‘अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से रक्षा संबंध खत्म करे’, रक्षा मंत्री ने रखी प्रमुख सहयोगी बनने की शर्त!
अमेरिकी रक्षा मंत्री की भारत को लेकर यह टिप्पणी उस वक्त आई है, जब अमेरिकी सांसद जो विल्सन ने अमेरिकी कांग्रेस में यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत के रूख की आलोचना की थी
वॉशिंगटन/नई दिल्ली, अप्रैल 06: अमेरिका चाहता है कि, भारत अपने तमाम रक्षा संबंध रूस के साथ खत्म कर दे। अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने अमेरिकी संसद में भारत को लेकर ये बड़ा बयान दिया है, जबकि अमेरिका को पता है कि, भारत अपनी रक्षा जरूरतों का करीब 60% आयात रूस से करता है। अमेरिका ने एक तरह से भारत के सामने प्रमुख सहयोगी बनने के लिए ये एक प्रमुख शर्त रखी है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने मंगलवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत आगे चलकर रूसी सैन्य उपकरणों पर अपनी निर्भरता को कम करेगा। ऑस्टिन ने यूएस कांग्रेस की सशस्त्र सेवा समिति के सदस्यों से कहा कि, "हम यह सुनिश्चित करने के लिए उनके (भारत) के साथ काम करना जारी रखे हुए हैं, कि यह उनके (हमारा मानना है कि) रूसी उपकरणों में निवेश जारी रखना उनके हित में नहीं है।" वार्षिक रक्षा बजट पर कांग्रेस की सुनवाई के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री ने भारत को लेकर ये अहम बयान दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि, ‘और हमारी जरूरत आगे बढ़ रही है कि, वे (भारत) उन उपकरणों के प्रकारों को कम कर दें, जिसमें वो निवेश कर रहे हैं, या फिर निवेश करना चाहते हैं, ताकि हम विश्वसनीय रह सकें'।
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यूक्रेन युद्ध पर भारत की आलोचना
अमेरिकी रक्षा मंत्री की भारत को लेकर यह टिप्पणी उस वक्त आई है, जब अमेरिकी सांसद जो विल्सन ने अमेरिकी कांग्रेस में यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत के रूख की आलोचना की थी और कहा था कि, ‘ये काफी भयानक है कि, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश और हमारा कीमती सहयोगी भारत, अमेरिकी संबंधों पर वरीयता देकर रूस से हथियारों की प्रणाली खरीद रहा है और खुद को क्रेमलिन के साथ नजदीक रखने का विकल्प चुन रहा है'। उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री से पूछा कि, ‘हम विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम के माध्यम से मंच पर कौन सा हथियार पेश कर सकते हैं, जो खरीददारों को प्रोत्साहित करेगा? और हम ऐसा क्या कर रहे हैं, जो भारतीय नेताओं को पुतिन को अस्वीकार करने और लोकतंत्र के अपने पाकृतिक सहयोगियों के साथ संबंध बढ़ाने की तरफ आगे बढ़ाएगा?'

प्रमुख सहयोगी हो सकता है भारत
अमेरिकी सांसद विल्सन ने आगे रूसी रक्षा मंत्री से कहा कि, ‘मैं आशा कर रहा हूं कि, अमेरिकी सरकार भारत के महान लोगों के साथ काम करना जारी रखेगी और अगर हम बिक्री को लेकर कुछ प्रतिबंधों को खत्म कर दें, तो भारत हमारा कितना अच्छा सहयोगी हो सकता है।' रूसी सैन्य उपकरणों पर भारत की निर्भरता पर अमेरिका ने कई चिंताएं जताई हैं, लेकिन नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया है, कि वह सस्ता रूसी तेल खरीदना जारी रखेगा। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने सोमवार को कहा कि अमेरिका का मानना है कि रूस से ऊर्जा आयात और अन्य वस्तुओं को बढ़ाना भारत के हित में नहीं है।

रूसी हथियारों पर निर्भर भारत
आपको बता दें कि, भारतीय सेना कई रूस निर्मित हथियारों का उपयोग करती है, जिसमें टैंक, आर्टिलरी गन और मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। नई दिल्ली ने रूस के एस-400 वायु रक्षा प्रणाली को खरीदने के लिए सौदों पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिस पर काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसए) के तहत अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा है। वहीं, 14 अप्रैल को भारत और अमेरिका के बीच 2+2 की बैठक होने वाली है, जिसमें आशंका जताई गई है, कि भारत के खिलाफ अमेरिका कुछ प्रतिबंधों का ऐलान कर सकता है। लेकिन, कई अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि, अगर अमेरिका भारत पर प्रतिबंध लगाता है, तो यह अमेरिका की ऐतिहासिक भूल साबित होगी।

भारत-रूस रक्षा संबंध पर जानकारी
पिछले साल आई सीआरएस रिपोर्ट में कहा गया है कि, 2010 के बाद से भारत अपने हथियार खरीदी का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा रूस से ही खरीदता है और रूस का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश भारत है। रूस जितना हथियार निर्यात करता है, उसका 32 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत खरीदता है। हालांकि, 2014 में भारत में सरकार परिवर्तन के बाद धीरे-धीरे भारत ने हथियारों को लेकर रूस पर निर्भरता कम करनी शुरू कर दी और 2016 से 2020 के बीच भारत ने रूस के कुल हथियारों के निर्यात का लगभग एक-चौथाई (23 प्रतिशत) हिस्सा खरीदा है। वहीं, भारत ने रूस से 62 प्रतिशत हथियार खरीदने की जगह उसे घटाकर 49 प्रतिशत तक ला दिया है। सीआरएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि, द मिलिट्री बैलेंस 2021 के अनुसार, भारत के वर्तमान सैन्य शस्त्रागार में रूसी-निर्मित या रूसी-डिज़ाइन किए गए उपकरणों का भारी भंडार है। भारतीय सेना का मुख्य युद्धक टैंक बल मुख्य रूप से रूसी T-72M1 (66 प्रतिशत) और T-90S (30 प्रतिशत) से बना है।












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