अमेरिकी लड़ाकू विमानों को धूल चटा सकते हैं चीनी फाइटर जेट्स, रिपोर्ट में दावा, चुटकी में तबाह होंगे US एयरबेस?

US Vs Chinese Fighter Jets: चीन लगातार अपने एयरफोर्स का विस्तार कर रहा है और दुनिया की सबसे बड़ी ताकत अमेरिका को चुनौती दे रहा है। वहीं, हडसन इंस्टीट्यूट की एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि हाल के वर्षों में चीन ने अपने हवाई अड्डों की ऐसी किलेबंदी की है, कि उसे अमेरिकी सैन्य हवाई अड्डों के खिलाफ महत्वपूर्ण बढ़त हासिल करने की स्थिति में ला दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में चीन ने लगातार अपने हवाई अड्डों को मजबूत किया है और इस प्रक्रिया में, वाशिंगटन से शिकागो तक फैले चार लेन के राजमार्ग के निर्माण के लिए जितना कंट्रीट की जरूरत होती है, उतने कंक्रीट का इस्तेमाल कर एयरबेस का निर्माण किया है।

US-China fighter jets airbase preparations

युद्ध के लिए किस स्तर की तैयारी कर रहा चीन?

हडसन इंस्टीट्यूट की "कंक्रीट स्काई: एयर बेस हार्डनिंग इन द वेस्टर्न पैसिफिक" शीर्षक वाली रिपोर्ट में चीनी एयरफोर्स और उसकी ताकत को लेकर कई खुलासे किए गये हैं। चीन ने अपने हवाई अड्डों का विस्तार और उन्हें मजबूत बनाने के लिए एक "राष्ट्रव्यापी, व्यवस्थित अभियान" चलाया है। जिसका मकसद बड़े पैमानों पर होने वाले हमलों के दौरान, हमलों को सहना है।

थिंक टैंक के वरिष्ठ फेलो टिमोथी ए. वाल्टन और सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के सहायक वरिष्ठ फेलो थॉमस एच. शुगार्ट की रिपोर्ट में कहा गया है, कि विमानों को दुश्मन के हमलों से बचाने के लिए बनाए गए कठोर विमान शेल्टर्स की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। चीन के पास अब कठोर विमान शेल्टर्स की संख्या 370 से बढ़कर 800 से ज्यादा हो गई है।

वहीं, गैर-कठोर शेल्टर्स की संख्या 1100 से बढ़कर 2300 से ज्यादा हो गई है, जिससे देश भर में आश्रयों की कुल संख्या 3100 से ज्यादा हो गई है। ये आश्रय संघर्ष के दौरान चीन के लड़ाकू विमानों के विशाल बेड़े की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। चीन के ये फाइटर जेट्स शेल्टर ताइवान को ध्यान में रखकर बनाए गय हैं, जिसको लेकर आशंका है, कि आज नहीं तो कल भीषण युद्ध हो सकता है।

इस क्षेत्र में चीन के 134 हवाई अड्डों पर 650 से ज्यादा कठोर शेल्टर्स और लगभग 2000 गैर-कठोर शेल्टर्स हैं। जबकि, अमेरिका ने उसी क्षेत्र में सिर्फ दो कठोर शेल्टर और 41 गैर-कठोर शेल्टर बनाए हैं, जिसमें दक्षिण कोरिया के बाहर के ठिकानों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

इस रिपोर्ट में चीन और अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच हवाई क्षेत्र क्षमता में असमानता की एक साफ लकीर खींची गई है। दक्षिण कोरिया और फिलीपींस में हवाई अड्डों को शामिल करने पर, अमेरिका और उसके सहयोगियों की संयुक्त क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र क्षमता चीन की तुलना में लगभग एक तिहाई है। यह असंतुलन काफी ज्यादा चिंताजनक है, क्योंकि इसका मतलब है, कि संघर्ष की स्थिति में, चीन अमेरिका और उसके सहयोगियों की तुलना में अपने हवाई ऑपरेशन को कहीं ज्यादा प्रभावी ढंग से बनाए रख सकता है।

अमेरिका को किसी भी स्थिति में चुनौती देने को तैयार

रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन ने जो ऑपरेशनल बढ़त हासिल की है, उसे किसी भी परिस्थिति में अपनी एयरबेस को सुरक्षित रखते हुए अमेरिकी एयरपावर को दबाने और नष्ट करने की क्षमता प्रदान करती है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी, चीनी वायु सेनाओं को निष्क्रिय करने के लिए बहुत कम हमले कर पाएंगे।

उदाहरण के लिए, चीन जापान के मुख्य द्वीप होन्शू में स्थित इवाकुनी में अमेरिकी सैन्य विमानों और ईंधन भंडारों को सिर्फ 10 मिसाइल हमलों से बेअसर कर सकता है।

इसके अलावा, अमेरिका को गंभीर रसद चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ताइवान के सबसे नजदीकी अमेरिकी सैन्य बेस कडेना एयर बेस है, जो जापान के ओकिनावा द्वीप पर स्थित है, जो द्वीप से केवल 370 मील की दूरी पर है। हालांकि, इन दूर के ठिकानों से एक स्थायी हवाई अभियान बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

कितनी खतरनाक बन चुकी है चीन की वायुसेना?

पेंटागन ने पिछले दिनों अपनी सलाना रिपोर्ट में चीन की सैन्य क्षमता को लेकर रिपोर्ट जारी की थी और उस रिपोर्ट के बाद अब हडसन की रिपोर्ट आई है। पेंटागन की रिपोर्ट में चीन की मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों (MRBM) में बड़ी वृद्धि पर प्रकाश डाला गया है और कहा गया है, कि चीन ने अपने बेड़े में एक साल में 300 से ज्यादा मिसाइलों को जोड़ा है।

रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन ने621 से 1864 मील तक की दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें बनाई है, जो जापान, ताइवान और फिलीपींस सहित रणनीतिक रक्षा रेखा, पूरे प्रथम द्वीप श्रृंखला में अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक पहुंचने में सक्षम हैं।

पेंटागन ने यह भी कहा है, कि चीनी रॉकेट फोर्स, जो भूमि-आधारित मिसाइलों का प्रबंधन करती है, वो नियमित रूप से नकली हवाई क्षेत्रों, बंकरों, विमानों और जहाजों को निशाना बनाकर लाइव-फायर अभ्यास करती है, जिससे विभिन्न जवाबी कार्रवाई की स्थिति मे सुधार होता है। सैटेलाइट इमेजरी ने पहले अमेरिकी सैन्य परिसंपत्तियों, जैसे विमान वाहक, के नकली-अप का खुलासा किया है, जिन्हें संभावित मिसाइल लक्ष्य माना जाता है।

चीन के बढ़ते मिसाइल खतरे का मुकाबला करने के लिए, हडसन इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में अमेरिका से हवाई क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करने, लचीलेपन के लिए एयरबेसों को मजबूत बनाने और विमानों और मानव रहित प्रणालियों के विकास में तेजी लाने का आग्रह किया गया है, जो अमेरिकी वायु सेना की एजाइल कॉम्बैट एम्प्लॉयमेंट (ACE) रणनीति के अनुरूप छोटे या क्षतिग्रस्त रनवे से भी संचालित हो सकते हैं।

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