आंख मूंदकर यूक्रेन की मदद: अमेरिका ने लगभग खत्म कर लिए अपने गोला-बारूद का भंडार, बाइडेन ने US को खतरे में डाला
US Out Of Stocks Ammunication: पिछले हफ्ते संयुक्त राज्य अमेरिका ने यूक्रेन और ताइवान के लिए नए सैन्य सहायता पैकेज की घोषणा की है, लेकिन समान रूप से नहीं। इस फैसले से अमेरिकी रणनीतिक हलकों में इस बात पर बहस तेज हो गई है, कि क्या यूक्रेन को ज्यादा से ज्यादा सैन्य सहायता देुना, ताइवान की और खुद अमेरिका की सुरक्षा को खतरे में डालना तो नहीं है।
वाशिंगटन में बहस हो रही है, कि अमेरिका ना केवल ताइवान पर हमला करने के लिए चीन को आसान रास्ता मुहैया करवा रहा है, बल्कि अपनी रक्षा तैयारियों को भी कमजोर कर रहा है।

29 अगस्त को, बाइडेन प्रशासन ने यूक्रेन की सहायता के लिए, सैन्य मदद के अगले पैकेज की घोषणा की है, जिसमें "वायु रक्षा के लिए AIM-9M मिसाइलें, हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम के लिए युद्ध सामग्री, 155 मिमी और 105 मिमी तोपखाने गोला-बारूद, खदान-समाशोधन उपकरण" जैसी महत्वपूर्ण क्षमताएं शामिल हैं।
इसके अलावा यूक्रेन को, कवच-रोधी प्रणालियां और रॉकेट, 3 मिलियन से ज्यादा राउंड के छोटे हथियार, गोला-बारूद, एम्बुलेंस, विध्वंस युद्ध सामग्री, स्पेयर पार्ट्स समेत अन्य तरह के सैन्य मदद भेजने की घोषण बाइडेन ने ती है।
हथियारों और उपकरणों के इस पैकेज की कीमत 250 मिलियन डॉलर है। अमेरिका पहले ही यूक्रेन को 41 अरब डॉलर से ज्यादा का सैन्य सहायता यूक्रेन को भेज चुका है।
ताइवान को इग्नोर करता अमेरिका?
इसके विपरीत, 30 अगस्त को, राष्ट्रपति बाइडेन ने विदेशी सैन्य वित्तपोषण (एफएमएफ) कार्यक्रम के तहत ताइवान के लिए सिर्फ 80 मिलियन डॉलर की सैन्य सहायता को मंजूरी दी, जो आमतौर पर संप्रभु राज्यों के लिए उपयोग की जाती है।
बाइडेन प्रशासन की तरफ से कहा गया, कि "एफएमएफ का उपयोग संयुक्त रक्षा क्षमता और बढ़ी हुई समुद्री डोमेन जागरूकता और समुद्री सुरक्षा क्षमता के माध्यम से ताइवान की आत्मरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।"
आमतौर पर संप्रभु देशों के लिए बनाए गए कार्यक्रम के तहत ताइवान को अमेरिकी सैन्य उपकरणों का यह पहला ट्रांसफर है। आपको बता दें, कि अमेरिका ताइवान को एक स्वतंत्र देश नहीं मानता है, क्योंकि वह तथाकथित वन-चाइना सिद्धांत के प्रति प्रतिबद्ध है।
हालाँकि, पिछले साल पारित "ताइवान एन्हांस्ड रेजिलिएंस एक्ट" के तहत, अमेरिकी सरकार ने फैसला किया है, कि वो 2023 से 2027 तक ताइवान को सालाना 2 अरब डॉलर तक सैन्य खर्च कर देगा।
जहां तक अमेरिकी सैन्य सहायता का सवाल है, तो यूक्रेन और ताइवान के बीच बहुत बड़ा अंतर है। यूक्रेन युद्धरत है, जबकि ताइवान को युद्ध का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन विशेषज्ञों के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका और पूरी दुनिया की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए, चीन द्वारा ताइवान पर कोई भी युद्ध बहुत बड़ा खतरा है।
क्या ताइवान पर खतरे से निपटने के लिए अमेरिका के पास पर्याप्त हथियार हैं? सैन्य विश्लेषक इतने आश्वस्त नहीं हैं। उनका कहना है, कि यूक्रेन खुद तो बर्बाद हो ही रहा है, साथ ही वो अमेरिका को भी कमजोर कर रहा है।
अमेरिका को कैसे कमजोर कर रहा यूक्रेन
सीएनएन के एक हालिया जनमत सर्वेक्षण में कहा गया है, कि अधिकांश अमेरिकी (55%) कांग्रेस द्वारा रूस के साथ युद्ध में यूक्रेन का समर्थन करने के लिए अतिरिक्त फंडिंग को अधिकृत करने का विरोध कर रहे हैं। और 51% का कहना है, कि अमेरिका ने यूक्रेन की मदद के लिए पहले ही काफी कुछ किया है।
ऐसे निष्कर्ष आश्चर्यजनक नहीं हैं, क्योंकि अमेरिका पहले ही यूक्रेन को मानवीय, वित्तीय और सैन्य सहायता में 75 अरब डॉलर से ज्यादा की आपूर्ति कर चुका है, (इसमें सैन्य सहायता और मानवीय सहायता दोनों शामिल हैं) जो उसके सकल घरेलू उत्पाद का 0.33 प्रतिशत है। ऐसा कहा जाता है, कि जब अमेरिका खुद महंगाई और बेरोजगारी का सामना कर रहा है, तो यह कोई मामूली राशि नहीं है।
आपको बता दें, कि यूक्रेन की सहायता करने के लिए, राष्ट्रपति जो बाइडेन विदेशी सहायता अधिनियम (एफएए) की धारा 506 (ए) (1) के तहत सैन्य सहायता प्रदान करने के लिए, ड्रॉडाउन का निर्देश देने के लिए "प्रेसिडेंशियल ड्रॉडाउन अथॉरिटी" का उपयोग कर रहे हैं।
बाइडेन की यह अथॉरिटी, अप्रत्याशित आपात स्थितियों का जवाब देने के लिए, रक्षा विभाग के स्टॉक से विदेशी देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों तक रक्षा वस्तुओं और सेवाओं की त्वरित डिलीवरी की अनुमति देता है। बाइडेन के आदेश के बाद ये मदद कुछ ही घंटों में भेज दी जाती है।
यूक्रेन को समर्थन देने के लिए, अमेरिकी संसद ने वित्तीय वर्ष 2022 के लिए, इस ड्रॉडाउन अथॉरिटी की सीमा को 100 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर 11 अरब डॉलर कर दिया है। बाइडेन प्रशासन ने यूक्रेन को सैन्य सहायता प्रदान करने के लिए इस राष्ट्रपति ड्रॉडाउन अथॉरिटी का 43 बार उपयोग किया है।

