भारत के साथ बहुत बड़ी दगाबाजी, पाकिस्तान को विशालकाय हथियार पैकेज देगा अमेरिका
अमेरिकी कांग्रस ने बुधवार को एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें अमेरिकी विदेश विभाग की तरफ से कहा गया है कि, अमेरिकी सरकार ने 450 मिलियन अमरीकी डालर का पैकेज पाकिस्तान को देने का फैसला किया है।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली, सितंबर 09: भारत में अकसर सवाल उठते रहे हैं, कि क्या अमेरिका पर भरोसा करना चाहिए और बड़े से बड़े विदेश मामलों के एक्सपर्ट हों या रक्षा विशेषज्ञ, इस सवाल पर पहले वो चुप होते हैं और फिर कहते हैं, कि नहीं, आंख मूंदकर अमेरिका पर भरोसा नहीं करना चाहिए। एक बार फिर ये सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अमेरिका ने पाकिस्तान को हथियार के लिए विशालकाय पैकेज की घोषणा की है। यानि, जिस अमेरिकी डॉलर्स पर पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद को पालता पोषता रहा, उस अमेरिका ने एक बार पाकिस्तान को मेगा पैकेज देने का ऐलान किया है। लेकिन, सबसे आश्चर्यजनक बात ये है, कि मोदी सरकार ने अमेरिका के इस फैसले को लेकर अभी तक चुप्पी साध रखी है। आइये समझते हैं, कि अमेरिका ने जो भारत के साथ जो डबल गेम खेला है, इसके मायने क्या हैं?

450 मिलियन डॉलर का पैकेज
बाइडेन प्रशासन ने घोषणा की है, कि वो पाकिस्तान को आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए 450 मिलियन डॉलर का एक पैकेज देगा, जिसमें पाकिस्तान एफ-16 लड़ाकू जेट बेड़े का रखरखाव भी करेगा। यानि, अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए ये मेगा पैकेज देने की घोषणा की है, जबकि खुद पाकिस्तान ही आतंकवादियों का जनक देश है। यानि, एक तरह से देखा जाए, तो अमेरिका ने भारत के साथ उसी तरह का गेम खेला है, जैसा गेम वो भारत के साथ 70 से 90 के दशक में खेलता था और पाकिस्तान पर अरबों डॉलर्स की बारिश करता है, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान भारत के खिलाफ करता था। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान की नाक में नकेल डाला था और साल 2018 में अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क आतंकवादी समूहों पर नकेल कसने और देश में उनके सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने में विफल रहने के लिए इस्लामाबाद को सुरक्षा सहायता में लगभग 2 अरब अमरीकी डालर की राशि को सस्पेंड कर दिया था, लेकिन बाइडेन प्रशासन ने 450 मिलियन डॉलर का पैकेज देने को मंजूरी दे दी है।
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'आतंकवाद से लड़ेगा पाकिस्तान'
अमेरिकी कांग्रस ने बुधवार को एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें अमेरिकी विदेश विभाग की तरफ से कहा गया है कि, अमेरिकी सरकार ने 450 मिलियन अमरीकी डालर की अनुमानित लागत से एफ -16 फाइटर जेट्स के रखरखाव और संबंधित उपकरणों की मरम्मत के लिए संभावित विदेशी सैन्य बिक्री को मंजूरी दे दी है। अमेरिका की तरफ से यह तर्क दिया गया है कि, इस रक्षा पैकेज से इस्लामाबाद आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई करने की क्षमता को बरकररार रख पाएगा और अपने F-16 बेड़े को बनाए रखने से वर्तमान और भविष्य के आतंकवाद विरोधी खतरे के खिलाफ लड़ने की उसे ताकत मिलेगी। रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने बुधवार को इस संभावित बिक्री के बारे में कांग्रेस को सूचित करते हुए आवश्यक प्रमाणीकरण दे दिया है।

अमेरिका ने पाकिस्तान पर क्या कहा?
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि, "संयुक्त राज्य सरकार ने पाकिस्तान वायु सेना के एफ -16 कार्यक्रम को बनाए रखने के लिए एक प्रस्तावित सौदे को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया है, जो अमेरिका के विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम का एक हिस्सा है, क्योंकि अमेरिका के लिए पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण आतंकवाद विरोधी भागीदार है, और काफी लंबे वक्त से संयुक्त राज्य अमेरिका पाकिस्तान पैकेज देता आया है, ताकि वो आतंकवाद से लड़ाई लड़ सके। अमेरिकी विदेश विभाग की तरफ से जो बयान जारी किया गया है, उसमें पाकिस्तान को द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। बयान में कहा गया है कि, "पाकिस्तान का एफ-16 कार्यक्रम व्यापक संयुक्त राज्य-पाकिस्तान द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रस्तावित बिक्री अपने एफ -16 बेड़े को बनाए रखते हुए वर्तमान और भविष्य के आतंकवाद विरोधी खतरों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान की क्षमता को बनाए रखेगी। एफ -16 बेड़े से पाकिस्तान को आतंकवाद निरोधी अभियान चलाने में मदद मिलती है और हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान सभी आतंकवादी समूहों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई करेगा।"

