आंसू गैस के गोले, हजारों पुलिसवाले.. गाजा के लिए फूटे छात्रों के विद्रोह पर बाइडेन ने चलवाई रबर की गोलियां
US Protest Over Gaza: बात बात पर भारत को लोकतंत्र, प्रदर्शन का अधिकार, फ्रीडम ऑफ स्पीच का ज्ञान देने वाला अमेरिका, आज जब अपने घर में प्रदर्शन की आग लगी है, तो उसे बेरहमी से कुचल रहा है। जो बाइडेन का प्रशासन, जब हर दूसरी बात पर भारत को ज्ञान देने के लिए कूदता रहता है, उसने छात्रों के प्रदर्शन को कुचलने के लिए हजारों पुलिसवालों को अमेरिका की सड़कों पर उतार दिया है।
दरअसल, गाजा पट्टी में चल रहे इजराइली युद्ध के खिलाफ पूरे अमेरिका में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है और सैकड़ों कॉलेजों के हजारों-हजार छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और छात्रों के प्रदर्शन को कुचलने के लिए बाइडेन प्रशासन ने सैकड़ों पुलिस अधिकारियों को उतार दिया है।

प्रदर्शन को बेरहमी से कुचल रहा बाइडेन प्रशासन
गुरुवार (25 अप्रैल) को बड़े पैमाने पर फिलिस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शनों ने संयुक्त राज्य अमेरिका में दर्जनों विश्वविद्यालय के छात्र शामिल हो गये हैं और पुलिस उनके प्रदर्शन को कुचलने के लिए हर तरह के बल का इस्तेमाल कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक विश्वविद्यालय में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका की पुलिस ने टैसर और कैमिकल का इस्तेमाल किया है। पुलिस का कहना है, कि छात्र विश्वविद्यालय पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे।
जॉर्जिया के डेकाटुर में एमोरी विश्वविद्यालय में पुलिस अधिकारियों ने कई हिंसक गिरफ्तारियां की हैं। हाल के दिनों में प्रदर्शनकारियों पर यह पहली ऐसी पुलिस कार्रवाई है। फिलिस्तीन के साथ और कॉप सिटी के खिलाफ अपनी एकजुटता व्यक्त करने के लिए छात्रों ने कई शिविर स्थापित किए हैं, और अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों पर आंसूगैस के गोले और रबर की गोलियां चलाई गई है।
एमोरी यूनिवर्सिटी में पुलिस को प्रदर्शनकारियों के साथ हाथापाई करते और उनके खिलाफ बल प्रदर्शन करते हुए देखा गया है। कॉलेज की एमोरी व्हील समाचार वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, लोगों को हिरासत में लेने के लिए गैस मास्क पहने अधिकारियों ने जिप-टाई का इस्तेमाल किया है।
वहीं, एमोरी विश्वविद्यालय ने एक बयान जारी कर कहा है, कि बाहरी प्रदर्शनकारियों में "एमोरी समुदाय के सदस्य" शामिल हो गए हैं और यह समूह "विश्वविद्यालय के कामकाज को बाधित कर रहा है, क्योंकि हमारे छात्र कक्षाएं खत्म कर रहे हैं और फाइनल एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं"।
विश्वविद्यालय ने पुष्टि की है, कि अटलांटा पुलिस ने कई दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया है, हालांकि यूनिवर्सिटी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ रबर की गोलियों के इस्तेमाल से इनकार किया है। अटलांटा पुलिस विभाग (एपीडी) ने आगे पुष्टि की है, कि कॉलेज ने "परिसर की सुरक्षा" में मदद मांगी थी।
America turning totalitarian to protect the sensibilities of Israel.
