यूक्रेन युद्ध का अंतरिक्ष तक हुआ असर, यूरोप ने रूस के साथ मिशन रोका, जानिए क्या होगा अंजाम ?

नई दिल्ली, 1 मार्च: यूक्रेन में रूस के हमले का असर अंतरिक्ष तक में पड़ने लगा है। यूरोपीय अंतरिक्ष संगठन ने रूस के सहयोग से काम करने से इनकार कर दिया है। इस फैसले का लंबे समय तक असर पड़ सकता है और कई अंतरिक्ष अभियान खटाई में जा सकता है। सबसे बड़ी चिंता तो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को लेकर है, जिसके बारे में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी पहले से ही कई तरह की आशंकाएं जता रही है और भारत को लेकर भी डरावनी संभावनाएं बता चुकी है। यूरोप के ताजा फैसले से उसका मंगल मिशन प्रभावित होना तय लग रहा है, जिसकी लॉन्चिंग पहले कोविड महामारी की वजह से टली थी और अब मामला अनिश्चित काल के लिए लटक गया है।

यूरोपीय अंतरिक्ष संगठन ने रूस के साथ काम बंद किया

यूरोपीय अंतरिक्ष संगठन ने रूस के साथ काम बंद किया

यूक्रेन पर रूस के हमले का असर अब पृथ्वी की कक्षा से बाहर अंतरिक्ष तक पर दिखने लगा है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने रूस के साथ अंतरिक्ष मिशन में सहयोग रोक दिया है। एजेंसी ने इसे 'रूस पर लगी पाबंदियों की पूर्ण तामील' बताते हुए एक बयान में यूक्रेन में युद्ध की वजह से मानवीय क्षति और उसके दुष्परिणामों पर गहरा दुख जताया है। गौरतलब है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन में सैन्य आक्रमण के फैसले की दुनिया भर में जोरदार निंदा हो रही है और इसके खिलाफ गंभीर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एजेंसी का कहना है कि वह सिर्फ मिशन में शामिल अपने कार्यबल की खातिर नहीं, बल्कि यूरोपीय मूल्यों के पूर्ण सम्मान के लिए उचित निर्णय लेने को पूरी प्राथमिकता दे रही है।

हम पाबंदियों की पूर्ण तामिल कर रहे हैं- यूरोप

हम पाबंदियों की पूर्ण तामिल कर रहे हैं- यूरोप

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने अपने बयान में कहा है, 'हम रूस पर अपने सदस्य राष्ट्रों की ओर से उसपर लगाई गई पाबंदियों की पूरी तरह से तामील कर रहे हैं। हम रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोसकॉसमॉस के सहयोग के साथ चल रहे हमारे प्रत्येक कार्यक्रमों के परिणामों का आकलन कर रहे हैं और हमारे फैसलों को अपने सदस्य राष्ट्रों की ओर से औद्योगिक और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ नजदीकी समन्वय से लिए गए फैसलों के साथ तालमेल बिठा रहे हैं।' फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पिछले महीने कहा था कि यूरोप को एक सख्त अंतरिक्ष नीति की आवश्यकता है, क्योंकि विरोधी शक्तियों की वजह से तकनीक, विज्ञान और सैन्य प्रतिस्पर्धा में इसकी संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है।

मंगल मिशन पर पड़ेगा असर

मंगल मिशन पर पड़ेगा असर

अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में यूरोप ने जिस तरह से रूस के साथ सहयोग पर ब्रेक लगाया है, उससे सबसे पहले एक्सेमार्स मिशन पर असर पड़ेगा, जो कि इसी साल के अंत में लॉन्च होने वाला था। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है, 'प्रतिबंध और व्यापक संदर्भ को देखते हुए 2022 में लॉन्च की संभावना बहुत ही कम है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के डायरेक्टर जनरल सभी विकल्पों का आकलन करेंगे और ईएसए के सदस्य राष्ट्रों की ओर से आगे के रास्ते पर औपचारिक निर्णय करेंगे।'

मंगल मिशन 2020 में ही लॉन्च होना था

मंगल मिशन 2020 में ही लॉन्च होना था

गौरतलब है कि यह मंगल मिशन 2020 में ही लॉन्च होना था, लेकिन पहले ही कोरोना वायरस महामारी और तकनीकी दिक्कतों की वजह से इसे टाला जा चुका है। इसे सितंबर में रूसी प्रोटॉन रॉकेट से कजाकिस्तान के बैकोनूर स्पेसपोर्ट से छोड़ा जाना था। एक बार लॉन्च टलने का मतलब है कि फिर से नई तारीख तय करने में कई महीने या साल लग सकते हैं, क्योंकि जबतक सारे ग्रह सही रेखा में नहीं होंगे, यह प्रक्रिया मुश्किल हो जाती है। यह मिशन ये पता लगाने के लिए है कि क्या लाल ग्रह पर कभी जीवन रहा है। 2016 में एक टेस्ट रोवर लॉन्च किया भी गया था, लेकिन वह मंगल पर क्रैश कर गया था।

यूक्रेन युद्ध का अबतक क्या असर हुआ है ?

यूक्रेन युद्ध का अबतक क्या असर हुआ है ?

यूरोप ने ये भी कहा है कि रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोसकॉसमॉस फ्रेंच गुयाना स्थित कोउरोउ के उसके सोयूज लॉन्च मिशन के लॉन्च साइट से अपने वर्कफोर्स को हटा रहा है। शनिवार को रूसी एजेंसी ने इसकी पुष्टि भी की थी। रूसी रॉकेट के जरिए यहां से कई यूरोपीय सैटेलाइट लॉन्च हो चुके हैं और आने वाले कई वर्षों में कितने ही और होने थे।

अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर भी संकट ?

अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर भी संकट ?

हालांकि, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बयान में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रूस के साथ सहयोग के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है। इस मिशन पर अमेरिकी, रूसी और यूरोपीय अंतरिक्ष यात्री मौजूद हैं। क्योंकि, बयान में नासा के साथ आईएसएस के बारे में अलग से खास जिक्र नहीं किया गया है। गौरतलब है कि रोसकॉसमॉस के चीफ ने पहले ही असहयोग की स्थिति में इस स्पेस स्टेशन के अनियंत्रित होकर कहीं भी गिरने की आशंका (भारत पर भी) जताई थी। लेकिन, तब नासा ने कहा था कि पाबंदियों का उस मिशन पर असर नहीं पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में इस समय कुल 7 अंतरिक्ष यात्री मौजूद हैं, जिसमें रूसी नागरिक भी हैं।

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