इराक-सीरिया में गलत एयरस्ट्राइक कर हजारों नागरिकों को मारा, विनाश के लिए अमेरिका को कौन सजा देगा?
पेंटागन की गोपनीय दस्तावेजों के हवाले से रिपोर्ट को न्यूयॉर्क टाइम्स ने जारी किया है, जिसमें शीर्ष अमेरिकी सैन्य अधिकारियों की नाकामयाबी का हवाला दिया गया है, जिनकी वजह से हजारों आम नागरिक मारे गये।
वॉशिंगटन, दिसंबर 20: पेंटागन की ताजा रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि, इराक में अमेरिकी एयरस्ट्राइक में हजारों बेगुनाह मारे गये हैं, लेकिन, कभी भी किसी भी अमेरिकी अधिकारी को नरसंहार के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने पेंटागन की इस रिपोर्ट को सार्वजनिक कर खलबली मचा दी है, जिसमें दर्ज है कि, इराक और अफगानिस्तान में आतंकवादियों को मारने के नाम पर अमेरिका ने कितने बेगुनाह आम इंसानों को उड़ाया है, जिनमें सैकड़ों बच्चे शामिल हैं, लेकिन अमेरिका के गुनाह के लिए जवाब मांगने वाला कोई नहीं है। (सभी तस्वीर-फाइल)

हजारों बेगुनाहों को एयरस्ट्राइक में उड़ाया
पेंटागन की गोपनीय दस्तावेजों के हवाले से रिपोर्ट को न्यूयॉर्क टाइम्स ने जारी किया है, जिसमें शीर्ष अमेरिकी सैन्य अधिकारियों की नाकामयाबी का हवाला दिया गया है, जिनकी वजह से हजारों आम नागरिक मारे गये हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने शनिवार को रिपोर्ट दी है कि, गोपनीय दस्तावेजों की एक हिस्से में दर्ज है कि, अमेरिका ने कम से कम 1300 से ज्यादा गलत एयरस्ट्राइक किए हैं, जिनमें हजारों आम नागरिक मारे गये हैं। रिपोर्ट के मुताबित, अमेरिकी अधिकारियों ने दहशतगर्दों को निशाना बनाकर बम दागे थे, लेकिन उन बमों के निशाने पर आम नागरिक आए। इसके साथ ही, रिपोर्ट में ये भी कहा है कि, टारगेट पर कितने लोग हैं, इसका अंदाजा लगाए बगैर ही बम दागे गये हैं, जिनकी वजह से भारी संख्या में बेगुनाह लोग मारे गये। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने कितने बेगुनाहों को बम से उड़ाया है, इस आंकड़े को भी कम करके दर्ज किया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स का सनसनीखेज दावा
अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया है, उसने पेंटागन की एक सीक्रेट रिपोर्ट के आधार पर उन 100 से ज्यादा जगहों का दौरा किया है, जहां पर अमेरिकी अधिकारियों ने एयरस्ट्राइक किा था। इसके अलावा उन बम हमलों में बचे हुए लोगों और वर्तमान और रिटायर्ट अमेरिकी अधिकारियों से बात की है और इसके आधार पर रिपोर्ट तैयार किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क टाइम्स ने 'फ्रीडम ऑफ इनफॉर्मेशन' रिक्वेस्ट के आधार पर मार्च 2017 से तमाम दस्तावेजों को पेंटागन से निकालना शुरू किया और इन दस्तावेजों में लिखा गया है कि, किस तरह से अमेरिकी सैन्य अधिकारियों 'गलत खुफिया जानकारियों' के आधार पर एयरस्ट्राइक किए और हजारों बेगुनाहों को मौत के घाट उतार दिए।

किसी की कोई जवाबदेही नहीं
न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा है कि, सबसे हैरानी इस बात को लेकर है कि, हजारों बेगुनाहों को मारने के बाद भी एक भी ऐसा पन्ना, दस्तावेज या सबूत इस बात के नहीं मिले, जिनमें लिखा हो कि, किसी अधिकारी की जवाबदेही तय की गई हो। अमेरिकी अखबार के मुताबिक, एक भी अमेरिकी अधिकारी के खिलाफ किसी भी तरह का एक्शन लेने को लेकर रिकॉर्ड नहीं है। अमेरिकी अखबार ने अमेरिकी अधिकारियों के इस 'नरसंहार' को लेकर दो पार्ट में रिपोर्ट तैयार किया है, जिसका पहला हिस्सा पब्लिश किया गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खराब और अपर्याप्त जानकारियों के आधार पर अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने घातक ऑपरेशंस को अंजाम दिए, जिससे बेगनुाह नागरिक मारे गये।

