अमेरिका में गर्भपात की गोली पर दो राज्यों के कोर्ट के अलग अलग फैसले, छिड़ी बहस, जानिए आगे क्या होगा?
अमेरिका में गर्भपात पर ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी और बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी के अलग अलग विचार हैं। टेक्सास कोर्ट के जज की नियुक्ति डोनाल्ड ट्रंप ने, तो वॉशिंगटन कोर्ट के जज कि नियुक्ति ओबामा ने की थी।

US Abortion Pill Ruling: अमेरिका की दो अदालतों ने गर्भपात में इस्तेमाल की जाने वाली मिफेप्रिस्टोन को लेकर दो अलग अलग फैसले सुनाए हैं, जिसके बाद बहस छिड़ गई है, कि आखिर किस कोर्ट के फैसले को माना जाए?
टेक्सास के जज, जिनकी नियुक्ति ट्रंप के शासनकाल में हुई थी, उन्होंने गर्भपात के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा मिफेप्रिस्टोन के इस्तेमाल की मंजूरी देने के एफडीए (फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) के फैसले पर होल्ड ऑर्डर दे दिया। यानि, मिफेप्रिस्टोन दवा की बिक्री की मंजूरी देने के फैसले को रोक दिया है।
लेकिन, टेक्सास कोर्ट के फैसले के ठीक एक घंटे के बाद ओबामा प्रशासन के दौरान चुने गये वॉशिंगटन कोर्ट के जज ने आदेश सुनाया, कि मिफेप्रिस्टोन दवा की पहुंच अमेरिका के 17 राज्या में होने दी जाए।
अमेरिका में पिछले 20 सालों से मिफेप्रिस्टोन दवा का इस्तेमाल गर्भपात कराने के लिए किया जाता है। लेकिन, अब दो कोर्ट के अलग अलग फैसलों के बाद संभावना है, कि ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा।
टेक्सास कोर्ट ने 67 पन्नों का एक जजमेंट जारी किया है, जिसमें जज मैथ्यू काक्समरीक ने मिफेप्रिस्टोन दवा की मंजूरी के एफडीए के फैसले पर रोक लगा दिया है। हालांकि, ये फैसला अगले 7 दिनों तक लागू नहीं होगा, और इन सात दिनों में सरकार कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील कर सकती है।
अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने शुक्रवार रात पुष्टि की है, कि वह टेक्सास कोर्ट के फैसले को चुनौती देगा।
जस्टिस डिपार्टमेंट ने कहा है, कि "न्यायाधीश काक्समरीक का फैसला, अमेरिका में लाखों महिलाओं के लिए दवा की पहुंच को सीमित कर सकता है"। कानूनी विश्लेषकों ने कहा, कि कोर्ट के इस फैसले ने अमेरिका की दवा प्रणाली की बुनियाद को ही हिलाकर रख दिया है।
अमेरिका में अबॉर्शन पिल पर बड़ी बहस
टेक्सास कोर्ट ने गर्भपात की गोली पर फैसला उस वक्त सुनाया है, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए गर्भपात के लिए संवैधानिक सुरक्षा को हटा दिया था और अमेरिका में गर्भपात को कानूनी जुर्म ठहराया गया था।
सु्प्रीम कोर्ट के फैसके ले बाद अमेरिका के कई राज्यों में गर्भपात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। खासकर, रिपब्लिकन शासित प्रदेशों में फैसले को फौरन लागू कर दिया गया था।

टेक्सास कोर्ट ने फैसले में क्या कहा है?
टेक्सास कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, कि फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की अबॉर्शन पिल की मंजूरी ने संघीय नियमों का उल्लंघन किया है, जो कुछ दवाओं के त्वरित अनुमोदन की अनुमति देता है। 2000 में स्वीकृत होने से पहले एफडीए ने मिफेप्रिस्टोन की समीक्षा में चार साल बिताए।
न्यायाधीश ने यह भी कहा, कि एफडीए मिफेप्रिस्टोन और उसके सुरक्षा रिकॉर्ड के "मनोवैज्ञानिक प्रभावों" पर विचार करने में नाकाम रहा है।
एफडीए की "नाकामी को अनदेखा या कम नहीं किया जाना चाहिए।" हालांकि, FDA, अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट (ACOG) और अन्य मुख्यधारा वाले मेडिकल संगठनों का कहना है, कि मिफेप्रिस्टोन उपयोग के लिए सुरक्षित है।