Apparently, Netanyahu and his cabinet cannot sleep well at night if young Americans are allowed to peacefully protest against the genocide in Gaza. pic.twitter.com/snk1IUs1kk
— S.L. Kanthan (@Kanthan2030) April 26, 2024
अमेरिका में छात्रों के प्रदर्शन की बड़ी बातें
-CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के तमाम प्रमुख विश्वविद्यालयों में गाजा पट्टी में इजराइली हमलों के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है, जिसके बाद सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है।
-अधिकारियों के मुताबिक, इंडियाना विश्वविद्यालय में कम से कम 33 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो प्रोफेसरों को भी हिरासत में लिया गया है। वहीं, जॉर्जिया के एमोरी विश्वविद्यालय में दर्जनों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।
- बोस्टन में, एमर्सन कॉलेज के प्रेसिडेंट जे बर्नहार्ट ने कहा, कि उन्होंने दर्जनों गिरफ्तारियों के बाद कहा, छात्रों के प्रदर्शन का सम्मान किया जाना चाहिए, उस आंदोलन को पहचानना चाहिए, जिसकी वजह से इस विरोध प्रदर्शन ने जन्म लिया है।
- इस बीच, दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने "नए सुरक्षा उपायों" का हवाला देते हुए, अगले महीने अपना मुख्य उद्घाटन समारोह रद्द कर दिया। कैंपस से करीब 100 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
-प्रदर्शनों के केंद्र न्यूयॉर्क का कोलंबिया विश्वविद्यालय भी शामिल है, जहां के प्रदर्शनकारियों ने कहा, कि वे तब तक नहीं प्रदर्शन करना बंद नहीं करेंगे, जब तक कि यूनिवर्सिटी इजराइली सैक्षणिक संस्थानों के साथ अपने संबंध खत्म नहीं कर लेता है। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी में इजराइल से जुड़ी संस्थाओं ने जो निवेश किया हुआ है, उसे भी जब तक हटाया नहीं जाता, प्रदर्शन जारी रहेगा। इसके अलावा, अन्य कॉलेज और यूनिवर्सिटी परिसरों में भी प्रदर्शनकारियों की ऐसी ही मांगें हैं।
#BREAKING_NEWS 🚨 UT Austin the police are now fighting back! If this turns bad there will be protest everywhere! I’m all for the cops removing them!! This is America not GAZA!!! Wild to America has come to this! pic.twitter.com/hr7IuvfEU9
— The doppelgängers 🇺🇸 (@Marcie2316) April 24, 2024
- ओहियो यूनिवर्सिटी में भी भारी प्रदर्शन किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता बेंजामिन जॉनसन के अनुसार, ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रदर्शनकारियों का कैंपस खाली करने से इनकार करने के बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने कई गिरफ्तारी की हैं। बेंजामिन जॉनसन ने कहा, कि उन्हें जानकारी नहीं है, कि कितनी गिरफ्तारियां की गई हैं।
- वहीं, ब्राउन यूनिवर्सिटी के एक प्रवक्ता ने कहा, कि ब्राउन यूनिवर्सिटी ने लगभग 130 प्रदर्शनकारी छात्रों की पहचान की गई है, जिन पर स्कूल के आचरण संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगा है। प्रवक्ता ब्रायन क्लार्क ने एक प्रेस रिलीज में कहा है, कि विश्वविद्यालय के छात्रों ने आचरण का उल्लंघन किया है और कम से कम 90 छात्रों ने कैंपस में तंबू डाल दिया है।
- इंडियाना यूनिवर्सिटी में भी गिरफ्तारियां- CNN के मुताबिक, इंडियाना विश्वविद्यालय के परिसर में गुरुवार को विरोध प्रदर्शन के बाद कम से कम 33 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इंडियाना यूनिवर्सिटी पुलिस विभाग के एक बयान के मुताबिक, इंडियाना यूनिवर्सिटी पुलिस और इंडियाना राज्य पुलिस ने गुरुवार सुबह और दोपहर को "कई बार" विरोध करने वाले छात्रों को तंबू हटाने को कहा था। लेकिन तंबू हटाने से इनकार करने पर कई छात्रों को गिरफ्तार कर लिया गया है और पूरे क्षेत्र से तंबुओं को तोड़कर फेंक दिया गया है।
छात्रों के प्रदर्शन से अचानक क्यों जलने लगा अमेरिका?
