अमेरिका में 'फंड खत्म, काम बंद', जानिए क्यों ठप पड़ी दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था?
US government shutdown 2025: अमेरिका एक बार फिर राजनीतिक गतिरोध की भेंट चढ़ गया है। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही सरकार के पास खर्च के लिए जरूरी बिल पास नहीं हो पाया, जिसके चलते सरकारी कामकाज अचानक ठप हो गए।
इसका सीधा असर लाखों सरकारी कर्मचारियों पर पड़ा है, जिन्हें बिना वेतन घर बैठना पड़ा है। विकास और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े कई प्रोजेक्ट रुक गए हैं। असल संकट कांग्रेस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच खर्च को लेकर खींचतान से पैदा हुआ है। स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक योजनाओं पर बजट आवंटन को लेकर दोनों दल आमने-सामने हैं।

फंड 'फाइट': अमेरिका में सरकारी काम-काज क्यों ठप?
अमेरिका में सरकारी काम-काज बंद (गवर्नमेंट शटडाउन) होने का मुख्य कारण फंड की कमी है, जो दरअसल अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन पार्टियों के बीच बजट को लेकर गहरे राजनीतिक गतिरोध का नतीजा है।
अमेरिका में हर साल 1 अक्टूबर से नया वित्तीय वर्ष (Fiscal Year) शुरू होता है। सरकार को काम जारी रखने के लिए इस तारीख से पहले कांग्रेस को फंडिंग बिल या एक अल्पकालिक व्यय विधेयक (Continuing Resolution - CR) पास करना होता है। इस बार, दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच खर्च और नीतियों को लेकर असहमति थी और वे समय पर किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए, जिसकी वजह से फंडिंग बिल पास नहीं हो सका। सरकारी खर्च को मंजूरी नहीं मिली। नतीजतन, सरकार के पास खर्च करने के लिए पैसा नहीं बचा और उसे 'शटडाउन' करना पड़ा।
गतिरोध का मुख्य कारण
- गतिरोध का मुख्य केंद्र बिंदु स्वास्थ्य सेवा (Health Care) सब्सिडी और कुछ सामाजिक कार्यक्रम थे।
- डेमोक्रेट्स चाहते थे कि अस्थायी फंडिंग बिल में ओबामाकेयर (Affordable Care Act) की खत्म हो रही सब्सिडी को स्थायी रूप से बढ़ाया जाए और हाल ही में हुई कुछ स्वास्थ्य देखभाल कटौती को वापस लिया जाए।
- रिपब्लिकन इन मांगों को अस्वीकार कर रहे थे और उनका तर्क था कि फंडिंग बिल को नीतियों से अलग रखा जाना चाहिए।
- दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े रहे, जिसके कारण मतदान में जरूरी वोट नहीं मिल पाए और सरकारी फंडिंग की समय सीमा समाप्त हो गई। इस स्थिति में, गैर-जरूरी सरकारी सेवाएं रुक जाती हैं और लाखों कर्मचारियों को बिना वेतन के छुट्टी पर (Furlough) भेज दिया जाता है।
सीनेट में हार, रिपब्लिकन बैकफुट पर
सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से पेश शॉर्ट-टर्म फंडिंग बिल को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। रिपब्लिकन को 60 वोट चाहिए थे, लेकिन उन्हें केवल 55 वोट मिले। डेमोक्रेट्स ने साफ कर दिया कि बिना हेल्थकेयर फंडिंग एक्सटेंशन के वे किसी भी पैकेज को पास नहीं होने देंगे। इसका सीधा असर यह है कि अमेरिकी राजनीति फिलहाल गतिरोध में है।
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शटडाउन का सीधा असर
व्हाइट हाउस बजट ऑफिस आधिकारिक मेमो जारी करेगा और शटडाउन लागू हो जाएगा। इसका असर सबसे पहले संघीय कर्मचारियों पर पड़ेगा। करीब 7.5 लाख कर्मचारियों को अस्थायी रूप से बिना वेतन काम करना पड़ेगा या घर बैठना पड़ेगा। सेना के जवान और आवश्यक सेवाएं तो जारी रहेंगी, लेकिन उनका वेतन रोका जा सकता है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और डेटा की आपूर्ति पर भी असर पड़ेगा।
ट्रंप का सख्त रुख
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेट्स पर करारा हमला बोला। व्हाइट हाउस बैठक के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर विपक्ष का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि वे चुनाव भारी अंतर से हार गए और अब भी नहीं बदले। हालांकि, राजनीतिक दबाव और संभावित नुकसान को देखते हुए अब ट्रंप पर बैकफुट आने का दबाव बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ट्रंप सख्त रुख पर अड़े रहे, तो जनता की नाराज़गी सीधे उन पर फूट सकती है।
डेमोक्रेट्स का पलड़ा भारी
सीनेट डेमोक्रेटिक लीडर चक शूमर ने कहा कि रिपब्लिकन 'बदमाशी' कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हेल्थकेयर फंडिंग और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को शामिल नहीं किया गया तो विपक्ष किसी भी हालत में समर्थन नहीं देगा। इस वजह से अब ट्रंप प्रशासन के पास समझौते या बैकफुट आने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
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