आपको बता दें, कि अमेरिका के नियमों के मुताबिक, अमेरिका की राज्य सरकारें उस दवा को अपने राज्य में प्रतिबंधित नहीं कर सकती हैं, जिन्हें एफडीए पहले ही मान्यता दे चुका है। 2014 में मेसाचुएट्स राज्य में एफडीए अनुमोदित एक दवा पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसे कोर्ट ने रद्द कर दिया था।
आपको बता दें, कि रिपब्लिकन पार्टी गर्भपात के खिलाफ है। रिपब्लिकन पार्टी का कहना है, कि गर्भवती महिलाओं को अपना बच्चा गिराने करा अधिकार नहीं होना चाहिए, क्योंकि ये किसी अजन्मे बच्चे की हत्या है।
जबकि, अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी, जिसके राष्ट्रपति जो बाइडेन हैं, उसका कहना है कि गर्भपात का अधिकार महिलाओं के पास होना चाहिए। महिलाओं को तय करने का अधिकार होना चाहिए, कि वो किसी बच्चे को जन्म देना चाहती है या नहीं।
अमेरिका का समाज भी गर्भपात कानून पर बंटा हुआ है। हालांकि, अमेरिकन सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात को गैर कानूनी ठहराया और अपने ही दशकों पहले को बदल दिया है। अमेरिका में एक साल पहले तक गर्भपात करना सजा के दायरे में नहीं था, जो अब सजा के दायरे में आ गया है।
आपको बता दें, कि भारत में भी गर्भपात कराना कानूनन जुर्म हैं, हालांकि कुछ मामलों में कोर्ट के फैसले के बाद गर्भपात की इजाजत दी गई है।

टेक्सास कोर्ट बनाम वॉशिंगटन कोर्ट
वहीं, एलायंस डिफेंडिंग फ्रीडम, जो एक कंजर्वेटिव ईसाई कानूनी वकालत समूह है, जो जिसने टेक्सास अदालत में एक पक्षकार की भूमिका निभाई है, उसने टेक्सास कोर्ट के फैसले को महिलाओं और डॉक्टरों के लिए "एक महत्वपूर्ण जीत" कहा है।
वहीं, एक अन्य गर्भपात विरोधी समूह मार्च फॉर लाइफ की अध्यक्ष जीन मैनसिनी ने इसे "महिलाओं और लड़कियों के लिए एक बड़ा कदम" बताया है।
लेकिन टेक्सास के फैसले के एक घंटे बाद, यह वाशिंगटन राज्य के कोर्ट ने 31 पन्नों का एक फैसला सुना दिया और एफडीए को बाजार में दवा की सप्लाई जारी रखने का आदेश दे दिया।
वाशिंगटन के अटॉर्नी जनरल बॉब फर्ग्यूसन ने इस फैसले को शासन की "विशाल जीत" कहा।
वहीं, मैसाचुसेट्स डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वारेन ने टेक्सास कोर्ट के फैसले की निंदा करते हुए ट्वीट किया, कि "हम एक दक्षिणपंथी चरमपंथी शासन को, महिलाओं, डॉक्टरों और वैज्ञानिकों पर हावी नहीं होने दे सकते।"

मिफेप्रिस्टोन दवा क्या है?
आपको बता दें, कि मिफेप्रिस्टोन दवा दो अलग अलग बार में इस्तेमाल में लाया जाता है। पहली खुराक में ये दवा गर्भपात कराता है और गर्भवास्था को खत्म करता है। जबकि दूसरी दवा, मिसोप्रोस्टोल, गर्भाशय को साफ करती है।
इसे पहली बार सात सप्ताह के गर्भ तक गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए अनुमोदित किया गया था।
वहीं, 2016 में एफडीए ने कहा, कि गर्भावस्था के 10 हफ्तों तक इसे इस्तेमाल किया जा सकता है।
मिफेप्रिस्टोन का उपयोग उन महिलाओं के इलाज के लिए भी किया जाता है, जो गर्भपात और हार्मोन से संबंधित स्थिति कुशिंग सिंड्रोम से पीड़ित हैं।
पिछले हफ्ते, वाशिंगटन राज्य के डेमोक्रेटिक गवर्नर ने घोषणा की थी, कि मिफेप्रिस्टोन की तीन साल की आपूर्ति को देश भर में अनुपलब्ध होने की स्थिति में राज्य के अधिकारियों द्वारा स्टॉक किया गया है।
कुछ दिनों बाद पड़ोसी इडाहो राज्य के रिपब्लिकन गवर्नर ने "गर्भपात तस्करी" को अवैध बनाने वाले एक नए कानून पर हस्ताक्षर किए। ये कानून वयस्क लड़कियों के लिए भी, माता-पिता की सहमति के बिना गर्भपात कराना अपराध की श्रेणी में रखता है।
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