हजारों बेगुनाह लोगों को उड़ाया
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में तीन बड़े मामलों का जिक्र किया गया है। जिसके तहत 19 जुलाई 2016 को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने इस्लामिक स्टेट के तीन क्षेत्रों पर बड़े हमले करने का दावा किया था। अमेरिका की तरफ से दावा किया कि, उसके हमले में उत्तर सीरिया में इस्लामिक स्टेट समूह के 85 आतंकवादी मारे गये हैं। जबकि, न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, अमेरिकी हमले में 120 लोगों की मौत हुई थी, ग्रामीण और किसान थे। उनका इस्लामिक स्टेट के लोगों से कोई लेना देना नहीं था। वहीं, नवंबर 2015 में एक इराकी शख्स को एक भारी 'वस्तु' को घसीटते देखा गया था और न्यूयॉर्क टाइम्स की पड़ताल में पता चला है कि, वो भारी वस्तु असल में एक बच्चा था, जिसकी अमेरिकी एयरस्ट्राइक में मौत हो गई थी। अमेरिकी एयरस्ट्राइक पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन हाल ही में काबुल में एक गाड़ी को उड़ाने के बाद ये साफ हो गया था, कि अमेरिकी फौजी गलत एयरस्ट्राइक कर रहे हैं। काबुल में एयरस्ट्राइक में एक परिवार के 10 सदस्यों को उड़ा दिया गया था।

जो बचे, उनकी जिंदगी है जहन्नुम
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, हजारों बेगुनाह तो मारे गये, लेकिन एयरस्ट्राइक में जो बचे हैं, उनकी जिंदगी पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है और वो किसी लायक नहीं बचे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एयरस्ट्राइक में बचे ज्यादातर बेगुनाह नागरिक अब विकलांग हैं और उनके शरीर का कोई ना कोई हिस्सा उड़ चुका है। ऐसे लोगों को महंगे इलाक की आवश्यकता थी, जो उन्हें नहीं मिली। वहीं, जब न्यूयॉर्क टाइम्स ने यूएस सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन बिल अर्बन से इस बाबत सवाल पूछा, तो उन्होंने बताया कि, 'दुनिया में सबसे अच्छी तकनीक के साथ भी गलतियां होती हैं, चाहे वह अधूरी जानकारी पर आधारित हो या उपलब्ध जानकारी की गलत व्याख्या पर आधारित हो। और हम उन गलतियों से सीखने की कोशिश करते हैं।

''बेगुनाहों के मरने पर हमें खेद''
यूएस सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन बिल अर्बन ने कहा कि, 'हम इस तरह के नुकसान से बचने के लिए लगन से काम करते हैं। हम प्रत्येक विश्वसनीय उदाहरण की जांच करते हैं। और हमें निर्दोष जीवन के हर नुकसान का खेद है।' उन्होंने नागरिकों को नुकसान के जोखिम को कम करने को 'एक रणनीतिक आवश्यकता के साथ-साथ एक कानूनी और नैतिक अनिवार्यता' के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि, इन घटनाओं का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ घृणा फैलाने के लिए किया जाता है और उसी वजह से '9/11' जैसी घटनाएं होती हैं। उन्होंने कहा कि, सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि इन घटनाओं के आधार पर वैचारिक घृणा फैलाया जाता है और एक नई पीढ़ी को हिंसक बनाने की कोशिश की जाती है।

ओबामा शासन में सबसे ज्यादा एयरस्ट्राइक
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि, मध्य-पूर्व में राष्ट्रपति ओबामा के शासनकाल में सबसे ज्यादा एयरस्ट्राइक किए गये। खासकर ओबामा शासनकाल के अंतिम वर्षों में काफी ज्यादा एयरस्ट्राइक किए गये। जिन्हें देखते हुए ऐसा लग रहा है कि, जमीन पर लड़ाई के लिए अमेरिका को स्थानीय लोगों का समर्थन मिलना बंद हो गया था। वहीं, उस वक्त राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमेरिकी ड्रोन हमलों का बचाव करते हुए कहा था कि, ''ड्रोन हमले इतिहास में सबसे सटीक हमलों का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें सबसे कम नागरिकों की मौत होती है''। पेंटागन ने कहा कि, नई तकनीक ने दुश्मन के लड़ाकों से भरे घर के एक हिस्से को नष्ट करना संभव बना दिया है, जबकि बाकी का ढांचा वैसे ही खड़ा रहता है।

इराक-सीरिया में 50 हजार हमले
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ओबामा शासनकाल के दौरान सिर्फ पांच सालों में अमेरिकी सैनिकों ने अफगानिस्तान, इराक और सीरिया में 50 हजार से ज्यादा हवाई हमलों को अंजाम दिया, लेकिन इन हमलों की सटीकता काफी कम थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि, हवाई हमले शुरू करने से पहले सेना को नागरिकों की मौत का अनुमान लगाना चाहिए था और आम नागरिकों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए था। हालांकि, सैन्य अधिकारियों का कहना है कि, खुफिया जानकारियों को गुमराह किया गया, जिनकी वजह से विनाशकारी गलतियां हुईं। उदाहरण के तौर पर न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा कि, अगर एक इमारत को एयरस्ट्राइक में उड़ा दिया गया है, तो ऊपर से पता नहीं चलता है, कि इमारत में कितने लोग मौजूद थे और उनमें कितने बेगुनाह लोग मार दिए गये हैं।
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