अब चारों तरफ से घिर जाएगा चीन, ऑस्ट्रेलिया में परमाणु पनडुब्बी तैयार कर रहा ब्रिटेन, जानिए पूरा मामला
लंदन, 22 जुलाईः आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के बीच हुआ ऑकस समझौते ने अब रंग दिखाना शुरू कर दिया है। ब्रिटेन ने ऐलान किया है कि वह अगल सप्ताह ऑस्ट्रेलिया में परमाणु पनडुब्बियों का पहला बेड़ा तैनात करने वाला है। आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के बीच बीते साल ऑकस समझौता हुआ था। ये समझौता चीन की आक्रमकता पर लगाम लगाने के लिए हुआ है।

अगले सप्ताह सिडनी में होगी मीटिंग
ब्रिटेन के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ एडमिरल सर टोनी रेडकिन ने कहा है कि अगले सप्ताह सिडनी में एक नौसैनिक सम्मेलन में इस मुद्दे पर एक समझौते पर पहुंचने की उम्मीद है। यह ऑकस सिक्योरिटी अलायंस के तहत ब्रिटेन की प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा। इसके मुताबिक अमेरिका और ब्रिटेन ऑस्ट्रेलिया को परमाणु-संचालित पनडुब्बियों के निर्माण के लिए गुप्त तकनीक प्रदान करने वाले थे। यह पनडुब्बियां भी उसी समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया में तैनात की जाएंगी।

2024 तक किया जाएगा तैनात
ब्रिटेन से मिलने वाली परमाणु पनडुब्बियों को ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट यानी कि पर्थ में 2024 तक गश्ती अभियान चलाने के लिए तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलियाई नौसैनिकों को परमाणु पनडुब्बी का संचालन करने के गुर भी सिखाया जाएगा। इस काम को ब्रिटिश नौसेना के पनडुब्बी चालक दल के सदस्य अंजाम देंगे। फिलहाल अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि ब्रिटेन कितनी पनडुब्बियों को ऑस्ट्रेलिया भेज रहा है।

चीन पर लगाम लगाने का उद्देश्य
सितंबर 2021 में हुए AUKUS समझौते का उद्देश्य चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षा पर लगाम लगाना है। इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया परमाणु शक्ति संचालित पनडुब्बियों के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेगा। ब्रिटेन और अमेरिका इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया को कम से कम 8 परमाणु पनडुब्बियां प्रदान करने वाले हैं। इससे दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर में ऑस्ट्रेलिया की नौसैनिक ताकत में जबरदस्त इजाफा होगा। इतना ही नहीं, इस समझौते के तहत तीनों देश आपस में अपनी साइबर इंफॉर्मेशन, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और अन्य सामुद्रिक तकनीक शेयर करेंगे। इससे प्रशांत महासागर और हिंद महासागर में अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया और करीब आ जाएंगे।

परमाणु क्षमता से लैस सातवां देश
ऑकस समझौते के कारण ऑस्ट्रेलिया परमाणु शक्ति संपन्न पनडुब्बियों की क्षमता से लैस दुनिया का सातवां देश बन जाएगा। इससे पहले अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन, भारत और रूस के पास ही ये तकनीक थी। ये पनडुब्बियां पारंपरिक रूप से संचालित पनडुब्बियों से अधिक तेज होती हैं। इसकी विशिष्टता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पानी में इन पनडुब्बियों का पता लगाना बेहद कठिन होता है। ये महीनों तक पानी में डूबे रह सकती हैं और मिसाइलों से लंबी दूरी तक मार कर सकती हैं।

तीन देशों के बीच है ऑकस समझौता
ऑकस समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले 50 सालों में अमेरिका ने अपनी सब-मरीन तकनीक, ब्रिटेन के अलावा किसी और देश के साथ साझा नहीं की है। बता दें कि ऑकस समझौते के कारण फ्रांस, अमेरिका से बेहद नाराज हो गया था। फ्रांस के विदेश मंत्री ने ऑकस समझौते को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन पर झूठ बोलने का आरोप लगाया था। दरअसल ऑकस समझौते के तहत अमेरिका ऑस्ट्रेलिया को परमाणु शक्ति से लैस पनडुब्बियों के निर्माण की टेक्नोलॉजी मुहैया करा रहा है। जबकि ऑस्ट्रेलिया ने ये समझौता फ्रांस से किया था।

फ्रांस-ऑस्ट्रेलिया के बीच खत्म हुआ समझौता
इस समझौते के कारण फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ 37 अरब डॉलर का समझौता खत्म हो गया। 2016 में हुए इस सौदे के तहत फ्रांस को ऑस्ट्रेलिया के लिए 12 पारंपरिक पनडुब्बियां बनाने थे। इसके बाद फ्रांस ने कदम उठाते हुए अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों से अपने राजदूत वापस बुला लिए थे। फ्रांस ने तो इसे पीठ में चाकू घोंपना करार दिया था।

क्या है परमाणु पनडुब्बी?
परमाणु पनडुब्बी, परमाणु ऊर्जा की ताकत से चलती है। यह अपनी कभी भी खत्म न होने वाली ऊर्जा के कारण काफी ताकतवर माने जाती है। हरेक परमाणु पनडुब्बी में एक छोटा न्यूक्लियर रिएक्टर होता है। इसमें ईंधन के रूप में अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम का उपयोग करते हुए बिजली पैदा की जाती है। इससे पूरी पनडुब्बी को पावर की सप्लाई होती रहती है। वर्तमान में दुनिया के कुछ ही ऐसे देश हैं जिनके पास परमाणु पनडुब्बी हैं।

सबसे अधिक अमेरिका के पास पनडुब्बियां
अमेरिका के पास सबसे अधिक 14 परमाणु पनडुब्बी है। वहीं, रूस के पास 11 परमाणु पनडुब्बियां हैं, जबकि चीन के पास 6 हैं। ब्रिटेन और फ्रांस के पास 4-4 परमाणु पनडुब्बियां हैं। भारत के पास सिर्फ एक आईएनएस अरिहंत नाम की परमाणु पनडुब्बी परमाणु पनडुब्बी है जो कि वर्तमान में भारतीय नौसेना में कार्यरत है। अब ऑस्ट्रेलिया सांतवां देश होगा जिसके पास परमाणु पनडुब्बी होगी।












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