'भारत के साथ FTA पर सही-सही जानकारी क्यों नहीं?' ब्रिटिश संसदीय पैनल ने सुनक सरकार की आलोचना की
भारत और यूके के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत उस वक्त सुस्त पड़ी थी, जब गृहमंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने अप्रवासियों को लेकर भारत की आलोचना की थी।

India-UK FTA: यूके के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने पिछले साल दिवाली तक ही भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) समझौता पूरा करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन उससे पहले ही बोरिस जॉनसन को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और उसके साथ ही, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानि मुक्त व्यापार समझौता, ठंडे बस्ते में चला गया।
यूके सरकार के व्यापार मामलों की जांच करने वाली एक क्रॉस-पार्टी पार्लियामेंट कमेटी ने शुक्रवार को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए भारत के साथ ब्रिटेन की चल रही बातचीत के बारे में उपलब्ध कराई गई जानकारी की कमी को लेकर ऋषि सुनक सरकार की कड़ी आलोचना की है।
हैरान करने वाली बात ये है, कि ब्रिटिश संसदीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि उनके पास एफटीए से संबंधित ज्यादातर जानकारियां भारतीय मीडिया के हवाले से आई हैं, ना कि यूके सरकार की तरफ से। कमेटी ने कहा, कि कई बार भारतीय मीडिया की वो रिपोर्ट्स उनके टेबल पर थीं, जिन्हें अज्ञात भारतीय अधिकारियों का हवाला देकर तैयार किया गया था।
एफटीए पर ब्रिटेन का ढीला रवैया
हाउस ऑफ कॉमन्स इंटरनेशनल ट्रेड कमेटी, जिसे अगले हफ्ते भंग किया जाना है, उसकी जगह पर प्रधानमंत्री ऋषि सुनक एक नये विभाग का गठन करने वाले हैं, उसने कहा है, कि कई बार एफटीए को लेकर ज्यादा जानकारी हासिल करने के लिए उसने भारतीय मीडिया का सहारा लिया।
आपको बता दें, कि भारत और यूके साल 2022 में 34 अरब पाउंड मूल्य के द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने के लिए एक एफटीए को लेकर बातचीत कर रहे हैं, जिसमें आठवें दौर की वार्ता पिछले महीने के अंत में नई दिल्ली में समाप्त हो हुई है और अगले दौर की वार्ता आने वाले हफ्तों में होने की उम्मीद की जा रही है।
स्कॉटिश नेशनल पार्टी के सांसद एंगस ब्रेंडन मैकनील, जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समिति के अध्यक्ष हैं, उन्होंने कहा, कि "संसद को वार्ता के बारे में पूरी तरह से सूचित रखा जाना चाहिए। यह सही नहीं हो सकता है, कि हमने ब्रिटिश सरकार से अधिक जानकारी भारतीय मीडिया से प्राप्त की है।" उन्होंने कहा, कि "भारत के साथ एक व्यापार सौदा दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ हमारे व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने का एक अवसर है। लेकिन यह समझौता किसी भी कीमत पर नहीं होना चाहिए"।
ब्रेंडन मैकनील ने आगे कहा, कि "जैसा कि हमारी रिपोर्ट पर प्रकाश डाला गया है, एनएचएस दवा की लागत, मानव और श्रम अधिकारों, लैंगिक समानता और कीटनाशक मानकों पर संभावित प्रभाव सहित महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।" हालांकि, इस कमेटी ने ऋषि सुनक सरकार के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें भारत के साथ एफटीए समझौता होन के लिए बोरिस जॉनसन सरकार की तरह कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं किया गया है और सरकार का निगोसिएशन उस बात को लेकर है, कि कैसे यूके को इस डील से ज्यादा से ज्यादा फायदा पहुंचे।
कई मुद्दों पर सहमति के लिए बातचीत
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को फाइनल करने से पहले भारत और यूके के अधिकारियों के बीच कई मुद्दों पर बातचीत की जा रही है, जिसमें सस्ते जेनरिक दवाओं की यूके में आपुर्ति को लेकर भी बातचीत चल रही है। इसके अलावा इस समिति ने खाद्य उत्पादों और दवाओं सहित वस्तुओं की गुणवत्ता और सुरक्षा के संबंध में मानकों और जांचों के सौदे से संभावित प्रभावों पर भी ध्यान दिया है।
ब्रिटिश ससंदीय कमेटी की रिपोर्ट में, दोनों देशों के बीच होने वाले इस सौदे में व्यापार उदारीकरण को जोड़ने की संभावना का सुझाव दिया गया है। क्योंकि, भारत संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन मानवाधिकार सम्मेलनों को लागू करता है, जो यह दर्शाता है, कि सामान पर्यावरणीय स्थिरता और पशु कल्याण आवश्यकताओं को दोनों देश पूरा करते हैं।
आपको बता दें, कि भारत अभी तक संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर चुका है, वहीं इजरायल, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम से एफटीए पर बात चल रही है।












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