al-Aqsa: इस्लाम के तीसरे सबसे पवित्र अल-अक्सा मस्जिद को जानिए, जहां इजराइली मंत्री ने किया मंदिर बनाने का ऐलान

What's al-Aqsa: इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने अल-अक्सा परिसर में एक आराधनालय बनाने की इच्छा जताकर विवाद को हवा दे दी है। यह स्थल महत्वपूर्ण धार्मिक महत्व रखता है, क्योंकि यह इस्लाम में तीसरा सबसे पवित्र स्थान है, तो यहूदियों के लिए भी यह सबसे पवित्र स्थान है, जो इसे मंदिर कहते हैं। हालांकि, उनकी टिप्पणियों की इजराइली नेताओं और जॉर्डन दोनों ने व्यापक निंदा की है।

इजराइली मंत्री का बयान उस वक्त आया है, जब इजराइल लगातार गाजा पट्टी में हमास के खिलाफ जंग लड़ रहा है और ईरान के साथ साथ ईरानी प्रॉक्सी हिज्बुल्लाह के साथ भी उसके संबंध काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिसको लेकर आशंका है, कि कभी भी जंग शुरू हो सकती है।

Al-Aqsa Mosque

अल-अक्सा परिसर का धार्मिक महत्व

अल-अक्सा परिसर में डोम ऑफ द रॉक और अल-अक्सा मस्जिद है, जिसे इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। यहूदियों के लिए, इसे प्रथम और द्वितीय मंदिर का स्थान माना जाता है, जो इसे उनका सबसे पवित्र स्थान बनाता है। इस स्थल पर नियंत्रण को लेकर इजराइल और फिलिस्तीन के बीच लंबे समय से विवाद रहा है।

1967 में जब से इजराइल ने इस जगह पर कब्जा किया है, तब से एक इस्लामिक ट्रस्ट इस मस्जिद के आंतरिक मामलों का प्रबंधन करता है जबकि इजराइल बाहरी सुरक्षा की देखरेख करता है। हालांकि गैर-मुस्लिम यहां आ सकते हैं, लेकिन उन्हें वहां नमाज़ पढ़ने की मनाही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य इस अत्यधिक संवेदनशील स्थान पर एक नाजुक संतुलन बनाए रखना है।

ऐतिहासिक झड़पें और हिंसा

अल-अक्सा परिसर में समय के साथ कई हिंसक घटनाएं हुई हैं। 1969 में मस्जिद को जलाने की कोशिश की गई थी और 1990 में जब एक यहूदी समूह ने तीसरे मंदिर की आधारशिला रखने की योजना बनाई तो दंगे भड़क उठे थे। साल 2000 में एरियल शेरोन की यात्रा ने दूसरे इंतिफादा को जन्म दिया, जिससे तनाव और बढ़ गया।

हाल ही में, इस स्थल पर इजराइली पुलिस की कार्रवाई के कारण झड़पें हुई हैं। ये घटनाएं इस भारी विवादित क्षेत्र के आसपास चल रही अस्थिरता को उजागर करती हैं।

बेन-ग्विर की टिप्पणियों पर प्रतिक्रियाएं

बेन-ग्वीर की टिप्पणियों की दर्जनों नेताओं ने कड़ी निंदा की है और उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिनमें इजराइली नेता भी शामिल हैं। जॉर्डन और कई इजराइली नेताओं का तर्क है, कि उनके बयान मौजूदा यथास्थिति को खतरे में डालते हैं और इजराइल की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं। वे इस बात पर जोर देते हैं, कि ऐसी टिप्पणियां क्षेत्र में पहले से ही उच्च तनाव को और बढ़ा सकती हैं।

अल-अक्सा परिसर इजराइल-फिलिस्तीनी संबंधों में एक महत्वपूर्ण बिंदु बना हुआ है। इसके मौजूदा प्रबंधन ढांचे में कोई भी बदलाव या कथित खतरे से महत्वपूर्ण अशांति और हिंसा बन सकती है।

यह स्थिति धार्मिक स्थलों के प्रति सावधानी बरतने की आवश्यकता पर भी जोर डालती है, जो विभिन्न धर्मों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। शांति बनाए रखने के लिए स्थापित समझौतों का सम्मान करना और भड़काऊ बयानों या कार्रवाइयों से बचना जरूरी है।

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