‘यूक्रेन की मांएं बच्चों के शरीर पर लिख रहीं नाम-पता, ताकि मरे तो बच्चे ना हों लावारिश’, खौफनाक कहानी

पिछले 40 दिनों की लड़ाई के बाद अब एक बात तो तय हो गई है, कि यूक्रेन भले पूरी तरह से बर्बाद और नेस्तनाबूद हो जाएगा, लेकिन वो सरेंडर नहीं करेगा और रूस अब इस जंग को जीत नहीं सकता है।

कीव, अप्रैल 05: यूक्रेन में पिछले 40 दिनों से खौफनाक युद्ध चल रहा है और रूसी सैनिक अभी तक यूक्रेन पर जीत हासिल करने में नाकामयाब रहे हैं। लेकिन, रूसी सैनिकों ने जंग में जीत नहीं मिलने की बौखलाहट में अब यूक्रेन के आम नागरिकों को बुरी तरह से टॉर्चर करना और उन्हें मारना शुरू कर दिया है। आलम ये है, कि अब यूक्रेन की माओं ने अपने बच्चों के शरीर पर पूरा पता लिखना शुरू कर दिया है, ताकि अगर वो युद्ध में मारी जाएं, तो उनके बच्चे लावारिश नहीं हों।

40 दिनों से जारी है जंग

40 दिनों से जारी है जंग

पिछले 40 दिनों की लड़ाई के बाद अब एक बात तो तय हो गई है, कि यूक्रेन भले पूरी तरह से बर्बाद और नेस्तनाबूद हो जाएगा, लेकिन वो सरेंडर नहीं करेगा और रूस अब इस जंग को जीत नहीं सकता है। लिहाजा, रूसी सैनिकों ने राजधानी कीव की घेराबंदी खत्म कर दी और राजधानी से रूसी सैनिकों ने वापस लौटना शुरू कर दिया है। लेकिन, यूक्रेन के साथ साथ अमेरिका का भी मानना है, कि रूसी सैनिक फिर से वापस लौटेंगे, क्योंकि उनका एक भी मकसद अभी तक पूरा नहीं हुआ है और राजधानी पर रूस कब्जा करने में नाकाम रहा है। लेकिन, इस बीच जब रूसी सैनिकों ने राजधानी के पास स्थिति बूचा शहर को खाली किया और वहां पर यूक्रेनी अधिकारी पहुंचे, तो शहर का नजारा सन्न कर देने वाला था।

बच्चों के बॉडी पर नाम

बच्चों के बॉडी पर नाम

वहीं, यूक्रेन से अब कई ऐसी तस्वीरें निकलकर सामने आ रही हैं, जो दिल दहलादेने वाली हैं। यूक्रेन के वो लोग, जो देश छोड़ने में नाकाम रहे हैं, उन्हें हर पल अपनी आंखों के सामने मौत दिखाई दे रहा है और यूक्रेन के लोगों ने अपने बच्चों को लावारिश होने से बचाने के लिए कई तरह के उपाए करने शुरू कर दिए हैं। यूक्रेन की एक पत्रकार अनास्तासिया लापटिना ने एक ट्वीट में एक बच्ची की तस्वीर दुनिया के सामने रखी है, जिसमें दिख रहा है, कि बच्ची के बॉडी पर पेन से उसके बारे में लिखा गया है। पत्रकार अनास्तासिया लापटिना ने कहा कि, यूक्रेन की मांओं ने अपने अपने बच्चों के शरीर पर उनके बारे में लिखना शुरू कर दिया है, ताकि अगर रूसी हमले में उनकी मौत हो जाए, तो उनके बच्चे लावारिश नहीं हों और उन्हें या तो उनके घर तक पहुंचा दिया जाए, या फिर उनके बच्चों की पहचान बनी रहे। यूक्रेन की ये तस्वीरें काफी दर्दनाक हैं और युद्ध की विभीषिका के बारे में बताता है।

नागरिको को टॉर्चर

इस वक्त यूक्रेन का बूचा शहर पूरी दुनिया में हॉटप्वाइंट बना हुआ है, जहां से निकलने वाली तस्वीरें रूसी सैनिकों की बर्बरता की कहानी चीख-चीखकर कह रही है। बूचा की सड़कों पर सैकड़ों शव पड़े हुए हैं, जिनके हाथ बंधे हुए हैं और जिनके शरीर पर गोलियां दागी गईं हैं। चश्मदीदों का कहना है कि, रूसी सैनिको ने लोगों को हाथ बांधकर बिठाया और फिर उन्हें सामने से गोली मार दी। चश्मदीदों के मुताबिक, रूसी सैनिकों को अगर लोग जानकारी नहीं देते थे, तो उन्हें पहले काफी यातनाएं दी जाती थीं और फिर मारकर सड़कों पर फेंक दिया जाता था। लिहाजा, यूक्रेन और उसके सहयोगियों ने रूसी सेना पर 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला करने के बाद कब्जा किए गए क्षेत्रों में युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया है। जबकि रूस ने आरोपों को निराधार बताया है, लेकिन, जो तस्वीरें हैं, वो बताती हैं, कि रूस झूठ बोल रहा है।

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    चश्मदीदों की खौफनाक कहानी

    चश्मदीदों की खौफनाक कहानी

    बुचा शहर की रहने वाली हैना हेरेगा ने कहा कि, उसने एक व्यक्ति को रूसी सैनिकों द्वारा मार जाते हुए देखा है। उन्होंने अलजजीरा से बात करते हुए कहा कि, "वह कुछ लकड़ी लेने बाहर निकला था, जब अचानक उन्होंने [रूसी] शूटिंग शुरू कर दी। उन्होंने उसे एड़ी से थोड़ा ऊपर मारा, हड्डी को कुचल दिया, और वह नीचे गिर गया'। चश्मदीद ने अलजजीरा से कहा कि, ‘शूटर चिल्लाया और घायल को बोला कि, चिल्लाओ मत, नहीं तो मैं गोली मार दूंगा!' और फिर उन्होंने उसके बाएं पैर को बूट से मारा और फिर उसकी छाती पर गोलियां मार दी।‘यूक्रेन के अभियोजक जनरल ने कहा कि यूक्रेन की सेना के पूर्ण नियंत्रण में आने के बाद अब तक 410 नागरिकों के शव बरामद किए जा चुके हैं। शवों को इकट्ठा करने से पहले, अधिकारी उन सबूतों को इकट्ठा करने के प्रयास में फोटो खिंचवाते हैं और उनका दस्तावेजीकरण करते हैं, ताकि ये तस्वीरें, युद्ध अपराधों की जांच का आधार बन सके।

    ‘रूस ने किया नरसंहार’

    ‘रूस ने किया नरसंहार’

    कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने अल जज़ीरा से कहा कि, "यहां जो हुआ वह सिर्फ एक अपराध नहीं है, बल्कि यह एक नरसंहार है। लाखों यूक्रेनियन पीड़ित हैं।" वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि वह बुचा में मृत नागरिकों की तस्वीरों को देखकर "गहराई से स्तब्ध" हैं और उन्होंने एक स्वतंत्र जांच का आह्वान किया है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि उसकी सैन्य इकाइयों ने फुटेज जारी होने से चार दिन पहले बुका छोड़ दिया था। रविवार को मास्को ने शवों के फुटेज और तस्वीरों को कीव द्वारा "उकसाने" और "प्रदर्शन" के रूप में वर्णित किया है।

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