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UAE में तेल की कीमत पर छापी गई तहलका मचाने वाली रिपोर्ट, अखबार बंद, जानिए क्या थी रिपोर्ट?

ये अखबार पूरी तरह से यूएई सरकार के आधिकारिक लाइन पर ही चलती है, लेकिन इसकी खासियत बिजनेस की खबरों को गहराई से प्रकाशित करने की रही है।

अबू धाबी, सितंबर 14: जर्नलिस्ट ने कई बार पढ़कर तेल पर बनाई गई अपनी स्टोरी को फाइनल किया, उस स्टोरी को संपादक ने ओके किया और फिर संयुक्त अरब अमीरात के सख्त जर्नलिस्ट कानून के तहत स्टोरी को पब्लिश कर दिया गया। लेकिन, अखबार की इस स्टोरी ने पूरे देश में खलबली मचा दी और फिर आग की लपटें अखबार के दफ्तर पहुंची, जिसने अखबार पर ताला लगा दिया गया।

अल रोया अखबार को किया गया बंद

अल रोया अखबार को किया गया बंद

रिपोर्ट के मुताबिक, तेल की कीमतों पर इस स्टोरी को अल रोया नाम के एक अखबार ने प्रकाशित किया था, लेकिन स्टोरी प्रकाशित होने के फौरन बाद ही तमाम संपादकों से सख्त पूछताछ शुरू तक दी गई और एक हफ्ते के भीतर की पहले दर्जनों पत्रकारों को अखबार से बाहर कर दिया गया और फिर अखबार को ही बंद कर दिया गया। अखबार के प्रकाशक, अबू धाबी स्थित इंटरनेशनल मीडिया इन्वेस्टमेंट्स (आईएमआई) ने कहा कि, सीएनएन के साथ मिलकर एक नया बिजनेस चैनल लॉन्च किया जाएगा।' हालांकि, कंपनी की तरफ से अपने अखबार के बंद पर कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि, आठ ऐसे लोग, जो इस घटना से पूरी तरह संबंध रखते हैं और जिन्हें प्रत्यक्ष जानकारी है, कि आखिर क्यों सभी लोगों को अखबार की नौकरी से निकाला गया है, उन्होंने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि, तमाम लोगों की नौकरी यूएई में गैस की कीमतों पर पब्लिश की गई एक स्टोरी के तत्काल बाद की गई है।

अखबारों के पास आजादी नहीं

अखबारों के पास आजादी नहीं

वहीं, घटना के बारे में एसोसिएटेड प्रेस को पूरी जानकारी देने वाले इन लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है, क्योंकि इनके खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है, क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात में प्रेस की आजादी या फिर फ्रीडम ऑफ स्पीच जैसी कोई चीज नहीं है और यूएई सरकार मीडिया को कंट्रोल करती है। वहीं, स्थानीय आउटलेट्स पर पत्रकारों के बीच स्व-सेंसरशिप व्याप्त है, जिनका काम यूएई के बारे में सिर्फ अच्छी खबरें ही प्रकाशित करना होता है और स्थानीय अखबारों में एक भी निगेटिव खबर नहीं छापी जाती है। वहीं, सरकार की तरफ से पश्चिमी मीडिया को काफी ज्यादा प्रचार सामग्रियां दी जाती हैं, ताकि संयुक्त अरब अमीरात की अच्छी बातों का पश्चिमी देशों में प्रचार हो और ज्यादा से ज्यादा पर्यटक देश पहुंचे और यूएई इसके लिए करोड़ों रुपये पश्चिमी देशों की मीडिया पर खर्च करता है।

दमन के साथ उदार व्यापार

दमन के साथ उदार व्यापार

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन स्थित ग्रुप 'फ्रीडम हाउस' के मध्य पूर्व रिसर्च विश्लेषक कैथरीन ग्रोथ ने कहा कि, "यूएई अपने दमन को जारी रखते हुए खुद को उदार और व्यापार के लिए खुला बाजार बताता है।" उन्होंने कहा कि, "यहां सेंसरशिप बड़े पैमाने पर लागू है और ऑनलाइन और ऑफलाइन भी सेंसरशिप है। ... यह उस काम को सीमित करता है, जो पत्रकार करने में सक्षम हैं।" हालांकि, अखबार कंपनी आईएमआई ने अल रोया के बंद होने की घोषणा से कुछ हफ्ते पहले प्रकाशित कहानी पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कंपनी ने सीएनएन के साथ मिलकर सीएनएन अरेबिक बिजनेस को लॉन्च करने पर ज्यादा जोर दिया है।

2012 में स्थापित हुआ था अखबार

2012 में स्थापित हुआ था अखबार

आपको बता दें कि, अखबार का नाम अल रोया है, जिसका अरबी में मतलब 'लक्ष्य' होता है और इसे साल 2012 में स्थापित किया गया था और इस अखबार को अरब युवाओं को स्थानीय और वैश्विक समाचार प्रदान करने के लिए तीन साल पहले इसकी कंपनी आईएमआई ने रीब्रांड किया था। वहीं, IMI कंपनी का स्वामित्व संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के अरबपति भाई शेख मंसूर बिन जायद अल नाहयान के पास है, जो ब्रिटिश फुटबॉल क्लब मैनचेस्टर सिटी के भी मालिक हैं। IMI के प्रमुख आउटलेट्स में द नेशनल, एक अंग्रेजी भाषा का ब्रॉडशीट अखबार और स्काई न्यूज अरेबिया भी शामिल हैं। हालांकि, ये अखबार पूरी तरह से यूएई सरकार के आधिकारिक लाइन पर ही चलती है, लेकिन इसकी खासियत बिजनेस की खबरों को गहराई से प्रकाशित करने की रही है। वहीं, कंपनी के कर्चमारियों ने कहा कि, इस स्टोरी को इसलिए पब्लिश किया गया, क्योंकि गर्मी के महीने में ऊर्जा की बढ़ी कीमतों को लेकर शहर में लोग इसपर काफी चर्चा कर रहे थे और इसीलिए स्टोरी को पब्लिश किया गया था।

यूएई में क्यों बढ़ाए गये दाम?

