US Election 2020: अमेरिकी राज्यों में धीरे-धीरे बढ़त बनाते जा रहे हैं डेमोक्रेट जो बाइडेन
वॉशिंगटन। अमेरिका में जैसे-जैसे चुनाव का दिन नजदीक आ रहा है, रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट जो बाइडेन के बीच मुकाबला भी रोमांचक होता जा रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बाइडेन के निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल वोट्स जीतने के मौके बढ़ते जा रहे हैं। यह खबर ट्रंप और उनके समर्थकों के लिए थोड़ी दिल दुखाने वाली हो सकती है। अमेरिका में तीन नवंबर को राष्ट्रपति के चुनाव होने हैं।

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बाइडेन के लिए गुड न्यूज
निर्वाचक मंडल के वोट्स पर ही जीत निर्भर करती है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक बाइडेन के इलेक्टोरल वोट्स जीतने के मौके 86.1 प्रतिशत तक पढ़ गए हैं। जबकि 10 अक्टूबर को यह 85.8 प्रतिशत था। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि बाइडेन को 538 में से 352 इलेक्टोरल वोट्स मिल सकते हैं। अमेरिका में दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों के लिए इलेक्टोरल कॉलेज वोट्स को जीतना बहुत जरूरी है। हर राज्य में कुछ निश्चित इलेक्टोरल कॉलेज वोट्स यानी निर्वाचक मंडल होते हैं। ये वोट्स हर राज्य की आबादी पर निर्भर करते हैं। कुल 538 इलेक्टोरल वोट्स हैं यानी हर उम्मीदवार को जीतने के लिए 270 या इससे ज्यादा इलेक्टोरल वोट्स की जरूरत होती है। इसका मतलब यह हुआ कि राज्स स्तर के वोटर्स ही कौन जीतेगा इस बात का फैसला कर देते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर किसने किसको कितने वोट दिए इसका ज्यादा असर नहीं पड़ता है
क्या हुआ था साल 2016 में
साल 2016 में हिलेरी क्लिंटन को राष्ट्रीय स्तर पर काफी वोट्स मिले थे मगर इलेक्टोरल कॉलेज के वोट्स की वजह से उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा था। लेकिन दो राज्यों में एक विजेता-सभी नियम होते हैं, इसलिए यहां जो भी उम्मीदवार जीतता है, वह राज्य के सभी निर्वाचक मंडल वोटों से सबसे ज्यादा वोट हासिल करता है। बहुत से राज्य ऐसे हैं जहां पर वोटर्स का झुकाव किस पार्टी की तरफ है, कह पाना मुश्किल होता है। ऐसे में सबसे ज्यादा ध्यान एक दर्जन या इससे ज्यादा कुछ राज्यों के वोटर्स पर होता है। इन राज्यों को बैटलग्राउंड यानी रणभूमि राज्य के तौर पर जाना जाता है।












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