अमेरिका का हथियार भंडार हो रहा खत्म
हालांकि, अब अध्ययनों से पता चला है, कि यूक्रेन को अमेरिकी सैन्य सहायता ने अमेरिकी शस्त्रागार को गंभीर रूप से खत्म कर दिया है। और पहले से ही तनावग्रस्त अमेरिकी रक्षा इंडस्ट्री, अब यूक्रेन युद्ध में लगातार हथियार भेजने की क्षमता बनाए नहीं रख सकता है। तो फिर, अमेरिकी हथियार कंपनियों के लिए, अमेरिकी भंडार को फिर से भरना, अब बहुत दूर की बात है।
पिछले साल सितंबर में, प्रतिष्ठित थिंक-टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) ने पाया, कि कुछ अमेरिकी इन्वेंट्री के पास अब न्यूनतम हथियार ही बचे हैं। और जरूरत के मुताबिक, इन्वेंट्री के भंडार को भरने में अब अमेरिका को कई साल लगेंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने यूक्रेन को, अपने स्टिंगर भंडार का लगभग एक तिहाई हिस्सा सौंप दिया है, जो कंधे से दागे जाने वाले 1,600 से ज्यादा एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम के बराबर है। लेकिन सीएसआईएस के अनुसार, स्टिंगर मिसाइलों की उत्पादन, लाइन जेवलिन की तुलना में खराब स्थिति में है, जिसे केवल थोड़ी मात्रा में विदेशी बिक्री के कारण खुला रखा गया है।
यहां तक कि रेथियॉन टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी ग्रेग हेस ने भी हाल ही में स्वीकार किया है, कि "युद्ध के पहले दस महीनों में, हमने अनिवार्य रूप से 13 साल के स्टिंगर उत्पादन और पांच साल के जेवलिन उत्पादन का उपयोग कर लिया है।" उन्होंने कहा, कि "तो सवाल यह है कि हम फिर से आपूर्ति कैसे करेंगे, भंडार को फिर से कैसे जमा करेंगे?"
एक अन्य स्टडी रिपोर्ट, (द यूक्रेन वेपन्स ड्रेन - द अमेरिकन कंजर्वेटिव) का कहना है, कि "अमेरिकी सेना मासिक रूप से लगभग 14,000, 155 मिमी गोले बनाती है। यानि, एक साल में सिर्फ 168,000 गोले बनाए जाते हैं हैं। अब अमेरिका के पास कुल भंडार का पांचवां हिस्सा ही बचा है।
यही वजह है, कि अमेरिका 2025 तक उस उत्पादन को चार गुना से ज्यादा, 20,000 से 90,000 गोले प्रति महीने तक उत्पादन बढ़ाना चाहता है, लेकिन इसमें कई तरह की दिक्कते हैं।
लिहाजा, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि यूक्रेन की मदद करते अमेरिका अब खुद इतना कमजोर हो रहा है, कि आने वाले वक्त में अगर चीन, ताइवान पर हमला करता है, तो फिर अमेरिका के पास इतने हथियार नहीं होंगे, कि वो ताइवान की मदद कर सके।












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