उत्तर कोरिया पर नरम पड़ा अमेरिका, बिना शर्त बात को तैयार
नई दिल्ली। अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच लगातार धमकियों का दौर जारी रहा, एक तरफ जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया को खुली धमकी दी तो दूसरी तरफ उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने एक के बाद एक परमाणु हथियारों का परीक्षण करते हुए कई अमेरिका को खुली धमकी दी। लेकिन इन तमाम बयानोनं के बाद आखिरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर कुछ नरम होते नजर आ रहे हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री ने कहा है कि वह उत्तर कोरिया से परमाणु निरस्त्रीकरण मसले पर बिना किसी पूर्व शर्त के बात करने को तैयार हैं।

नरम पड़ा रुख
अमेरिका के विदेश मंत्री रैक्स टिलर्सन ने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद को कूटनीतिक तरीकों से सुलझाया जा सकता है। उन्होंने इस बात का भरोसा जताया है कि बातचीत से इस विवाद का हल निकाला जा सकता है। वाशिंगटन के अटलांटिस काउंसिल फोरम में बैठक के दौरान उन्होंने उत्तर कोरिया के लिए नरम रुख दिखाते हुए कहा कि हम पहली बैठक बिना किसी शर्त के करने के लिए तैयार हैं, हम लोगों को मिलना चाहिए और इस बात पर चर्चा करनी चाहिए कि बातचीत कैसे होगी।

विदेश मंत्री और व्हाइट हाउस के रुख अलग
इससे पहले अमेरिका के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा था कि किम जोंग प्रशासन हथियार छोड़ने पर विचार कर सकता है वह खुद आगे आकर इसकी पेशकश कर सकता है। जिस तरह से टिलर्सन ने यह बयान दिया है उसके बाद ऐसा लगता है कि उत्तर कोरिया को लेकर अमेरिका की नीति में कुछ बदलाव आया है। इससे पहले टिलर्सन ने कहा था कि हम तबतक उत्तर कोरिया से बात नहीं करेंगे जबतक वह हमारे पक्ष में चर्चा के लिए तैयार नहीं होता है। लेकिन अब उन्होंने उत्तर कोरिया के राजनयिक से कहा है कि वह बिना किसी पूर्व शर्त के बातचीत के लिए तैयार हैं। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ जहां टिलर्सन बिना शर्त बात करने की बात कह रहे हैं तो दूसरी तरफ व्हाइट हाउस का कहना है कि उनके नजरिए में उत्तर कोरिया को लेकर कोई बदलाव नहीं आया है।

उत्तर कोरिया ने दी थी खुली धमकी
हाल ही में उत्तर कोरिया ने अमेरिका व दक्षिण कोरिया को परमाणु युद्ध की खुली धमकी दी थी। जिस तरह से दक्षिण कोरिया और अमेरिका कोरियाई प्रायद्वीप में संयुक्त युद्धअभ्यास कर रहे हैं उसपर उत्तर कोरिया भड़क गया और उसने युद्ध की धमकी दे डाली थी। उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अब यह प्रश्न नहीं है कि इस क्षेत्र में परमाणु युद्ध होगा या नहीं बल्कि अब सवाल यह है कि युद्ध कब होगा।
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