुक लग रहे थे।
लीक दस्तावेज़ से पता चलता है, कि अजीत डोभाल ने रूसके एनएसए पत्रुशेव को बहुपक्षीय प्लेटफॉर्म्स में रूस के लिए भारत के समर्थन का आश्वासन दिया था। हालांकि, उन्होंने माना था, कि भारत के ऊपर पश्चिम का काफी दबाव है, लेकिन "काफी दबाव" के बावजूद, भारत की अध्यक्षता में 20 के समूह की बैठक के दौरान यूक्रेन संघर्ष को एक मुद्दा बनने से रोकने के लिए उन्होंने काम करने की बात कही थी।

इस साल भारत जी20 की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में जी20 के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बैठक में यूक्रेन को लेकर एक आम सहमति नहीं बन पाई थी, जिसे भारत के लिए एक बड़ा सिरदर्द माना गया था। भारत में इस साल सितंबर महीने में जी20 की बैठक होने वाली है और माना जा रहा है, कि यूक्रेन युद्ध उस वक्त भी भारत के लिए मुसीबत खड़ा सकता है।
अमेरिका के लीक दस्तावेज से पता चलता है, कि अजीत डोभाल ने रूस के एनएसए से कहा था, कि यूनाइटेड नेशंस में अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रस्ताव को लेकर भारत विचलित नहीं होगा और भारत वही फैसला करेगा, जो भारत का आधिकारिक रूख रहा है।
यानि, लीक दस्तावेजों से पता चलता है, कि अमेरिका पहले ही जान गया था, कि यूनाइटेड नेशंस में उसके लाए गये प्रस्ताव पर भारत का रूख क्या होने वाला है।
आपको बता दें, कि यूक्रेन के मुद्दे पर यूएन प्रस्ताव पर हुई वोटिंग के दौरान भारत गैर-हाजिर रहा था और भारत उन 32 देशों में शामिल था, जिन्होंने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था। वहीं, भारत ने अभी तक यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा नहीं की है, हालांकि भारत ने बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिए संकट के समाधान का वकालत किया है।
साउथ एशिया इंडेक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि भारत के अधिकारियों ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
अमेरिका की सीक्रेट दस्तावेज हुआ था लीक
वॉल स्ट्रीट जर्नल (डब्ल्यूएसजे) ने पेंटागन के सीक्रेट दस्तावेजों को पहली बार छापा था, जिसमें पिछले साल फरवरी से, जब यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था, उसके बाद से इस साल मार्च तक की टॉप सीक्रेट जानकारियां शामिल थीं।
लीक दस्तावेजों से पता चला है, कि अमेरिका ने अपने सहयोगी देश दक्षिण कोरिया, ईरान और यूके सहित विभिन्न देशों में गहराई से जासूसी की है। डब्ल्यूएसजे ने बताया, कि दक्षिण कोरिया, इज़राइल, यूक्रेन और यूनाइटेड किंगडम उन सहयोगियों में शामिल हैं जिन पर अमेरिका की गहरी नजर होती है।
दस्तावेजों से पता चला है, कि अमेरिकी सैन्य अधिकारी अपने यूक्रेनी समकक्षों को सटीक स्थानों पर आसन्न हमलों के बारे में रीयल टाइम जानकारी देने में सक्षम हो चुके हैं, जो उस क्षेत्र में व्यापक खुफिया जानकारी एकत्र करने का संकेत देता है।
माना जा रहा है, कि इस लीक के बाद अमेरिका के जासूसी तंत्र को बहुत बड़ा झटका लगा है और इससे आने वाले दिनों अमेरिका के जासूसी नेटवर्क को बहुत बड़ा नुकसान होगा।
वहीं, एक यूरोपीय देश के वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने कहा है, कि टॉप सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स के लीक होने से अमेरिका को लेकर भरोसा टूटा है और भविष्य में अमेरिका के साथ खुफिया जानकारियां साझा करने पर रोक लग सकता है।
उन्होंने कहा, कि गोपनीय सूचनाओं का आदान प्रदान में विश्वास सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।
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