US H-1B Visa: ट्रंप का '88 लाख' वाला नियम क्या है? 5 पॉइंट्स में समझें हर सवालों के जवाब
US H-1B visa 5 fact: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा को लेकर बड़ा फैसला लिया है, जिसका असर विशेष रूप से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और कंपनियों पर पड़ेगा। नए नियमों के तहत अब H-1B वीजा के लिए कंपनियों को $100,000 (करीब 88 लाख रुपये) की भारी-भरकम फीस चुकानी होगी।
यह बदलाव रविवार यानी 21 सितंबर 2025 से लागू होगा और अगले 12 महीने तक प्रभावी रहेगा। भारत जैसे देशों के प्रोफेशनल्स, जो H-1B वीजा पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं, अब नई चुनौतियों का सामना करेंगे। आइए जानते हैं ट्रंप के इस फरमान से जुड़े 5 महत्वपूर्ण तथ्य।

H-1B वीजा क्या है और क्यों मचा है बवाल?
H-1B वीजा अमेरिका का वर्क वीजा है, जो विदेशी प्रोफेशनल्स को काम करने की अनुमति देता है। हर साल 65,000 वीजा सामान्य श्रेणी और 20,000 एडवांस डिग्री वालों के लिए मिलते हैं। यह 3 से 6 साल के लिए होता है और कंपनियां अपने कर्मचारियों को स्पॉन्सर करती हैं। Basically, यह विदेशी टैलेंट को अमेरिका लाने और कंपनियों को योग्य कर्मचारियों की सुविधा देने का तरीका है।
19 सितंबर 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा पर बड़ा बदलाव किया। अब कंपनियों को हर कर्मचारी पर $100,000 (करीब ₹88 लाख) फीस देनी होगी, जो पहले के $215 पंजीकरण और $780 याचिका शुल्क से कई गुना अधिक है।
$100,000 फीस सिर्फ नए वीजा पर लागू
H-1B वीजा पर नए नियम के तहत कंपनियों को अब हर नए आवेदन या वीजा ट्रांसफर के लिए $100,000 (करीब 88 लाख रुपये) फीस चुकानी होगी। यह शुल्क सिर्फ नए वर्कर्स पर लागू होगा और पुराने वीजा धारकों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इस बदलाव का उद्देश्य अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों के प्रवेश को नियंत्रित करना है। भारतीय आईटी कंपनियों और विदेशी पेशेवरों के लिए यह कदम वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
12 महीने तक रहेगा प्रभाव
ट्रंप का यह नया H-1B नियम 21 सितंबर 2025 से लागू हो गया है और अगले 12 महीने तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि के दौरान सभी नए आवेदन और ट्रांसफर इस भारी शुल्क के दायरे में आएंगे। उसके बाद अमेरिकी प्रशासन इस नियम की समीक्षा कर सकता है या संशोधन कर सकता है। इसलिए कंपनियों और पेशेवरों को अगले एक साल में अपने वीजा अप्लिकेशन और प्रोजेक्ट योजना के अनुसार रणनीति बनानी होगी।
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भारतीय पेशेवरों पर सबसे ज्यादा असर
पिछले साल मंज़ूर हुए H-1B वीज़ा में 71% वीज़ा भारतीयों को मिले थे, इसलिए नए $100,000 शुल्क का सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय पेशेवरों पर पड़ने की संभावना है। कई भारतीय H-1B धारकों का औसत वेतन $100,000 से कम है, जिससे यह नया नियम उनके लिए एक भारी वित्तीय बोझ बन सकता है। इससे नौकरी पर दबाव, ट्रांसफर में चुनौतियां और वित्तीय तनाव बढ़ने की आशंका है।
कंपनियों और पेशेवरों में अफरा-तफरी
H-1B वीज़ा पर नए $100,000 नियम की घोषणा के बाद कई कंपनियों ने अमेरिका के बाहर मौजूद कर्मचारियों को 21 सितंबर से पहले लौटने की सलाह दी। इससे हवाई अड्डों पर अफरा-तफरी मच गई और लोग जल्दबाजी में अमेरिका लौटने लगे। टेक कंपनियों जैसे माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़ॅन और जेपी मॉर्गन ने अपने कर्मचारियों को सावधानी बरतने के लिए कहा। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह नियम केवल नए आवेदन पर लागू होगा।
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