यूएई में क्यों बढ़ाए गये दाम?

आपको बता दें कि, संयुक्त अरब अमीरात ने तेल उत्पादों पर सब्सिडी को खत्म कर दिया है और अरब देशों में यूएई ही एकमात्र ऐसा देश है, जिसने सब्सिडी खत्म किया है, लिहाजा लोगों में इसको लेकर नाराजगी है। सरकार का कहना है कि, यूक्रेन संकट का असर देश पर पड़ा है और इसीलिए ये कदम उठाए गये हैं,लेकिन जनता में सरकार के इस फैसले को लेकर नाराजगी देखी गई है। वहीं, सरकार ने कई और पब्लिक वेलफेयर स्कीमों को भी बंद कर दिया है, जिसको लेकर भी जनता नाराज है और अल रोया अखबार में यही स्टोरी पब्लिश की गई थी। स्टोरी में कई स्थानीय लोगों से इंटरव्यू लिया गया था, जिसमें लोगों ने कहा था, कि उन्होंने बचत के लिए अपने खर्चे कम कर दिए हैं। ओमान के साथ लगती सीमा के पास रहने वाले कुछ नागरिकों ने कहा था कि, वो अपनी कारों में तेल भरवाने के लिए सीमा पार चले गये, क्योंकि पहले उन्हें संयुक्त अरब अमीरात में तेल भरवाने में सिर्फ आधा ही भुगतान करना पड़ता था। ओमान से तेल भरवाकर आने वाले लोगों ने अपनी कार में अतिरिक्त टैंकर लगवा लिए थे।

जंगल की आग की तरह फैल गई स्टोरी

जंगल की आग की तरह फैल गई स्टोरी

अल रोया अखबार ने 2 जून को इस स्टोरी को पब्लिश किया था और फिर ये स्टोरी जंगल की आग की तरफ संयुक्त अरब अमीरात में फैल गई, विशेष रूप से सीमा पार जाकर ईंधन भरने की बात की चर्चा पूरे देश में होने लगी। हालांकि, कुछ ही घंटों में लेख को वेबसाइट से हटा दिया गया और इसे कभी भी प्रिंट नहीं किया गया। लेख से जुड़े कई कर्मचारियों को कुछ दिनों बाद कार्यालय में बुलाया गया था। घटनाओं से परिचित लोगों के अनुसार, उन्हें काम से निलंबित कर दिया गया और आईएमआई और अल रोया के प्रतिनिधियों और कहानी के निर्माण, संपादन और प्रकाशन में शामिल हर कदम पर शामिल और हर एक व्यक्ति से कई घंटों तक पूछताछ की गई। और फिर एक हफ्ते बाद इस स्टोरी को पब्लिश करने में शामिल सभी लोगों को एक विकल्प दिया गया, कि वो अतिरिक्त लाभ लेकर या तो खुद इस्तीफा दे दें, नहीं तो उन्हें टर्मिनेट कर दिया जाएगा। समाचार एजेंसी एपी द्वारा प्राप्त ऐसे ही एक पत्र की एक प्रति के अनुसार, इस्तीफे पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों ने अपनी बर्खास्तगी के कारणों के बारे में कुछ भी खुलासा नहीं करने या प्रकाशन की आलोचना नहीं करने का वादा किया था। इस्तीफा देने के लिए मजबूर आठ लोगों में शीर्ष संपादक भी शामिल थे। वहीं, सभी लोगों से इस्तीफा लेने के एक हफ्ते बाद आईएमआई के सीईओ नर्ट बौरन ने एक सर्व-सम्मत बैठक के लिए न्यूज़ रूम का दौरा किया।

न्यूज रूम की बैठक में क्या बात हुई?

न्यूज रूम की बैठक में क्या बात हुई?

हालांकि, अब बैठक में जाने वाले कर्मचारियों के मन में अपनी नौकरी जाने का कोई डर नहीं था, लेकिन आईएमआई के वरिष्ठ प्रबंधकों ने पिछले एक साल में कर्मचारियों को आश्वासन दिया था, कि उनकी नौकरियां सुरक्षित हैं क्योंकि अखबार का संपादकीय ध्यान मुख्य रूप से व्यावसायिक कवरेज पर केंद्रित है। लेकिन, बैठक के दौरान सीईओ ने अखबार के बंद करने और सीएनएन के साथ मिलकर अरबी भाषा में एक नये बिजनेस चैनल खोलने की घोषणा कर दी, जिसके बाद एक ही झटके में अखबार के सभी कर्मचारियों की नौकरी चली गई। रिपोर्ट के मुताबिक, इन कर्मचारियों को कुछ महीनों की सैलरी दे दी गई है।

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