फिलीस्तीन से सहानुभूति रखने वाले पूरी दुनिया के अलग अलग जगहों के लोग अब पूरे अमेरिका में फैल गये हैं और विश्वविद्यालयों के कैंपस में छात्रों ने जो तंबुएं लगाई हैं, उनके बैकग्राउंड भी अलग अलग हैं। इन छात्रों में फिलीस्तीनी, अरब देशों के मुस्लिम और दुनिया के कई अन्य देशों के मुस्लिम शामिल हैं।
इन छात्रों के पास अब राजनीतिक और सामाजिक विचारों का एक स्पेक्ट्रम भी तैयार हो गया है, खासकर पिछले कुछ सालों में अमेरिका की राजनीति में तेजी से वामपंथी विचारधारा का उदय होने लगा है और बाइडेन प्रशासन पर भी लगातार ऐसे तत्वों को बढ़ावा देने का आरोप लगा है। अरब देशों के अमेरिकी मुस्लिमों ने 5 नवंबर को अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में बाइडेन का बहिष्कार करने की भी घोषणा की है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है, कि वे चाहते हैं कि उनके स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय, गाजा में 'नरसंहार' के खिलाफ खड़े हों।
7 अक्टूबर को जब हमास ने दक्षिणी इजराइल पर हमला किया था, तो अमेरिका के कई कॉलेज में काफी जश्न मनाया गया था, लेकिन जब इजराइल ने गाजा पट्टी में हमास के खिलाफ पलटवार शुरू किया, तो पहले तो इन्हें लगा, कि ये लड़ाई 2-4 दिनों में खत्म हो जाएगी, लेकिन इस बार इजराइल हमास को जड़ से खत्म करने पर अड़ गया है। इसका नतीजा ये हुआ है, कि अमेरिका के कॉलेजों में यहूदी छात्रों के खिलाफ नफरत काफी खतरनाक स्तर तक बढ़ चुका है और बाइडेन प्रशासन इसे रोकने में पूरी तरह से नाकाम नजर आ रहा है।
अमेरिका में रहने वाले कई यहूदियों को लगता है, कि इजराइल को अब अमेरिका के कहीं ज्यादा समर्थन की जरूरत है, जो लंबे समय से उत्पीड़न का शिकार रहे हैं। भले ही अमेरिका में रहने वाले कई यहूदी, गाजा में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लड़ाई का समर्थन नहीं करते हैं, फिर भी उनका मानना है, कि अमेरिका में इजरायल विरोधी और यहूदी विरोधी भावना में भारी इजाफा हुआ है। जबकि, ज्यादातर यहूदी गाजा में हमास को कुचलने के इजरायली सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हैं।
CAIR की रिपोर्ट में कहा गया है, कि अमेरिकी विश्वविद्यालयों में इस्लामोफोबिया की रिकॉर्ड घटनाओं को रिकॉर्ड किया गया है और एंटी-डिफेमेशन लीग ने यहूदी छात्रों के खिलाफ हिंसा और धमकियों की ऐतिहासिक संख्या दर्ज की है।
कुछ यहूदी छात्रों ने कहा है, कि उन्हें प्रदर्शनकारियों की तरफ से धमकियां मिल रही हैं और रैलियों में यहूदी विरोधी बयानबाजी की जा रही है। वहीं, अमेरिका के कई नेताओं ने यहूदियों के खिलाफ नफरत को और बढ़ाया है। हालांकि, व्हाइट हाउस और कई गवर्नरों ने यहूदी छात्रों के लिए समर्थन व्यक्त किया है और प्रदर्शनकारियों और विश्वविद्यालयों से संयम बरतने का आग्रह किया है, लेकिन अमेरिका में छात्रों के प्रदर्शन की ये आग कब बुझेगी, फिलहाल नहीं कहा जा सकता है।












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