US President Election: कमला हैरिस या डोनाल्ड ट्रंप? US में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के मुसलमान किसे वोट देंगे?
US President Election 2024: अमेरिका में 5 नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले उथल-पुथल तेज है और उम्र को लेकर मचे विवाद के बाद जो बाइडेन ने यूएस इलेक्शन रेस से अपना नाम वापस ले लिया है, और उन्होंने कमला हैरिस को अपना समर्थन दे दिया है।
माना जा रहा है, कि कमला हैरिस ही डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से अगले महीने होने वाले डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन में आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति पद के लिए टिकट हासिल करेंगी। कमला हैरिस ने 36 घंटे से भी कम वक्त में डेमोक्रेटिक डेलिगेट्स के जरूरी से ज्यादा समर्थन हासिल कर लिए हैं।

लिहाजा, माना जा रहा है, कि 5 नवंबर को होने वाला चुनाव कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप के बीच होगा।
यूएस इलेक्शन में दक्षिण एशियाई मूल के मतदाता काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और पूरी दुनिया के साथ साथ यूएस इलेक्शन पर दक्षिण एशिया की भी नजर है। ऐसे में जानना दिलचस्प हो जाता है, कि पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम मतदाता इस बार डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस में से किसे वोट देने की सोच रहे हैं।
कमला हैरिस या डोनाल्ड ट्रंप?
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में जो बाइडेन को वोट देने वाले पाकिस्तानी मूल के जिब्रान सैयद ने कहा, "मैं हमेशा से डेमोक्रेट रहा हूं, लेकिन अब नहीं।" जब उनसे पूछा गया, कि उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी को वोट देने का फैसला क्यों किया है, तो उन्होंने बताया, कि "LGBTQ मुद्दों पर भारी भरकम खर्च, अक्षम नेतृत्व और अवैध आव्रजन पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च किया गया।"
उन्होंने कहा, कि "मैं गाजा का जिक्र भी नहीं करूंगा, क्योंकि दोनों पार्टियां उस मुद्दे पर एक ही जैसा रूख रखते हैं।" जिब्रान सैयद, वर्जीनिया में पाकिस्तानी और मुस्लिम वोटों के महत्व पर जोर देने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे, जो एक महत्वपूर्ण स्विंग स्टेट है।

वर्जीनिया में आयोजित इस बैठक में पाकिस्तानी मूल के मुसलमानों ने आगामी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को वोट देने का संकल्प लिया है, जो काफी आश्चर्यजनक है।
इस कार्यक्रम के आयोजक मंसूर कुरैशी ने कहा, कि "उत्तरी वर्जीनिया में 350,000 से ज्याद रजिस्टर्ड मुस्लिम मतदाता हैं, जिनमें से ज्यादातर पाकिस्तानी हैं। और यदि वे सभी मतदान करने के लिए बाहर निकलते हैं, तो वे एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति बन जाएंगे।"
रुबीना वाधवा, जो 2018 से लगातार डोनाल्ड ट्रम्प के लिए मतदान करती आ रही हैं, उन्होंने कम मतदान के लिए एक विशिष्ट जनसांख्यिकी को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा, 'पाकिस्तानी और मुस्लिम महिलाएं मतदान नहीं करती हैं।' हालांकि, वह आशावादी बनी हुई हैं, और उनका मानना है, कि "यदि पाकिस्तानी और मुस्लिम महिलाएं अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग करती हैं, तो वे संयुक्त राज्य में अपने समुदायों के प्रभाव को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकती हैं।"
इस कार्यक्रम में रिपब्लिकन पार्टी के जुआन पाब्लो सेगुरा, जो वर्जीनिया राज्य के वर्तमान व्यापार और वाणिज्य के मुख्य उप सचिव हैं, वो शामिल हुए थे, जिन्होंने अप्रवासी समुदायों के सामने आने वाले मुद्दों को संबोधित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने पाकिस्तानी समुदाय को उनकी उपलब्धता और उनके लाभ के लिए सहयोग करने की इच्छा का आश्वासन दिया।

वर्जीनिया निभाएगा राष्ट्रपति चुनाव में अहम भूमिका
वर्जीनिया के गवर्नर ग्लेन यंगकिन रिपब्लिकन नेता हैं और पार्टी हाउस ऑफ डेलिगेट्स को भी नियंत्रित करती है, जबकि डेमोक्रेट्स के पास सीनेट में मामूली बहुमत है।
नवंबर के चुनावों में यह संतुलन बदल सकता है, जो इलेक्टोरल कॉलेज सिस्टम के कारण राष्ट्रपति पद की रेस को भी प्रभावित कर सकता है। इलेक्टोरल कॉलेज में कुल 538 वोट उपलब्ध हैं और राष्ट्रपति पद जीतने के लिए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को कम से कम 270 इलेक्टोरल वोटों का बहुमत प्राप्त करना चाहिए।
सेगुरा ने पाकिस्तान अमेरिकी समुदाय के नेताओं से बातचीत की, उनकी चिंताओं को सुना और संभावित समाधानों पर चर्चा की। उन्होंने एकता और "चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के महत्व पर जोर दिया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनकी आवाज सुनी जाए और उनकी जरूरतें पूरी हों।"
वहीं, डेमोक्रेट पार्टी की नुजैरा आजम ने इस कार्यक्रम में भाग लिया था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गाजा में हाल ही में हुई त्रासदी मुस्लिम मतदाताओं को कैसे प्रभावित कर सकती है। उन्होंने देखा, कि 2018 में बाइडेन को वोट देने वाले कई वोटर्स अब ट्रम्प की ओर झुक रहे हैं और उन्होंने गाजा संघर्ष को एक प्रमुख फैक्टर बताया है।

वहीं, अमेरिका में रहने वाले ज्यादातर पाकिस्तानी मूल के मुसलमान इमरान खान के समर्थक भी हैं और इमरान खान ने लगातार बाइडेन प्रशासन पर अपनी सरकार को गिराने का आरोप लगाया है और इस फैक्टर का भी असर यूएस इलेक्शन में देखा जा रहा है। इमरान खान के समर्थक बाइडेन प्रशासन को उनकी बर्बादी के लिए जिम्मेदार मानते हैं और जब तक इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे, बाइडेन ने उन्हें एक बार भी फोन नहीं किया था, जिसका गुस्सा भी इमरान खान के समर्थकों में कहीं ना कहीं देखा जा रहा है।












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