"गौतम अडानी की जांच कर भारत से संबंध खराब करोगे?" जो बाइडेन पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के सांसद
US-India Diplomacy: अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने कुछ दिन पहले भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी पर घूस देने का आरोप लगाकर एक जांच शुरू की थी, जिसको लेकर डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद लांस गुडेन ने जो बाइडेन प्रशासन की आलोचना की है और चेतावनी दी है, कि इससे प्रमुख गठबंधनों पर दबाव पड़ सकता है।
सांसद लांस गुडेन ने अमेरिकी अटॉर्नी जनरल मेरिक बी गारलैंड को लिखे पत्र में सवाल किया है, कि "यदि भारत प्रत्यर्पण अनुरोध को अस्वीकार कर देता है, तो फिर अमेरिका क्या करेगा?"

बाइडेन प्रशासन से गौतम अडानी को लेकर सवाल
रिपब्लिकन पार्टी के सांसद ने विदेशी संस्थाओं के खिलाफ जस्टिस डिपार्टमेंट की 'चुनिंदा कार्रवाइयों', अमेरिकी गठबंधनों और आर्थिक विकास पर उनके प्रभाव और जॉर्ज सोरोस से किसी भी तरह के संबंधों पर जवाब मांगा है। गुडेन ने 7 जनवरी को लिखे अपने पत्र में कहा है, कि "जस्टिस डिपार्टमेंट की सलेक्टिव कार्रवाइयों से भारत जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ महत्वपूर्ण गठबंधनों को नुकसान पहुंचने का खतरा है, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के सबसे मजबूत सहयोगियों में से एक है।"
उन्होंने कहा, "कम अधिकार क्षेत्र वाले और अमेरिकी हितों के लिए सीमित प्रासंगिकता वाले मामलों को आगे बढ़ाने के बजाय, जस्टिस डिपार्टमेंट को विदेश में अफवाहों का पीछा करने के बजाय, घर में बुरे लोगों को दंडित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।"
आपको बता दें, कि लांस गुडेन पिछले पांच बार से रिपब्लिकन पार्टी की टिकट पर संसदीय चुनाव जीत रहे हैं और पार्टी के अंदर उनका काफी ऊंचा कद है। और उन्होंने कहा, कि अरबों डॉलर का निवेश करने वाली और अमेरिकियों के लिए हजारों नौकरियां पैदा करने वाली संस्थाओं को निशाना बनाना, लंबे वक्त में अमेरिका को ही नुकसान पहुंचाएगा।
उन्होंने बाइडेन प्रशासन से सवाल पूछते हुए कहा, कि "जब हम हिंसक अपराध, आर्थिक जासूसी और चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी के प्रभाव से होने वाले वास्तविक खतरों को नजरअंदाज करते हैं और उन लोगों के पीछे पड़ जाते हैं, जो हमारे आर्थिक विकास में योगदान करते हैं, तो यह उन मूल्यवान नए निवेशकों को हतोत्साहित करता है, जो हमारे देश में निवेश करने की उम्मीद करते हैं।"
उन्होंने आगे लिखा है, कि "निवेशकों के लिए एक खराब और राजनीतिक रूप से दवाबपूर्ण माहौल, सिर्फ और सिर्फ अमेरिका के औद्योगिक आधार और आर्थिक विकास को फिर से जिंदा करने की कोशिशों को ही खराब करेगा, और बढ़ते निवेश के साथ अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिबद्धता को सीधे तौर पर कमजोर करेगा।" उन्होंने कहा, कि दूर देशों में लंबी और संभावित रूप से राजनीति से प्रेरित जांच पर करदाताओं का पैसा बर्बाद करने के बजाय, विभाग को अमेरिकी लोगों की बेहतर सेवा के लिए आने वाले प्रशासन के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा है, कि "अडानी मामले में आरोप, भले ही सच साबित हो जाएं, फिर भी हम इस मुद्दे पर उचित और अंतिम मध्यस्थ नहीं बन पाएंगे।"
गुडेन ने लिखा है, कि "कथित तौर पर ये 'रिश्वत' भारत में भारतीय राज्य सरकार के अधिकारियों को एक भारतीय कंपनी के भारतीय अधिकारियों की तरफ से दी गई थी, जिसमें किसी भी अमेरिकी पक्ष की कोई ठोस संलिप्तता या नुकसान नहीं था।"
आपको बता दें, कि अमेरिकी प्रॉसीक्यूटर्स ने भारतीय अरबपति गौतम अडानी पर अपने मुताबिक सौर ऊर्जा कॉन्ट्रैक्स के बदले भारतीय अधिकारियों को 265 मिलियन अमरीकी डॉलर (लगभग ₹2,200 करोड़) की रिश्वत देने की योजना में कथित रूप से शामिल होने का आरोप लगाया है। हालांकि, अडानी समूह ने आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें "निराधार" बताया और कहा, कि अडानी समूह सभी कानूनों का पालन करता है।












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