इमरान खान कर रहे पाकिस्तान को बदनाम? अमेरिकी सांसदों ने चिट्ठी लिखकर शहबाज सरकार को लगाई फटकार
इमरान खान ने पिछले साल सत्ता से हटने के बाद अमेरिका पर अपनी सरकार गिराने का आरोप लगाया था। हालांकि, बाद में उन्होंने धीरे धीरे अमेरिका को लेकर यूटर्न लेना शुरू कर दिया।

US Congressman Sherman: संयुक्त राज्य अमेरिका के सांसद ब्रैड शेरमैन ने पाकिस्तान में "लोकतंत्र, मानवाधिकारों और कानून के शासन" के उल्लंघन पर चिंता जतााई और उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्र को इस बाबत कड़े शब्दों में चिट्ठी लिखी है।
ब्रैड शेरमैन ने अपनी चिट्ठी में पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ब्रैड शेरमैन ने अपने ट्वीटर अकाउंट पर इस चिट्ठी को शेयर किया है, जिससे पता चलता है, कि एक दिन पहले ये चिट्ठी लिखी गई है।
इस चिट्टी में शेरमन ने अमेरिका के विदेश मंत्री से अपील की है, कि वो पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी पॉलिसी में बदलाव करे, ताकि लोकतंत्र और मानवाधिकारों को लेकर पाकिस्तान अपनी प्रतिबद्धता दिखा सके। इसके लिए उन्होंने अमेरिका के अलग अलग चैनलों का इस्तेमाल करने की मांग की है, और जवाबदेह पाकिस्तानी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
इसके साथ ही चिट्ठी में मांग की गई है, कि "मैं अधिकारियों से सुनिश्चित कने
"मैं अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह करता हूं, पाकिस्तान में प्रदर्शन करने वाले नागरिक, या राजनीति...अलोकतांत्रित नहीं है"।
अमेरिकी सांसद ने पाकिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन के कई मामलों को उजागर किया है। जिनमें इमरान खान से संबंधित भी कई मामले मे हैं।
अमेरिकी सांसद की चिट्ठी में इमरान खान के भाषणों पर बार बार लगने वाली रोक, मीडिया प्रतिबंध, प्रदर्शनकारियों पर होने वाली कार्रवाई, पीटीआई के नेता शहबाज गिल की गिरफ्तारी और पत्रकार पत्रकार जमील फारूकी को टॉर्चर करने का जिक्र किया है।
मानवाधिकार पर पाकिस्तान को फटकार
अमेरिकी सांसद की चिट्ठी में पंजाब और केपी चुनावों में देरी का भी उल्लेख किया गया है और इसे "लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से छेड़छाड़ का एक और संकेत" कहा गया है। इसके साथ ही आंतरिक मंत्री राणा सनाउल्लाह के उस बयान को भी लिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था, कि "या तो उन्हें (इमरान) राजनीतिक क्षेत्र से हटा दिया जाएगा या हमें (पीएमएल- एन)"।
उन्होंने अपनी चिट्ठी में कहा है, "पाकिस्तान की राजनीतिक प्रक्रियाओं में अमेरिका शामिल नहीं है और अमेरिका, पाकिस्तान की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान भी करता है, लेकिन, जब पाकिस्तानी लोगों के मानवाधिकार दांव पर हों, तो हमें अपनी आवाज उठाने से नहीं कतराना चाहिए"।
इमरान के भाषणों के प्रसारण पर प्रतिबंध के बारे में शेरमन ने एमनेस्टी इंटरनेशनल के उस बयान को भी याद किया है, जिसमें इसे "आलोचनात्मक आवाजों को लक्षित करने का परेशान करने वाला प्रदर्शन" कहा गया था।
ब्रैड शेरमैन के अलावा, हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस महिला नेता एलिसा स्लोटकिन ने भी पाकिस्तान में मानवाधिकार पर गंभीर सवाल उठाए थे।
उन्होंने लिखा था, कि "पाकिस्तान में लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ाने के लिए मैं अमेरिका के विदेश मंत्री को चिट्ठी लिखने जा रही है, इसके लिए मैं 100 कांग्रेस सदस्यों का समर्थन पाने की दिशा में काम कर रही हूं"।
क्या चिट्ठीबाजी के पीछे हैं इमरान खान?
पाकिस्तान को लेकर अमेरिका के सांसदों ने अचानक अपनी आवाजें उठानी शुरू कर दी हैं और शहबाज शरीफ की सरकार के खिलाफ बाइडेन प्रशासन में लगातार शिकायतें भेजी जा रही हैं।
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, कई अमेरिकी प्रतिनिधि और नेता इमरान खान की पार्टी, पीटीआई की शिकायतों को प्रतिध्वनित करते हुए अपनी चिंताओं को व्यक्त कर रहे हैं।
यूनाइटेड किंगडम और यूरोप में पीटीआई नेताओं ने भी विरोध प्रदर्शन करके, सांसदों को पत्र लिखकर और पीटीआई के खिलाफ सरकार की कार्रवाइयों के बारे में सूचित करने के लिए मानवाधिकार संगठनों से बात करके कार्रवाई शुरू कर दी है।
डॉन ने लिखा है, कि अपनी छवि सुधारने के लिए इमरान खान ने पिछले साल एक अमेरिकी एजेंसी के साथ कॉन्ट्र्क्ट किया था। इस पीआर एजेंसी को अमेरिका में इमरान खान की छवि सुधारने का काम सौंपा गया था। इस काम के लिए इमरान खान की पार्टी हर महीने पीआर एजेंसी को 25 हजार से 30 हजार डॉलर का भुगतान करती है।
लिहाजा, सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या खुद इमरान खान ही तो नहीं, अपने देश के खिलाफ अमेरिकी सांसदों से चिट्ठी लिखवा रहे हैं और अमेरिका में पाकिस्तान को बदनाम करवा रहे हैं।












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