पाकिस्तान को कितना फायदा होगा?
अमेरिकी कांग्रेस की अधिसूचना में कहा गया है, कि अमेरिका की तरफ से जो पैकेज जारी किया गया है, उसमें हथियार सामग्री में नई क्षमता बढ़ाना या फिर युद्ध सामग्री की खरीद शामिल नहीं है। 450 मिलियन डॉलर के इस पैकेज के जरिए पाकिस्तान एफ-16 एयरक्राफ्ट में स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी प्रोग्राम, इलेक्ट्रॉनिक कॉम्बैट इंटरनेशनल सिक्योरिटी असिस्टेंस प्रोग्राम, इंटरनेशनल इंजन मैनेजमेंट प्रोग्राम, इंजन कंपोनेंट इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम और दूसरी टेक्नोलॉजिकल प्रोग्राम को जोड़ सकता है। इसके साथ ही विमान के हार्डवेयर में बदलाव, अपग्रेडेशन, सॉफ्टवेयर संशोधन और इंजन की मरम्मति भी शामिल है। पेंटागन ने कहा कि यह प्रस्तावित बिक्री संयुक्त राज्य अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों का समर्थन करेगी, जिससे पाकिस्तान को अमेरिका और सहयोगी बलों के साथ चल रहे आतंकवाद विरोधी प्रयासों और भविष्य के आकस्मिक अभियानों की तैयारी में अंतर-संचालन बनाए रखने की अनुमति मिलेगी।

भारत ने धारण कर रखी है खामोशी
अमेरिका के इस पैकेज से साफ है, कि अमेरिका ने एक बार फिर से पाकिस्तान को सैन्य मदद देना शुरू कर दिया है, जो भारत के लिए एक बड़ा झटका है। जाहिर तौर पर पाकिस्तान इन डॉलर्स का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करेगा, जैसा पहले करता आया है और अमेरिका का ये बड़ा दोगलापन है। वहीं, भारत ने अमेरिका के इस फैसले पर अभी तक कुछ भी बयान नहीं दिया है। वहीं, द हिन्दू की रिपोर्ट में कहा गया है कि, अमेरिकी विदेश विभाग की घोषणा 7 सितंबर 2022 को दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू सहित भारतीय और अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बातचीत की पृष्ठभूमि में हुई। आपको बता दें कि, भारत से भारी आपत्ति के बावजूद पाकिस्तान को पहली बार 1980 के दशक में रोनाल्ड रीगन प्रशासन से F-16 विमान का पैकेज दिया था और ये वो वक्त था, जब पाकिस्तान अमेरिका का रणनीतिक पार्टनर हुआ करता था और अमेरिका ये मानने के लिए कतई तैयार नहीं था, कि भारत में पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता है।

क्या अमेरिकी ने दी भारत को जानकारी?
हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने अभी तक साफ नहीं किया है, कि क्या डोनाल्ड लू और उनकी टीम ने बाइडेन प्रशासन के इस फैसले के बारे में भारत को जानकारी दी थी या नहीं? क्योंकि, अमेरिका से इस महाविशालकाय पैकेज मिलने के बाद पाकिस्तानी एयरफोर्स काफी ज्यादा घातक हो जाएगी, जो पश्चिम और उत्तर-पश्चिम से भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। यानि, अमेरिका के इस फैसले को इस नजरिए से भी देखा जा सकता है, कि बाइडेन प्रशासन ने पाकिस्तानी वायुसेना की ताकत को काफी ज्यादा मजबूत कर दिया है, जिससे सीधे तौर पर भारत के लिए खतरा होता है, जबकि, चीन को लेकर अमेरिका भारत को अपना रणनीतिक पार्टनर बताता है।

क्या है एफ-16 प्रोग्राम?
पाकिस्तान को पहली बार रोनाल्ड रीगन प्रशासन से 1980 के दशक में भारत सरकार की भारी आपत्ति के बावजूद एफ-16 विमान पैकेज दिया था, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि विमान का इस्तेमाल भारतीय लक्ष्यों के खिलाफ नहीं किया जाएगा। भारतीय आपत्ति इस निष्कर्ष पर आधारित थी, कि पाकिस्तान एफ-16 को परमाणु हथियारों से लैस करेगा जो उसने गुप्त तरीके से हासिल किए थे। हालांकि राष्ट्रपति रीगन ने अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों और सीआईए के काउंटर प्रोलिफरेशन विंग के विरोध के बावजूद बिक्री को मंजूरी दे दी थी। 1990 में प्रेसलर संशोधन लागू होने के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को लगभग 30 F-16 विमानों की डिलीवरी रद्द कर दी थी। 1998 में भारत और पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किया था, जिसके बाद भारत ने एफ-16 विमानों को परमाणु हथियारों से लैस करने को लेकर अपनी चिंताओं को व्यक्त किया था।

अमेरिका का डबल गेम जानिए
अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ अपने राजनयिक संबंधों में सामरिक विमान को बार-बार एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया है। साल 2001 में न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर अलकायदा के हमले के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को नए F-16 विमानों की मरम्मत और आपूर्ति के लिए 3 अरब डॉलर का पैकेज जारी किया था। और पाकिस्तान ने उन विमानों का इस्तेमाल हमेशा से भारत के खिलाफ किया है। एफ-16 विमान की मार करने की क्षमता 2000 मील के करीब है और 2019 में भारत और पाकिस्तान के बीच जो टकराव हुआ था, उसमें भी पाकिस्तान ने एफ-16 विमान को भारत के खिलाफ उतार दिया था। साल 2015 में एक बार फिर ओबामा प्रशासन के समय में भारत की कड़ी आपत्तियों के बावजूद पाकस्तान को एफ-16 विमानों की डिलीवरी दी थी और तत्कालीन विदेश सचिव एस. जयशंकर ने अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा को तलब किया था और ओबामा प्रशासन के फैसले के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया था।












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