Ukraine crisis:1,00,000 सैनिकों का सीमा पर जमावड़ा, आखिर चाहता क्या है रूस ?

नई दिल्ली, 20 जनवरी: रूस की सेना की सीमा पर मौजूदगी यूक्रेन संकट को भयावह बना चुका है। हालांकि, रूस बार-बार हमले की आशंकाओं को खारिज कर रहा है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों को लगता है कि व्लादिमीर पुतिन किसी भी वक्त हमले का आदेश जारी कर सकते हैं। राजनयिक तौर पर इस संकट का हल खोजने की अनेकों कोशिशें हुई हैं, लेकिन रूस अपनी सेना को यूक्रेन की सीमा से हटाने के लिए तैयार नहीं है। ऊपर से अब वह एक नया वॉर गेम शुरू करने में जुट गया है, जिसकी वजह से पश्चिमी देशों की चिंताएं और बढ़ती जा रही हैं।

यूक्रेन की सीमा पर रूस दे रहा है टेंशन

यूक्रेन की सीमा पर रूस दे रहा है टेंशन

पश्चिमी देशों की इंटेलिजेंस का दावा है कि रूस ने पूर्व सोवियत गणराज्य यूक्रेन की पूर्वी सीमा पर 1,00,000 सैनिकों को जुटा रखा है। इसकी वजह से पश्चिमी देशों खासकर अमेरिका की नींद उड़ी हुई है। उसने 'तत्काल, गंभीर और एकजुटता के साथ जवाब' देने की चेतावनी दे रखी है। अमेरिका और उसके सहयोगियों को लगता है कि रूस यूक्रेन के साथ भी वैसा ही कर सकता है, जैसे 2014 में उसने क्रीमिया पर आक्रमण करके किया था। रूस के साथ इन देशों ने कई दौर की बातचीत की है, लेकिन मास्को टस से मस होने के लिए तैयार नहीं है। दूसरी तरफ रूस की दलील है कि पश्चिमी देश बेवजह परेशान हो रहे हैं और उसका युद्ध जैसा कोई इरादा नहीं है।

यूक्रेन संकट का कारण क्या है ?

यूक्रेन संकट का कारण क्या है ?

यूक्रेन की सीमा रूस के साथ-साथ यूरोपियन यूनियन के देशों के साथ मिलती है। पूर्व सोवियत गणराज्य होने की वजह से यहां रूसी संस्कृति का काफी प्रभाव है और रूसी भाषा भी खूब प्रचलित है। रूस को इस बात पर आपत्ति है कि यूक्रेन यूरोपियन संस्थाओं की ओर झुक रहा है और वह यह भी चाहता है कि उसे नाटो में नहीं शामिल होना चाहिए। लेकिन, रूस की इन बातों को पश्चिमी गठबंधन ने खारिज कर दिया है, जिसमें अमेरिका, यूरोपियन यूनियन के देश और नाटो के सहयोगी शामिल हैं। अगर थोड़ा पीछे जाएं तो 2014 में यूक्रेन के राष्ट्रपति को अपदस्थ कर दिया गया था, जो मास्को को नागवार गुजरा। इसके बाद उसने यूक्रेन के दक्षिण प्रायद्वीप क्रीमिया पर हमला कर दिया। इसने यूक्रेन के अलगाववादियों का भी साथ दिया, जिसने इसके बड़े पूर्वी इलाकों पर कब्जा कर लिया था। यहां करीब 8 साल तक चली लड़ाई में 14,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

क्या रूस युद्ध शुरू करने के लिए तैयार है ?

क्या रूस युद्ध शुरू करने के लिए तैयार है ?

