F-22, F-35, F-16, F-15.. चीन की नाक के नीचे अमेरिकी लड़ाकू विमानों का रेला, एलिफेंट वाक का मतलब समझिए
US Air Force: अमेरिका की वायुसेना और नौसेना ने चीन को उसके ही घर के पास तगड़ी चुनौती देते हुए तमाम विध्वंसक लड़ाकू विमानों को मैदान में उतार दिया है। अमेरिका की शक्ति प्रदर्शन का मकसद साफ तौर पर चीन को सावधान करना है, कि चाहे दक्षिण चीन सागर हो या फिर पूर्वी चीन सागर, वो अपने आप को एकमात्र बलशाली ना समझे।
अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने जापान के ओकिनावा प्रान्त में कडेना एयर बेस पर शानदार शक्ति प्रदर्शन किया है, जिससे दक्षिण चीन सागर में तनाव और भी ज्यादा बढ़ गया है। अमेरिकी लड़ाकू विमानों की इस शक्ति प्रदर्शन को 'elephant walk' यानि, 'हाथियों की चाल' नाम दिया गया था।

इस दौरान अमेरिका के ये दुर्जेय लड़ाकू विमानों ने एक के बाद एक अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया जो "एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र" को सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
अमेरिका का शक्ति प्रदर्शन
'हाथियों की सैर' नाम का ये कार्यक्रम, अमेरिकी वायु सेना और नौसेना की ताकत और तैयारियों के एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में कार्य करती है, जिसका लक्ष्य किसी भी परिस्थिति में तेजी से लड़ाकू विमान के एक सीरिज को तेजी से तैनात करना, जिसमें अमेरिका की वायुसेना के साथ नौसेना भी शामिल हो।
अमेरिकी वायु सेना ने 11 अप्रैल को "Raptors and Vipers join the flock" नाम के एक शीर्षक से एक प्रेस रिलीज में इस भव्य शक्ति प्रदर्शन की घोषणा की।
इस दौरान दुनिया के सबसे खतरनाक मिशनों में शामिल हो चुके लड़ाकू विमानों को उतारा गया था। इस लाइनअप में F-15C, F-16C, F-22A, F-35A, MQ-9, HH-60G/W, MC-130J, KC-135, P-8, RC-135 और E-3 लड़ाकू विमान शामिल हैं। यह किसी भी हवाई युद्ध मिशन को शुरू करने के लिए अमेरिकी सेना की तत्परता और क्षमता का प्रतीक है। इसका सीधा संदेश चीन को है, जो इस क्षेत्र में लगातार खतरे बढ़ा रहा है।
US एयरफोर्स का 'एलिफेंट वॉक'
इन एडवांस लड़ाकू विमानों का जुटान उस वक्त हुआ है, जब रोटेशनल यूनिट की घोषणा की गई है। और इसके तहत कडेना एयर बेस पर एफ-16सी और एफ-22ए तैनात किए गये हैं। जो बताता है, कि कडेना एयर बेस रणनीतिक तौर पर कितना ज्यादा महत्वपूर्ण है। ये एयरबेस इस पूरे क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अमेरिकी एयरबेस के तौर पर काम करता है।
नये लड़ाकू विमानों के आगमन के बीच, अमेरिका ने अपने F-35As और एयर नेशनल गार्ड F-15C को भी अलविदा कह दिया है। क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा करने वाले ये विमान अब नई क्षमताओं और रोटेशन के लिए रास्ता बना रहे हैं।
'हाथी की चाल' के बाद, वायुसैनिक दल ने तुरंत जापान की रक्षा के लिए अपनी तत्परता बढ़ाने के उद्देश्य से एक बड़ी ताकत वाला अभ्यास शुरू किया। इस तरह के अभ्यास यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, कि सैन्यकर्मी किसी भी संभावित खतरे या आकस्मिक स्थिति का प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए तैयार हैं।
प्रशांत महासागर का कीस्टोन
कडेना एयर बेस ताइवान स्ट्रेट की बिना ईंधन वाली सीमा के भीतर एकमात्र प्रमुख अमेरिकी एयर बेस के रूप में एक रणनीतिक महत्व रखता है। क्योंकि, भौगोलिक तौर पर ताइवान पर अचानक आक्रमण होने पर, चीन की लंबी दूरी की मिसाइलों की जद में ये आ जाता है। लिहाजा, कडेना एयर बेस का सर्विलांस काफी तगड़ा होता है और अमेरिका, यहां से चीन को काफी आसानी से अपनी रडार पर ले सकता है।
कडेना एयर बेस ने हाल ही में 28 मार्च को दो F-22 रैप्टर स्क्वाड्रन - 199वें और 99वें फाइटर स्क्वाड्रन - का स्वागत किया, जिससे बेस की पांचवीं पीढ़ी की वायुशक्ति क्षमताओं को बढ़ावा मिला है।
ये स्क्वाड्रन कडेना में पहले से ही तैनात अन्य लड़ाकू विमानों में शामिल हो गए हैं, जिससे कुल 100 से ज्यादा विमान वहां तैनात हो गये हैं। यह विविध बेड़ा कई प्रकार के कार्य करता है, जो क्षेत्र में हवाई संचालन के लिए रणनीतिक केंद्र के रूप में कडेना के महत्व को उजागर करता है।
इसके अलावा, F-16CM फाइटिंग फाल्कन्स, F-35A लाइटनिंग II, F-15Cs और F-15E स्ट्राइक ईगल्स सहित विभिन्न लड़ाकू स्क्वाड्रनों ने हाल के दिनों में कडेना की उड़ान लाइन से परिचालन शुरू कर दिया है।
हालांकि, अभी तक ओकिनावा में नए स्थायी लड़ाकू विमानों की उपस्थिति के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कडेना में कम संख्या में एडवांस F-15EX लड़ाकू विमानों की योजना का सुझाव देने वाली रिपोर्टें सामने आई हैं।
अमेरिकी वायु सेना ने कहा है, कि रक्षा विभाग ने पहले से वहां तैनात 44वें और 67वें लड़ाकू स्क्वाड्रनों के चरणबद्ध-आउट एफ-15सी/डीएस की भरपाई के लिए नए और ज्यादा एडवांस विमानों को तैनात करना जारी रखेगी।
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