बरसते बम, ध्वस्त होते घर, बर्बाद होते शहर, यूक्रेन के बंकरोंं में कैसे बच्चों को जन्म दे रही हैं माएं...
24 साल की अनास्तासिया हलाज़ेंको ने बंकर में भले ही बच्चे को जन्म दिया है, लेकिन उनका हौसला पस्त नहीं हुआ है।
कीव/मॉस्को, मार्च 16: यूक्रेन में बमबारी के बीच इमारत ध्वस्त हो रहे हैं। कहीं आग लगी है, तो कहीं पूरा का पूरा शहर जमींदोज हो चुके हैं। लेकिन, विध्वंस की तस्वीरों के बीच नन्हीं किलकारियां भी गूंज रही है। यूक्रेन में जो बच्चे जन्म ले रहे हैं, और जिन परिस्थितियों में बच्चों का जन्म हो रहा है, वो तस्वीरें विचलित करने वाली है, लेकिन बंकरों में जन्म लेते बच्चों की यहीं तस्वीरें बताती हैं, कि रोशनी अभी भी जिंदा है।

युद्धक्षेत्र में जन्म लेती किलकारियां
यूक्रेन के युद्ध क्षेत्रों में पैदा हुए बच्चों को दिखाने वाली मार्मिक तस्वीरें देश के सबसे बुरे समय में आशा, खुशी और बहादुरी के क्षण प्रदान कर रही हैं। व्लादिमीर पुतिन के सैनिकों की लगातार बमबारी के बावजूद, लगभग 30 महिलाओं ने एक शहर के एक अस्पताल के बंकर में बच्चों को जन्म दिया है। बंकर में बच्चों का जन्म हो रहा है और बाहर उनकी मातृभूमि पर बम बरसते रहते हैं। कभी कभी अस्पतालों के आसपास भी बमबारी हो जाती है। 24 साल की अनास्तासिया हलाज़ेंको ने भी तहखाने में बच्चे को जन्म दिया है, जो रूसी गोलीबारी में अपनी जान बचाने बंकर पहुंची थीं। रूसी सैनिकों ने इनके शहर को नष्ट कर दिया है।

बंकर में बच्चे का जन्म, हौसला बाकी है
24 साल की अनास्तासिया हलाज़ेंको ने बंकर में भले ही बच्चे को जन्म दिया है, लेकिन उनका हौसला पस्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि, "युद्ध के समय में एक बच्चा होना भयानक है। लेकिन यह खुशी का समय भी है, क्योंकि यह दर्शाता है कि यूक्रेन के लिए सबसे अंधेरे समय में भी जीवन चल रहा है।" वहीं, एक और मां अलीना ने भी अस्पताल के तहखाने में बच्चे को जन्म दिया है, क्योंकि उनके शहर में लगातार हवाई हमले को लेकर सायरन बज रहे थे। अलीना ने बंदरगाह वाले शहर माइकोलाइव मे बच्चे को जन्म दिया है, जहां रूसी सेना भारी बमबारी कर रही है। वहीं, एक और मां अनास्तासिया, जो एक बैंक की कर्मचारी हैं, उन्होंने भी यूक्रेन युद्ध के बीच बच्चे को जन्म दिया है और अपनी भयानक यात्रा के बारे में बताया है।

मां अनास्तासिया की भयानक यात्रा
29 साल की अनास्तासिया यूक्रेन के दक्षिण पूर्वी शहर इज़ियम में रहती है और कुछ दिन पहले ही वो इस शहर में पहुंची थी, लेकिन अनास्तासिया के आने से कुछ दिन पहले युद्ध छिड़ चुका था। उन्होंने कहा कि, "हम पहले तो खिड़कियों से दूर अपने गलियारे में छिप गए, लेकिन फिर स्थिति काफी बदतर हो चुकी थी, इसीलिए हम बंकरों में जान बचाने आ गये। हम लगातार वहीं रुके रहे और बाहर बमबारी की जा रही थी। उन्होंने कहा कि, "हम केवल भोजन और पानी लेने के लिए ऊपर जा पा रहे थे। एक दिन एक गोली हमारे बेडरूम में आलमारी से टकरा गई और मैं बाल बाल बच गई। जिसके बाद मुझे अहसास हुआ कि, युद्ध हमारे कितने करीब है और मैं अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए डर गई। उन्होंने रहा कि, "मैं वास्तव में आश्रय स्थल में बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती थी, लेकिन मेरे पास कोई और विकल्प भी नहीं था।

अस्पताल के बंकर में बची जान
अनास्तासिया बताती हैं कि, एक मार्च को उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुआ और फिर उनके पति उन्हें लेकर किसी तरह से अस्पताल पहुंचे और फिर इमरजेंसी में सीजेरियन द्वारा उन्होंने बच्चे को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि, कुछ घंटे को शांतिपूर्ण बीते, लेकिन सिर्फ कुछ ही घंटे। कुछ घंटे के बाद ही शहर में बमबारी शुरू हो गई और फिर उसे अस्पताल में बने बंकर में ले जाना पड़ा, क्योंकि बमबारी अस्पताल के काफी करीब हो रही थी। उन्होंने कहा कि, "यह एक छोटा कमरा था और वहाँ लगभग दस और महिलाएँ थीं। वहां काफी ठंड थी और फर्श पर सिर्फ कुछ गद्दे थे और इस स्थिति में वहां उनके लिए रहना काफी असंभव लग रहा था।












Click it and Unblock the Notifications