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यूएन विशेषज्ञ: आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित अफ्रीका

नई दिल्ली, 26 जुलाई। अफ्रीकी महाद्वीप में आतंकवादी गतिविधियों पर नई रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के एक पैनल द्वारा संकलित की गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ मध्य पूर्वी देशों में सक्रिय दो प्रमुख जिहादी समूह अब अफ्रीकी देशों में स्थानांतरित हो गए हैं. वे कई देशों में बहुत सक्रिय हैं.

Provided by Deutsche Welle

इस्लामिक स्टेट और अल कायदा का प्रभाव मध्य, पूर्वी और पश्चिम अफ्रीका में फैल गया है. इस्लामिक स्टेट और अल कायदा से जुड़े चरमपंथी समूहों की क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति है. रिपोर्ट कहती है-ये समूह हिंसक हमलों और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देना जारी रखते हैं अगर वे अपने विरोधियों को काबू में करने और अन्य क्षेत्रों के लोगों को अपने साथ लाने में विफल रहते हैं तो नतीजतन अनगिनत लोगों की जान जा सकती है.

हथियारों के लिए पैसे इकट्ठा कर रहे आतंकी

रिपोर्ट के मुताबिक इन दोनों जिहादी संगठनों के कार्यकर्ता भी लगातार हथियार हासिल कर रहे हैं और इस उद्देश्य के लिए वे अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों और अन्य समान विचारधारा वाले क्षेत्रों से चंदा और फंड इकट्ठा करने में सफल होते दिख रहे हैं. वे अब अपनी आतंकवादी गतिविधियों के लिए ड्रोन का भी उपयोग कर रहे हैं.

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इराक और सीरिया में सक्रिय एक जिहादी संगठन इस्लामिक स्टेट से संबद्ध सशस्त्र समूहों को अफ्रीका में जिहादी गतिविधि से प्रभावित देशों में अल कायदा की तुलना में अधिक सफलता मिली है. मध्य और पश्चिम अफ्रीकी देशों में इस्लामिक स्टेट समूहों के प्रभाव वाले क्षेत्र हैं. इसके विपरीत अल कायदा सोमालिया और तटीय क्षेत्र में सक्रिय है.

जिहादियों ने माली की सीमाओं के पार बुरकिना फासो, आइवरी कोस्ट, नाइजर और सेनेगल तक अपनी जिहादी गतिविधियों को फैला दिया है. इन देशों के अलावा नाइजीरिया से कैमरून और चाड होते हुए दूसरे पड़ोसी देशों में हिंसा फैल रही है.

आतंक का नेटवर्क

नाइजीरिया में चरमपंथी समूह बोको हराम अभी भी राष्ट्रपति मोहम्मद बुखारी की सरकार के दावों के बावजूद सक्रिय है और अल शबाब सोमालिया में सक्रिय है. पूर्वी अफ्रीका के सोमालिया में सक्रिय अल शबाब के चरमपंथी केन्या और मोजाम्बिक के रास्ते तंजानिया पहुंच गए हैं.

2021 में सबसे परेशान करने वाली खबर रही कि स्थानीय इस्लामिक स्टेट समूहों द्वारा मोजाम्बिक के तटीय शहर मोसाम्बा दे प्राएया पर हमला किया. यह रणनीतिक बंदरगाह शहर तंजानिया के साथ सीमा के करीब है. संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में हारे जिहादी शहर में कहर बरपाने ​​से नहीं कतराते हैं और उनकी चेतावनी है कि भविष्य में और हमला कर सकते हैं.

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विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि घातक कोरोना वायरस महामारी ने भी कुछ हद तक जिहादी समूहों को प्रभावित किया है. जानकारों का मानना ​​है कि इस्लामिक स्टेट वायरस के हथियार से दुश्मन देशों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ऐसा करने में कामयाब नहीं हो पाया है.

एए/वीके (एपी)

Source: DW

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