Ukraine Crisis: यूक्रेन युद्ध को लेकर क्यों है रूस के लोगों में गुस्सा और क्यों करने लगे पुतिन से नफरत?

अभी तक रूस के नागरिक अपने राष्ट्रपति का वो चेहरा देख रहे थे, जिसमें वो पूरी संकल्प के साथ विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका को चुनौती दे रहे थे और अमेरिका से रूस को जो भी जोखिम मिल रहा था...

मॉस्को/नई दिल्ली, फरवरी 25: रूस के लोगों को अब तक लग रहा था, कि वो अपने राष्ट्रपति को जानते हैं। लेकिन, वो गलत थे। और गुरुवार तक जब रूस के लोगों ने अपने राष्ट्रपति का नया चेहरा देखा... जाना, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पिछले 22 सालों के अपने शासनकाल में रूसी राष्ट्रपति ने अभी तक अपनी शांति, दृढ़ और संकल्पित चेहरा रूसियो के सामने पेश किया था, लेकिन रूस के लोग अब अपने जिस प्रिय राष्ट्रपति का चेहरा देख रहे हैं, उससे वो क्षुब्द हैं... हैरान हैं, परेशान हैं।

बदल गया पुतिन का चेहरा!

बदल गया पुतिन का चेहरा!

अभी तक रूस के नागरिक अपने राष्ट्रपति का वो चेहरा देख रहे थे, जिसमें वो पूरी संकल्प के साथ विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका को चुनौती दे रहे थे और अमेरिका से रूस को जो भी जोखिम मिल रहा था, उसे झेल रहे थे और विश्व राजनीति में रूस को लगातार आगे ले जा रहे थे, लेकिन यूक्रेन पर उनके हमले ने उस छवि को नकार दिया और उन्हें एक पूरी तरह से अलग नेता के रूप में प्रकट कर दिया है। व्लादिमीर पुतिन ने दुनिया तो जिस युद्ध में खींच लिया है, उसका अनुमान यूक्रेन के लोगों ने जरा भी नहीं लगाया था और रूस के लोगों का मानना है कि, व्लादिमीर पुतिन ने जो किया है, उसके बाद एक शांतिपूर्ण वैश्विक व्यवस्था और एक शांतिपूर्ण वर्ल्ड ऑर्डर बनाने के प्रयास को खत्म कर दिया है और एक शांतिपूर्ण वैश्विक व्यवस्था में रूस का जगह अब खत्म हो चुका है।

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    सदमें से जागे रूस के लोग

    सदमें से जागे रूस के लोग

    पुतिन के इस कदम ने रूस के लोगों को झकझोर कर रख दिया है और रूस के लोग जब सदमे में जागे, तब तक उन्हें पता चलता है कि, रूस के राष्ट्रपति सुबह-सुबह 6 बजे यूक्रेन पर हमला करने का देश का नाम संबोधन कर चुके हैं। रूस के राष्ट्रपति ने उस देश के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया था, जिसको रूस की राजनीतिक पार्टियां और रूस की एक बहुसंख्यक जनता अपना "भाई राष्ट्र" के रूप में संदर्भित करती आ रही थी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के लोगों में कोई उल्लास नहीं हैं, बल्कि इसके विपरीत... रूस के वो लोग, जो अभी तक पुतिन की सत्तावादी छवि को बर्दाश्त करते आ रहे थे, उन्होंने अपने राष्ट्रपति का खुला विरोध करना शुरू कर दिया है और सोशल मीडिया पर रूस के लोग सबसे ज्यादा इस युद्ध के खिलाफ बोल रहे हैं और अपने राष्ट्रपति की निंदा कर रहे हैं।

    रूस में पुतिन का विरोध

    रूस में व्लादिमीर पुतिन के विरोध में लोग खुलकर सड़क पर उतरने लगे हैं। सेंट पीटर्सबर्ग, जिस शहर में रूसी राष्ट्रपति का जन्म हुआ था, वहां से लेकर साइबेरिया तक, हजारों लोग शहर की सड़कों पर विरोध कर रहे हैं,"युद्ध के लिए नहीं! युद्ध के खिलाफ"। पुलिस अधिकारियों की भारी उपस्थिति के बावजूद, सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जा रहे हैं, युद्ध के वीडियो क्लिप अपलोड किए जा रहे हैं और रूसी अधिकार समूह ओवीडी इंफो ने कहा कि देश भर में अभी तत 1,700 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