पश्चिमी देशों का कहना है कि हां, रूस लड़ाई के लिए तैयार है। इस मसले पर रूसी अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी बात हो चुकी है, लेकिन रूस की सेना यूक्रेन की सीमा पर डटी हुई है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि रूस ने ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया है, जिससे कहा जा सके कि उसका आक्रमण जैसा इरादा नहीं है। वैसे हाल में जिनेवा में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने अपने अमेरिकी समकक्ष को भरोसा दिलाया है कि 'यूक्रेन पर हमले का इरादा या योजना नहीं है।' लेकिन, पुतिन ने हाल ही में पश्चिम के 'आक्रामक रवैए' के खिलाफ 'उचित जवाबी सैन्य-तकनीकी उपाय' वाला बयान देकर अमेरिका की टेंशन बढ़ा रखी है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने एक साल के कार्यकाल पूरे होने पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि उन्हें लगता है कि पुतिन यूक्रेन में बढ़ेंगे, लेकिन रूसी नेता की योजना में उसपर खुलकर हमला करना नहीं है। उधर मंगलवार को ऐसी रिपोर्ट आई कि रूस यूक्रेन के नजदीक फरवरी में वॉर गेम के लिए बेलारूस की ओर अपनी सेना भेज रहा है। व्हाइट हाउस के प्रेस सेक्रेटरी जेन पास्की ने इसे 'बहुत ही गंभीर हालात' बताया है।

आखिर चाहता क्या है रूस ?

आखिर चाहता क्या है रूस ?

रूस ने अपने पड़ोसी पर हमला करने से इनकार किया है, लेकिन वह इस बात की गारंटी चाहता है कि पश्चिमी देश नाटो का विस्तार यूक्रेन या किसी भी पूर्व सोवियत देश या उस स्थानों में नहीं करेंगे जहां रूसी सेना और हथियार हैं। इसने पश्चिमी देशों से 'आक्रामक' रवैया नहीं अपनाने और पूर्वी यूरोप में सैन्य गतिविधियां बंद करने को भी कहा है। इसका मतलब ये हुआ कि नाटो के देश पोलैंड,एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया से अपने लड़ाकू दस्ते हटा लें। लेकिन, अमेरिका और उसके नाटो सहयोगी रूस की इस मांग को ठुकरा चुके हैं। रूस नाटो देशों पर यूक्रेन में हथियार भरने और अमेरिका पर तनाव बढ़ाने का भी आरोप लगा रहा है। पिछले महीने अपने सेना के अधिकारियों से पुतिन ने कहा था कि रूस के पास पीछे हटने का कोई रास्ता ही नहीं है। 'क्या वे सोचते हैं कि हम बेपरवाही से ये सब देखते रहेंगे।'

रूस के खिलाफ पश्चिम के देशों की क्या है तैयारी ?

रूस के खिलाफ पश्चिम के देशों की क्या है तैयारी ?

बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा है कि अगर रूस हमला करता है तो अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी उसे 'गंभीर आर्थिक परिणाम' भुगतवाने के लिए एकजुट हैं। हालांकि, उन्होंने रूस के हमले की जवाबी कार्रवाई के मसले पर सहयोगियों को एकजुट रखने में मुश्किलों और चुनौतियों की बात भी मानी। उधर यूके ने कहा है कि वह रूस की हरकतों को देखते हुए यूक्रेन को आत्म-रक्षा के लिए कम-दूरी के एंटी-टैंक मिसाइल सप्लाई कर रहा है। स्वीडन ने हाल में इसी के मद्देनजर अपने सैकड़ों सैनिकों को रणनीतिक तौर पर अहम गोटलैंड आइलैंड पर तैनात कर दिया है। डेनमार्क ने भी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है। उधर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने समर्थन जताने के लिए बुधवार को यूक्रेन की राजधानी कीव का दौरा किया है और कहा है कि रूस कभी भी हमला कर सकता है, लेकिन अमेरिका जब तक हो सकता है राजनयिक तरीकों को ही आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा। उधर नाटो के सेक्रेटरी जनरल जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने कहा है कि यह यूक्रेन पर निर्भर है कि वह कब उसके गठबंधन में शामिल होता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+