क्यों 20 जनवरी को ही शपथ ग्रहण करते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति ? 93 साल पहले शुरू हुई थी परम्परा
US Inauguration Day 20 January: वाशिंगटन डीसी। जो बाइडेन और कमला हैरिस के लिए बस अब बस कुछ घंटे बचे हैं जब उन्हें नवनिर्वाचित राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की जगह अमेरिका का राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति कहा जाने लगेगा। बाइडेन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति और कमला हैरिस 49वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ लेगीं। दोनों को अमेरिका की परम्परा के अनुसार 20 जनवरी के दिन पद की शपथ दिलाई जाएगा। ये ऐसी परम्परा है जो अमेरिका में पिछले 93 साल से निभाई जा रही है लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था। आइये जानते हैं कि आखिर क्यों अमेरिका के राष्ट्रपति 20 जनवरी को ही शपथ लेते हैं।
Recommended Video

अमेरिकी संविधान के तहत बना है नियम
ऐसा नहीं है कि अमेरिका में शपथ ग्रहण की तारीख परम्परा के तहत चुनी जाती है। इसका नियम अमेरिकी संविधान में है जिसे कोई राष्ट्रपति या सरकार नहीं बदल सकता। पहली बार इस तारीख को 1937 में अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने शपथ ली थी जब वे दूसरी बार राष्ट्रपति बने थे। नियम के मुताबिक नवम्बर के पहले मंगलवार को राष्ट्रपति पद का चुनाव होना तय है और उसके बाद 20 जनवरी को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति को शपथ दिलाई जाती है।
वैसे आप सोच रहे होंगे कि राष्ट्रपति को चुनाव में जीत के बाद पद संभालने के लिए करीब ढाई महीने का इंतजार करने की क्या जरूरत है। दरअसल इस दौरान नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अपनी टीम तैयार करता है जिनके साथ उसे प्रशासन चलाना होता है। इनमें कैबिनेट से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति तक शामिल है।

पहले मार्च में होता था शपथ ग्रहण
भले ही ये ढाई महीने ज्यादा लग रहे हों लेकिन 1937 से पहले इसमें और समय लगता है। पहले चुनाव के बाद राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण की तारीख 4 मार्च हुआ करती थी। यानि कि पूरे 4 महीने का अंतर होता था। इस दौरान नया राष्ट्रपति जहां अपनी तैयारी में जुटा रहता था वहीं निवर्तमान राष्ट्रपति एक दिखावटी राष्ट्रपति के रूप में पद पर रहता था। जो कोई गंभीर फैसले नहीं ले सकता था और अगर ले भी ले तो नया राष्ट्रपति उसे बदल सकता था।
इसीलिए अमेरिका में चुनाव और शपथ ग्रहण के बीच के अंतर को कम करने का विचार किया गया और इसके बाद 1933 में अमेरिका के संविधान में 20वें संविधान संशोधन का प्रस्ताव रखा गया जिसमें शपथ ग्रहण की तारीख को पहले करते हुए 20 जनवरी को करने की बात कही गई। 23 जनवरी 1933 को ये संविधान संशोधन पारित हो गया। इसके बाद 1937 में जब रूजवेल्ट दोबारा राष्ट्रपति बने तो उन्होंने 4 मार्च की जगह पहली बार 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ ली। इस संविधान संशोधन में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया था जिसके तहत नई कांग्रेस की पहली बैठक 3 जनवरी को होनी सुनिश्चित की गई।

अमेरिका में इसे कहा जाता है इनॉग्रेशन डे
इस नियम का पालन हर राष्ट्रपति को करना पड़ता है। चाहे वह पहली बार चुनकर आया हो या फिर दूसरे कार्यकाल के लिए उसे जीत मिली हो लेकिन शपथ ग्रहण 20 जनवरी को ही होता है। अमेरिका में इसे इनॉग्रेशन डे कहा जाता है। ये नये प्रशासन का आधिकारिक रूप से पहला दिन होता है।
वैसे शपथ लेते ही सत्ता का हस्तांतरण नहीं हो जाता है। सामान्य तौर पर दिन में ही शपथ दिलाई जाती है लेकिन निवर्तमान राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति 20 जनवरी को रात के 11 बजकर 59 मिनट और 59 सेकंड तक अपने पद पर बने रहते हैं उसके बाद सारी शक्तियां नये प्रशासन के पास पहुंच जाती हैं।

रविवार को 20 जनवरी पड़ने पर अलग नियम
एक और दिलचस्प बात ये है कि अमेरिका में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शपथ दिलाते हैं लेकिन संविधान के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश के लिए ऐसा करना जरूरी नहीं है। इसके साथ ही अगर 20 जनवरी की तारीख रविवार के दिन पड़ जाए तो राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति निजी समारोह में शपथ लेते हैं। इसके बाद 21 जनवरी को सार्वजिनक समारोह किया जाता था। ऐसा 2013 में हुआ था जब बराक ओबामा दूसरी बार राष्ट्रपति बने थे। खास बात ये है कि बराक ओबामा के दोनों कार्यकाल में जो बाइडेन उपराष्ट्रपति रहे थे।

कड़ी सुरक्षा के बीच बाइडेन-हैरिस का शपथ ग्रहण
जब इस बार अमेरिका के नये राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति 20 जनवरी को कैपिटल हिल के बाहर शपथ ले रहें होंगे उस दौरान वहां पर अमेरिकी सेना के हजारों जवान सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के लिए राजधानी वाशिंगटन डीसी में आपात काल लागू है और प्रशासन चप्पे-चप्पे पर निगरानी कर रहा है। 6 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों की हिंसा को देखते हुए एक दिन पहले से ही अमेरिकी कांग्रेस के लिए बनी कैपिटल बिल्डिंग को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। 6 जनवरी को जो बाइडेन की जीत को स्वीकार करने के लिए होने वाली कांग्रेस की बैठक के दौरान कैपिटल बिल्डिंग के बाहर खड़े ट्रंप समर्थक नतीजों को बदलने की मांग करते हुए बिल्डिंग के अंदर घुस गए थे। इस हिंसा में 5 लोग मारे गए थे जिनमें एक पुलिसकर्मी भी शामिल है।












Click it and Unblock the Notifications