    ठगा महसूस कर रहे राजनीतिक विश्लेषक

    ठगा महसूस कर रहे राजनीतिक विश्लेषक

    अखबारों में दर्जनों लेख लिखकर पुतिन की यूक्रेन पॉलिसी की सराहना करने वाले और लगातार इस बात पर जोर देने वाले, कि पुतिन कभी भी यूक्रेन पर हमला नहीं कर पाएंगे, ऐसे रूसी विश्लेषक ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और अब कह रहे हैं, कि इतना सालों तक काम करने के बाद भी वो पुतिन को पहचान नहीं पाए। राजनीतिक विश्लेषक खुलेआम कह रहे हैं, कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को पहचानने में ऐतिहासिक गलती की , जिनका अध्ययन करने में उन्होंने सालो बिताए हैं। ऐसे ही एक विश्लेषक ने नाम न छापने पर जोर देते हुए कहा, कि "जो कुछ भी हम मानते थे वह गलत निकला। क्योंकि, उसने जो कुछ भी कहा, वो गलत साबित हुआ।‘'

    क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक

    एक राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, पुतिन के बारे में जो सोचा, सब गलत निकला, तो राजनीतिक विश्लेषण फर्म आर पॉलिटिक के तातियाना स्टानोवाया ने कहा, ‘मैंने हमेशा पुतिन को समझने की ही कोशिश की, लेकिन अब उन्हें समझना तर्क से परे की चीज लग रहा है, वो अब व्यावहारिक नहीं रहे'। पुतिन की छवि को बनाने की कोशिश क्रेमलिन की तरफ से खूब की जा रही है और पुतिन के पक्ष में इन दिनों रूस में प्रोपेगेंडा टूल्स का भारी इस्तेमाल किया जा रहा है। राज्य संचालित मीडिया पुतिन की ‘विजेता' वाली छवि पेश कर रहा है, लेकिन जनता उतने ही ज्यादा निराश होते जा रहे हैं। एक विश्लेषक ने कहा, कि उन्हें इमरान खान से मिलते हुए सरकारी टीवी में इस तरह से दिखाया गया, जैसे वो काफी नॉर्मल दिनों में किसी राष्ट्र प्रमुख से मिलते हैं। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने टेलीविजन पर कहा, "यह युद्ध की शुरुआत नहीं है।" उन्होंने कहा, "हमारी इच्छा उन घटनाओं को रोकने की है जो वैश्विक युद्ध में बदल सकती हैं।"

    क्या कहते हैं प्रदर्शनकारी

    क्या कहते हैं प्रदर्शनकारी

    वहीं, 44 वर्षीय प्रदर्शनकारी अनास्तासिया ने दंगा पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद गुरुवार शाम मध्य मॉस्को में युद्ध का विरोध करते हुए और आंसू बहाते हुए कहा, "दुनिया उलटी हो गई है।" प्रतिशोध के डर से उसने केवल अपना पहला नाम दिया। "मैं परिणामों की कल्पना भी नहीं कर सकता, यह एक आपदा है।" कई रूसियों का कहना है, कि उनका देश एक शांतिप्रिय देश था और पुतिन एक सावधान नेता थे और यह पुतिन ही थे, जिन्होंने अपने देश को 1990 के दशक की गरीबी और अराजकता से बाहर निकाला और इसे एक सभ्य जीवन स्तर और अंतरराष्ट्रीय सम्मान के योग्य स्थान पर बनाया, लेकिन अब रूस के लोग अपने नेता का जो चेहरा देख रहे हैं, वो उन्हें बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है और पुतिन का नाम अचानक रूसियो के लिए एक काले धब्बे की तरफ हो गया है।

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