US Election 2020: क्या पॉपुलर वोट हारकर भी राष्ट्रपति बनेंगे डोनाल्ड ट्रंप, 5 बार हुआ है ये कारनामा !
वॉशिंगटन। डेमोक्रेट जो बाइडेन पॉपुलर वोट जीतकर लगातार रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते जा रहे हैं। जहां भारत में रूझान आते ही किसी पार्टी या किसी नेता की हार या जीत तय होने लगती है, अमेरिका में यह कहानी पूरी उलटी हो जाती है। यहां जीत के लिए तय इलेक्टोरल वोट हासिल करना जरूरी है। बाइडेन के खाते में 7 करोड़ से ज्यादा पॉपुलर वोट हैं। अगर वह इलेक्टोरल वोट हासिल नहीं कर पाते हैं तो फिर उन्हें विजेता नहीं माना जा सकेगा। अमेरिका के इतिहास में पांच बार ऐसा मौका आया है कि जब उम्मीदवारों ने पॉपुलर वोट्स तो गंवा दिए लेकिन फिर भी कार्यकाल उनके हिस्से आया है। इसमें एक मौका साल 2016 में भी आया था। उस समय भी डोनाल्ड ट्रंप पॉपुलर वोट्स के लिहाज से अपनी प्रतिद्वंदी डेमोक्रेट हिलेरी क्लिंटन बहुत पीछे थे लेकिन वह फिर भी राष्ट्रपति चुने गए थे।

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कब-कब कौन-कौन हारा पॉपुलर
एंड्रयू जैकसन- सन 1824 में एंड्रयू जैकसन ने पॉपुलर वोट और इलेक्टोरल कॉलेज दोनों ही जीते लेकिन उनके पास बहुमत नहीं था। इसके बाद चुनाव प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स में पहुंचा। यहां पर कुल तीन उम्मीदवार थे, डेमोक्रेट जैकसन और उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंदी जॉन क्वींसी एडम्स के अलावा विलियम क्रॉफर्ड और हेनरी क्ले। क्ले ने सपोर्ट एडम्स को दे दिया और इसके साथ ही एडम्स विजेता बन गए। क्ले को विदेश मंत्री बनाया गया। भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जैकसन ने सीनेट छोड़ दी और फिर सन् 1828 में राष्ट्रपति के लिए रेस में आए। इस समय वह आसानी से चुनाव जीते।
सैमुअल टिलडेन- सन् 1876 में डेमोक्रेट सैमुअल टिलडेन ने रिपब्लिकन डेमोक्रेट रदरफोर्ड बी हायेज को 200,000 से ज्यादा वोट्स से हरा दिया था। लेकिन उन्हें 185 इलेक्टोरल वोट्स की जरूरत थी और वह बस 184 वोट ही हासिल कर सके। हायेज ने 165 वोट हासिल किए। फ्लोरिडा, लुइसियाना, ऑरेगॉन और साउथ कैरोलिना में 20 वोटों पर विवाद की स्थिति थी। कांग्रेस की तरफ से एक कमीशन बनाया गया जिसमें दोनों पार्टियों के प्रतिनिधियों से विजेता का नाम सुनिश्चित करने को कहा गया। 2 मार्च यानी इनॉग्रेशन से 3 दिन पहले हायेज को राष्ट्रपति चुन लिया गया। डेमोक्रेट्स की तरफ से दक्षिण से पूरी सेना हटाने का वादा किया गया था।
ग्रोवर क्लैवलैंड- सन् 1888 में जब राष्ट्रपति चुनाव हुए तो कैंपेन पर भ्रष्टाचार जिसमें वोट खरीदने और अश्वेतों की आवाज दबाने जैसे आरोप लगाए गए। उस वर्ष डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति ग्रोवर क्लेवलैंड ने अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंदी बेंजामिन हैरीसन पर 90,000 से ज्यादा पॉपुलर वोटों के साथ बढ़त बनाई थी। लेकिन उन्हें बस 168 इलेक्टोरल वोट ही हासिल हो सके जबकि हैरीसन को 233 वोट मिले थे। 4 साल बाद जब फिर से चुनाव हुए तो क्लैवलैंड ने जीत हासिल की।
जॉर्ज डब्लू बुश- सन् 2000 में हुए अमेरिकी चुनाव की याद इस बार फिर से ताजा हो गई है। उस समय रिपब्लिकन पार्टी के जॉर्ज डब्लू बुश का सामना डेमोक्रेट और उप-राष्ट्रपति रहे अल गोर से था। बुश पॉपुलर वोट हार गए थे और गोर से मिली इस हार का अंतर 500,000 से ज्यादा वोट्स का था। लेकिन इलेक्टोरल वोट में मुकाबला आज की ही तरह काफी कड़ा था। फ्लोरिडा में लड़ाई फंस गई और यहां पर बैलेट को फिर से गिना गया। 12 दिसंबर को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने जब वोटों की गिनती को दोबारा रोका तो बुश के पास फ्लोरिडा में अच्छी-खासी बढ़त थी। टेक्सास के पूर्व गर्वनर रहे बुश को 271 इलेक्टोरल वोट्स मिले थे जबकि अल गोर को 266 यानी बस 5 वोट से गोर चुनाव हार गए थे।
डोनाल्ड ट्रंप- साल 2016 में डोनाल्ड ट्रंप पहली बार अमेरिकी चुनावों में अपनी किस्मत आजमा रहे थे। उनके सामने डेमोक्रेट हिलेरी क्लिंटन थी। ट्रंप को 304 इलेक्ट्रोरल वोट मिले तो हिलेरी को 227 वोट मिले थे। जबकि ट्रंप 2.8 मिलियन वोटों से पॉपुलर वोट्स हार गए थे। ट्रंप को उन चुनाव में पॉपुलर वोट की श्रेणी में सबसे बड़ी हार का मुंह देखना पड़ा था।












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